पंचायत चुनाव को लेकर आयोग एक्टिव, आरक्षण आंकड़ों की फिर मांग

Jageshwar prasad | Jun 03, 2026, 14:15 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-06-03T134900.166
Photograph: (the sootr)

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े मांगे हैं। आयोग का कहना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।

News In Short

  • राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण के नए आंकड़े मांगे हैं।
  • आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से डेटा उपलब्ध कराने को कहा है।
  • आयोग का कहना है कि डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
  • 15 अप्रैल को चुनाव न कराने के मामले में आयोग ने डेटा न मिलने को बताया था कारण।
  • पंचायत और निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं, नजर डेटा उपलब्ध कराने पर टिकी है।

News In Detail

राजस्थान में लंबे समय से लंबित पड़े पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आम चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित कर आरक्षण निर्धारण से संबंधित नवीनतम, श्रेणीवार और प्रमाणित आंकड़े तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है।

निर्वाचन आयोग का स्पष्ट मत है कि जब तक दोनों विभागों से अंतिम डेटा प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा करना संभव नहीं होगा। इस कदम के बाद प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभागों में हलचल तेज हो गई है।

विभागों से मांगे आंकड़े

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं। आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है। आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।

आयोग को कोर्ट में देना है जवाब

उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था। 15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने राजस्थान हाई कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था।

कोर्ट ने आयोग की इस दलील को सुना था और फिर 31 मई तक की समय सीमा दी थी। अब आयोग ने फिर से विभागों से डेटा मांगकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी तरफ से चुनाव कराने में कोई लापरवाही नहीं है।

डेटा को लेकर क्या है असमंजस?

राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। सरकार का कहना था कि आरक्षण के लिए डेटा मौजूद है, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है।

यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है। आयोग चाहता है कि आरक्षण को लेकर कोई विवाद न रहे और चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।

पंचायत और निकाय चुनाव लंबित

राजस्थान में पंचायती राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं। कई बार चुनाव की तारीखें आगे बढ़ाई जा चुकी हैं। इस बीच स्थानीय संस्थाओं में कई पद खाली चल रहे हैं, जिससे जनता के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चुनाव में देरी और अब तक की टाइमलाइन

ChatGPT Image Jun 3, 2026, 01_44_08 PM
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अब क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है, क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी। यदि डेटा जल्द मिल जाता है तो चुनाव की प्रक्रिया तेज हो सकती है और आने वाले महीनों में मतदान कराए जाने की उम्मीद है।

हालांकि अगर डेटा देने में फिर देरी होती है तो चुनाव और टल सकते हैं। फिलहाल सभी को इस बात का इंतजार है कि विभाग कितनी जल्दी आयोग को आंकड़े उपलब्ध कराते हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि डेटा मिलते ही वह चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगा।

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