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Photograph: (the sootr)
राजस्थान में उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार से जुड़े संपत्ति विवाद ने अब एक नया मोड़ आ गया हैं। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्तियों के उत्तराधिकार को लेकर उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी व भार्गवी के बीच चल रहा कानूनी जंग अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। 12 जनवरी को इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में हुई, जिसमें जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने भाई-बहनों के द्वारा दायर वसीयतनामा मामलों की संक्षिप्त सुनवाई की।
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20 जनवरी को सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की ओर से पेश वकील को नई सूची दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। यह फैसला दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब अदालत में यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी सुनवाई से पहले उन्हें सभी दस्तावेज और पक्षकारों की लिस्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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संपत्ति विवाद और वसीयत का मामला
यह विवाद उदयपुर के राजघराने की संपत्तियों के उत्तराधिकार और उस सम्पति के नियंत्रण को लेकर है। बताया गया है कि अरविंद सिंह मेवाड़ ने फरवरी 2025 में एक वसीयत बनाई थी। इसमें उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र वारिस अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बताया था।
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पद्मजा कुमारी का विरोध
वहीं, उनकी बहन पद्मजा कुमारी ने इस वसीयत को अवैध बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन भी दायर की थी। क्योंकि इस विवाद से जुड़े मामले अलग-अलग हाई कोर्ट में चल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में आदेश दिया कि सभी मामलों को एक ही अदालत में सुना जाए। अब यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित हो गया हैं।
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निधन से 36 दिन पहले बनाई थी वसीयत
पूर्व राजपरिवार के सदस्य दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था। निधन से 36 दिन पहले, 7 फरवरी को उन्होंने अपनी अंतिम वसीयत बनाई और उसे उपपंजीयक कार्यालय में विधिवत पंजीकृत कराया। इस वसीयत में उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को नामित किया था। वसीयत के सामने आने के 15 दिन बाद ही विवाद शुरू हो गया था।
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इन प्रॉपर्टियों को लेकर है विवाद
बेटियों ने दावा किया कि उन्हें अपने पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सा मिलना चाहिए। याचिका में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उनमें उदयपुर स्थित शिकारबाड़ी की जमीन, मुंबई के मेवाड़ हाउस के छठे माले का आधा हिस्सा, मुंबई स्थित दार्जिलिया हाउस सहित अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
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आगामी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है, क्योंकि यह दोनों पक्षों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होगा कि आगे चलकर मेवाड़ परिवार की संपत्तियों का उत्तराधिकार और नियंत्रण किसके हाथ में होगा।
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मेवाड़ राजपरिवार के संपत्ति विवाद के मुख्य बिंदु:
- यह विवाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और पद्मजा कुमारी व भार्गवी के बीच है, जो अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्तियों के उत्तराधिकार को लेकर चल रहा है।
- अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपनी वसीयत में अपनी संपत्तियों का एकमात्र वारिस अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बताया था।
- इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में होगी, जहां सभी पक्षों की ओर से नए दस्तावेज़ और पक्षकारों की सूची दाखिल की जाएगी।
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