मंत्री संजय शर्मा को रास नहीं आ रहा सीकर, बैठक से मीडियाकर्मियों को किया बाहर
Mukesh Sharma | May 27, 2026, 20:47 IST
Sanjay Sharma Photograph: (The sootr)
राजस्थान में सीकर के प्रभारी मंत्री संजय शर्मा की उपस्थिति में मीडिया को सरकारी समीक्षा बैठक से बाहर निकालने और भाजपा पदाधिकारियों को शामिल करने पर विवाद खड़ा हो गया हैं। पत्रकारों ने मंत्री की प्रेस वार्ता का बहिष्कार किया।
News In Short
- वन मंत्री संजय शर्मा ने सीकर में सरकारी बैठक से मीडिया को बाहर निकाला।
- सीकर में प्रेस को देख भड़के वन मंत्री संजय शर्मा, फिर बैठक से किया बाहर।
- बीजेपी पदाधिकारियों को बिठाया साथ, पत्रकारों ने किया प्रेस वार्ता का बहिष्कार।
- सीकर में पुराना है मंत्री जी का रिकॉर्ड, पहले कलेक्टर से भी उलझ चुके हैं शर्मा।
- डोटासरा का तीखा हमला, कहा सच और सवालों से डर रही है अहंकारी सरकार।
News In Detail
दरअसल वन मंत्री संजय शर्मा बुधवार को सीकर में बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन और वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान की समीक्षा बैठक में भाग ले रहे थे। संजय शर्मा सीकर के प्रभारी मंत्री हैं।
भाजपा सरकारों में तो यह चलता ही है
मंत्री ने कहा कि मीडिया नेगेटिव खबरें चलाता है इसलिए बैठक के बाद आएं और वैसे भी यह सरकारी बैठक है। मीडियाकर्मियों ने कहा कि जब भाजपा के पूर्व पदाधिकारी बैठक में हो सकते हैं तो मीडिया से क्या परेशानी है। इस पर मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि यह तो भाजपा सरकारों में चलता ही आ रहा है।
इसके बाद मीडियाकर्मियों ने पीआरओ की ओर से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस का बहिष्कार कर दिया। मामले को लेकर विपक्ष ने भी वन मंत्री और प्रशासन पर निशाना साधा है।
कलक्टर से उलझे थे संजय शर्मा
मंत्री संजय शर्मा ने मुकुल शर्मा के साथ सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने से मना कर दिया था। लेकिन, प्रमोशन होने पर मुकुल शर्मा को जयपुर में मुख्यमंत्री का विशिष्ट सचिव लगाया गया।
सीकर से मुकुल शर्मा की विदाई के करीब डेढ़ महीने बाद संजय शर्मा बुधवार को सीकर पहुंचे थे। इस बार वे मीडिया से उलझ गए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।
आज सीकर जिला कलेक्ट्रेट में प्रभारी मंत्री संजय शर्मा जी के द्वारा ली गई बैठक में जिस तरह से नियम-कानूनों एवं प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
ये कोई भाजपा कार्यालय की बंद कमरे वाली बैठक नहीं थी। ये जिला प्रशासन की सरकारी बैठक…
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) May 27, 2026
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने साधा निशाना
डोटासरा के अनुसार यह जिला प्रशासन की सरकारी बैठक थी, जो संविधान, नियमों और पारदर्शिता की भावना से संचालित होनी चाहिए थी। एक तरफ बैठक में मीडिया को कवरेज से रोककर पारदर्शिता का गला घोंटा और दूसरी ओर बैठक में भाजपा पदाधिकारियों व अवांछित लोगों की मौजूदगी होना साफ बताता है कि भाजपा सरकार प्रशासनिक संस्थाओं को भी पार्टी कार्यालय की तरह चलाना चाहती है।
डोटासरा ने लिखा है कि सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सरकारी बैठक में अवांछित राजनीतिक दखल किस नियम के तहत स्वीकार किया गया।
बैठक में पत्रकारों के साथ किया गया व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि बताता है कि सच और सवालों से वही सरकार डरती हैं, जिसके पास जवाब नहीं होते। जिस बैठक में जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, वहां सत्ता का अहंकार और पक्षपात होना बेहद चिंताजनक है।
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