सरिस्का में ग्रास लैंड बनाने से उजड़ रही टाइगर टेरिटरी, फेंसिंग से भी खतरा
Mukesh Sharma | Jan 01, 2026, 13:03 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के टाइगर रिजर्व सरिस्का में शाकाहारी वन्यजीवों के लिए ग्रास लैंड तैयार हो रही है। लेकिन, यह टाइगर के लिए आफत बन गई है। इससे बाघों की साइटिंग भी नहीं हो रही है। उनकी टेरिटरी में बड़ा बदलाव आया है।
सुनील जैन @ अलवर
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बन रहा ग्रास लैंड बाघों के लिए मुसीबत साबित हो रहा है। ये ग्रास लैंड शाकाहारी वन्यजीवों के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन, इससे बाघों की टेरिटरी उजड़ रही है। ग्रास लैंड बनाने में यहां की छोटी और मूल वनस्पति भी नष्ट हो रही है।
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अलवर के सदर गेट के पास ग्रास लैंड बनाने में काम आ रही जेसीबी ने बाघों के छिपने की जगह को उजाड़ दिया है। इससे बाघिन एसटी 9, युवराज नाम से लोकप्रिय एसटी 21 और एसटी एसटी 2304 की कुछ दिन से साइटिंग भी नहीं हो रही है। वन्य जीव प्रेमियों को मायूस ही लौटना पड़ रहा है।
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सरिस्का प्रोजेक्ट के कुछ अधिकारियों का कहना है कि ये ग्रास लैंड सदर गेट के पास करीब 100 हेक्टर में तैयार हो रही है। इस क्षेत्र के धानका तिराहा, जोड़ली मोरी, काला कुआं तिराहा, सुखरानी और सरिस्का गेट तक ग्रास लैंड के आसपास फेंसिंग भी की जा रही है, जिसके चलते अब बाघों की साइटिंग नहीं हो पा रही है।
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ग्रास लैंड के निर्माण से बाघों की टेरिटरी में संकट आ गया है। बाघ एसटी 9, युवराज नाम से कुछ समय तक एसटी 21, एसटी 9 और एसटी 2304 आम तौर पर विचरण करते दिखाई देते थे। ग्रास लैंड बनाने का काम शुरू होने के बाद इन बाघों की साइटिंग लगभग बंद हो गई है। यहां संभवत: पहली बार ऐसा था कि इस रेंज में एक ही टेरिटरी में एक साथ तीन टाइगर घूम रहे थे, अन्यथा इनमें संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है।
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हाल ही में एक फोटो और वीडियो काफी वायरल हुआ था। इसमें बाघ एसटी 2304 की नाक के पास घाव था। वह ग्रास लैंड के लिए बनाई जा रही फेंसिंग के कारण जख्मी हुआ था। इतना ही नहीं, हाल ही में एक टाइगर के करीब छह से आठ फुट ऊंची फेंसिंग को लांघने का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें भी टाइगर के जख्मी होने की आशंका जताई गई थी। तभी से यह माना जाने लगा कि यह फेंसिंग वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकती है।
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सरिस्का में पांच जोन हैं। सभी जोन में 100-100 हेक्टर में ये ग्रास लैंड तैयार किए जाने हैं। ग्रास लैंड प्लेन एरिया में तैयार किए जा रहे हैं। कुछ जोन में पिछले साल ही ग्रास लैंड तैयार हो गई थी। अब सदर गेट के आसपास काम चल रहा है। बीज डाल कर ग्रास लैंड तैयार की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यहां कई तरह की घास लगाई जा रही है।
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कई जगह मिट्टी ऐसी है कि वो बीज अंकुरित ही नहीं हो रहा। यह भी कहा जा रहा ही जहां खरपतवार ज्यादा है, वहां उसे हटाकर ग्रास लैंड तैयार किया जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि इस जंगल में खरपतवार क्या प्रभावित कर रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हर खरपतवार की एक उम्र होती है, जो मौसम बदलते ही अपने आप खत्म हो जाता है। फिर अगले साल उसी मौसम में आएगा। जेसीबी से नेचुरल ग्रास और छोटे प्लांट पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। वन्यजीव प्रेमी भी इस बात से हैरान हैं कि जंगल से मूल वनस्पति को हटाकर घास क्यों लगाई जा रही है।
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बन रहा ग्रास लैंड बाघों के लिए मुसीबत साबित हो रहा है। ये ग्रास लैंड शाकाहारी वन्यजीवों के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन, इससे बाघों की टेरिटरी उजड़ रही है। ग्रास लैंड बनाने में यहां की छोटी और मूल वनस्पति भी नष्ट हो रही है।
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बाघों की टेरिटरी पर खतरा
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ग्रास लैंड में फेंसिंग
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बाघों ने बदली जगह
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गिरने लगे सीमेंटेड पिलर बताया जा रहा है कि ग्रास लैंड के लिए तैयार हो रही फेंसिंग और सीमेंटेड पीलर अभी से गिरने लगे हैं। इससे चीतल, नीलगाय, सांभर आदि जख्मी हो रहे हैं। इसके अलावा जो घास लगाई जा रही है, वह भी पनप नहीं रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सरिस्का में ग्रास लैंड के काम से रेप्टाइल्स वर्ग के जीव, तीतर, खरगोश, मोर एवं अन्य छोटे जीवों की प्रजातियों का रहवास पूरी तरह प्रभावित होगा, क्योंकि ये अपनी-अपनी सुरक्षा के हिसाब से प्राकृतिक आवास चिन्हित करते हैं।
जख्मी हो गए बाघ
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तीन टाइगर की टेरिटरी
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ग्रास लैंड में बीज अंकुरित नहीं
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हर खरपतवार की एक उम्र होती है, जो मौसम बदलते ही अपने आप खत्म हो जाता है। फिर अगले साल उसी मौसम में आएगा। जेसीबी से नेचुरल ग्रास और छोटे प्लांट पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। वन्यजीव प्रेमी भी इस बात से हैरान हैं कि जंगल से मूल वनस्पति को हटाकर घास क्यों लगाई जा रही है।
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