महाराणा प्रताप के वंशजों में वसीयत विवाद बढ़ा, दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई 12 जनवरी को

thesootr Desk | Jan 03, 2026, 14:50 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान में महाराणा प्रताप के वंशजों में संपति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व राजपरिवार में दो बहनों पद्मजा कुमारी-भार्गवी कुमारी और उनके भाई लक्ष्यराज सिंह के इस विवाद में 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी।

Udaipur. राजस्थान में मेवाड़ के महाराणा प्रताप के वंशजों में संपति को लेकर वसीयत विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। यह विवाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनकी दोनों बहनों पद्मजा कुमारी, भार्गवी कुमारी के बीच हैं। इस विवाद की दिल्ली हाईकोर्ट में 12 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई होगी।

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बेटियों के आरोपों की सुनवाई

मेवाड़ राजपरिवार के दिवंगत सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर उनकी दो बेटियों ने आपत्ति जताई है। इन्होने अपने भाई लक्ष्यराज को मिली संपति पर आपत्ति की है। उन्होने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि उनके पिता अंतिम समय में मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। इसलिए उनकी बनाई वसीयत वैध नहीं हो सकती। पद्मजा और भार्गवी का कहना है कि उनके पिता विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे, इसीलिए वसीयत को चुनौती दी जा रही है।

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महाराणा प्रताप के वंशजों में वसीयत विवाद बढ़ा

इन दोनों बहनों ने वसीयत में अपनी हिस्सेदारी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट में याचिका दायर की उन्होने पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सा मिलने की मांग की है। याचिका में उदयपुर स्थित शिकारबाड़ी की जमीन, मुंबई में मेवाड़ हाउस का छठा माला और दार्जिलिया हाउस संपत्तियों में हिस्सेदारी मांगी गई है। ये सभी महाराणा प्रताप के वंशज है।

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लक्ष्यराज सिंह की प्रतिक्रिया

वसीयत के विवाद पर लक्ष्यराज सिंह ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संपत्ति के लालच में उनकी बहनों ने उनके पिता की छवि को ठेस पहुंचाई है। उनका कहना था कि ऐसे बड़े परिवार के व्यक्ति की छवि को इस तरह से नुकसान पहुंचाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बहनें संपत्ति के मामले में केवल स्वार्थी दृष्टिकोण से कार्य कर रही हैं।

लक्ष्यराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पारिवारिक विवाद अत्यधिक संवेदनशील है और उनका ध्यान केवल परिवार की गरिमा बनाए रखने पर है। उन्होंने कहा कि वसीयत के मामले में अदालत ही अंतिम निर्णय करेगी।

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अगली सुनवाई की तारीख अब यह मामला उच्चतम न्यायालय में चर्चा का विषय बन चुका है। अदालत में आगामी सुनवाई 12 जनवरी 2026 को होगी, जब यह तय होगा कि इस वसीयत को वैध माना जाए या नहीं। परिवार में इस प्रकार के विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया से ही संभव है, और यह पूरे मेवाड़ क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मामला बन चुका है।
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यह है पूरा मामला

मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति और अंतिम वसीयत को लेकर विवाद शुरु हुआ था। उनकी छोटी बेटी पद्मजा और बड़ी बेटी भार्गवी कुमारी ने मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ और शराब के आदी थे। बेटियों का कहना है कि इस कारण उन्होंने संपत्ति पर विवेकपूर्ण निर्णय नहीं लिया, इसलिए अंतिम वसीयत को चुनौती दी जा रही है।

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हिस्सेदारी वाली संपतियां

पद्मजा और भार्गवी कुमारी ने कोर्ट में पिता की संपत्तियों में हिस्सेदारी मांगी है। इसमें शिकारबाड़ी की भूमि, मुंबई स्थित मेवाड़ हाउस का छठा माला का आधा हिस्सा, मुंबई में दार्जिलिया हाउस समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं।

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मुख्य बिंदू :

पद्मजा और भार्गवी कुमारी ने यह आरोप लगाया है कि उनके पिता अरविंदसिंह मेवाड़ मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उन्होंने अपनी वसीयत विवेकपूर्ण तरीके से नहीं बनाई थी, इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता।

वसीयत में उदयपुर स्थित शिकारबाड़ी की जमीन, मुंबई स्थित मेवाड़ हाउस का छठा माला और दार्जिलिया हाउस जैसी संपत्तियों का उल्लेख किया गया है।

लक्ष्यराज सिंह ने कहा कि उनकी बहनों ने संपत्ति के लालच में उनके पिता की छवि को नुकसान पहुंचाया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि यह पारिवारिक सम्मान और गरिमा की बात है।

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