सोनम वांगचुक ने जेल के अनुभवों पर लिखी किताब, पत्नी बोलीं-जल्द होगी लॉन्च
Ashish Bhardwaj | Mar 16, 2026, 17:41 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की जोधपुर जेल में 170 दिन बंद रहे सोनम वांगचुक ने जेल के अनुभवों पर किताब लिखी है। उनकी पत्नी का दावा है कि यह किताब जल्द ही लॉन्च होगी।
News In Short
- जोधपुर जेल में सोनम वांगचुक ने लिखी किताब 'Forever Positive'।
- किताब में जेल के अनुभव, सकारात्मक सोच और कठिन हालात में मानसिक मजबूती की कहानी होगी।
- जेल के दौरान पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो बनी रहीं उनका सबसे बड़ा सहारा।
- जेल में मिलने वाले अखबारों में लद्दाख से जुड़ी खबरों के हिस्से पहले ही काट दिए जाते थे।
- जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए चींटियों से सीखा संघर्ष का सबक।
News In Detail
लद्दाख के मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अब जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो चुके हैं। वे करीब 169 दिन तक जेल में बंद रहे। इस दौरान उन्होंने जेल के अपने अनुभवों को शब्द देने का फैसला किया। उन्होंने एक नई किताब लिखनी शुरू की, जिसका संभावित नाम “Forever Positive” बताया जा रहा है। उनकी पत्नी गीतांजलि के मुताबिक यह किताब सोनम वांगचुक के जेल के अनुभव, सकारात्मक सोच और कठिन हालात में मानसिक मजबूती की कहानी होगी।
सादगी और अनुशासन में गुजरा जेल का समय
पत्नी बनी सबसे बड़ा सहारा
गीतांजलि ने बताया कि वांगचुक ने जेल में रहते हुए कई किताबें पढ़ीं। इनमें श्री अरविंदो की ‘Tales of Prison Life’ खास रही, जिसमें अलीपुर जेल में बिताए गए एक साल के अनुभव लिखे गए हैं। इसके अलावा उन्होंने Richard Bach की ‘Jonathan Livingston Seagull’ और ‘Mister God, This Is Anna’ जैसी किताबें भी पढ़ीं।
अनुशासित दिनचर्या और वो कटे हुए अखबार
जेल में उन्हें अखबार तो मिलते थे, लेकिन उनसे जुड़ी या लद्दाख से जुड़ी खबरों के हिस्से पहले ही काट दिए जाते थे। जब भी अखबार में कटे हुए हिस्से दिखते, वे समझ जाते थे कि उस दिन उनके बारे में कोई खबर छपी होगी।
चींटियों से सीखा संघर्ष का सबक
वे घंटों उन्हें देखते और उनके अनुशासन तथा एकजुटता से प्रभावित होते। उन्हें लगता था कि जैसे छोटी-सी चींटियां मिलकर बड़े काम कर सकती हैं, वैसे ही लोग मिलकर लद्दाख के लिए बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने पत्नी से ‘Ants: Workers of the World’ नाम की किताब भी मंगवाई, जिसमें चींटियों की दुनिया और उनके व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह किताब उनके बड़े भाई ने तोहफे के रूप में दी थी।
जेल में भी इंजीनियर वाला दिमाग चलता रहा
उनका विचार था कि बैरकों के तापमान का अध्ययन करके प्राकृतिक तरीके से जेल की इमारतों को गर्मी और सर्दी में बेहतर बनाने पर प्रयोग किया जा सकता है। यह उनकी पर्यावरण-अनुकूल वास्तुकला की सोच को भी दिखाता है।
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