छत्तीसगढ़ के अफसरों का बस खाने कमाने का प्रयास, ऐसे हो रहा है गांवों विकास, करप्शन के बाद भी प्रमोशन

Arun Tiwari | Mar 27, 2026, 14:50 IST
Share
cg-Panchayat-Rural-Development-Officers-corruption-promotion
cg-Panchayat-Rural-Development-Officers-corruption-promotion

छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के दो दर्जन ज्यादा अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने बस खाने कमाने का काम किया है। कमाल की बात तो ये है कि इनके प्रकरण ईओडब्ल्यू और लोक आयोग में दर्ज होने के बाद भी सरकार इनको प्रमोशन देती रही।

News in Short:

  • कमाई में लगे पंचायत एवं ग्रामीण विकास के अफसर
  • 26 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले
  • ईओडब्ल्यू में चल रहे हैं मामले
  • प्रकरण के बाद भी मिला प्रमोशन

News in Detail:

Raipur. छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी ऐसे हैं जो केवल निजी लाभ के लिए कार्यरत रहे। इन अधिकारियों ने छोटे-मोटे कामों के लिए रिश्वत ली, साथ ही मनरेगा में फर्जी मजदूरों को भुगतान करने समेत आर्थिक अनियमितताएं की। इनके खिलाफ ईओडब्ल्यू, एसीबी और लोक आयोग में प्रकरण दर्ज हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इनमें से कुछ अधिकारियों को प्रकरण दर्ज होने के बावजूद प्रमोशन मिला। सवाल उठता है कि जब काम में भ्रष्टाचार है, तो प्रमोशन किस आधार पर मिला।

कर रहे भ्रष्टाचार - पा रहे प्रमोशन:

छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत दो दर्जन से ज्यादा अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि ये अधिकारी वर्षों तक निजी लाभ की मानसिकता के साथ कार्यरत रहे और सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन पर प्रकरण दर्ज होने के बावजूद कुछ अधिकारियों को प्रमोशन भी मिला। इन अधिकारियों ने छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत लेने में संकोच नहीं किया। गांव स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में भुगतान के बदले कमीशन लेना आम बात बन गई। विशेष रूप से मनरेगा में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं।

कई मामलों में फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान किया गया। ऐसे मजदूर जो वास्तविकता में मौजूद नहीं थे, उनके नाम पर राशि निकाल ली गई। इसके अलावा निर्माण कार्यों में भी कागजों पर काम दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। इनके खिलाफ ईओडब्ल्यू और लोक आयोग में प्रकरण दर्ज हैं।

ईओडब्ल्यू में प्रकरण:

  • केके कटारे, तत्कालीन ईई - निर्माण कार्य में अनियमितता
  • हरिओम शर्मा, तत्कालीन ईई - आर्थिक अनियमितता
  • दिनेश अग्रवाल, प्रभारी संयुक्त संचालक - फर्जी तरीके से भर्ती
  • सौरभ कुमार ताम्रकार, सब इंजीनियर - 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
  • विवेक प्रताप सिंह राठौर, सब इंजीनियर - ठेकेदार से मिलीभगत कर घटिया काम
  • नरेंद्र राउतकर - घूस लेते पकड़ाया
  • सत्येंद्र सिन्हा - रिश्वत लेते पकड़ाया
  • केके कटारे, प्रभारी चीफ इंजीनियर - अनाधिकृत रूप से विदेश यात्रा
  • कंवर, कार्यपालन अभियंता - दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर चहेते ठेकेदार को काम
  • रिषीकांत तिवारी, अनुविभागीय अधिकारी - रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
  • प्रदीप कुमार बघेल, सब इंजीनियर - मूल्यांकन रिपोर्ट के बदले 30 हजार की रिश्वत
  • केके कटारे, चीफ इंजीनियर - पद का दुरुपयोग
  • गोपाल कृष्ण शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी - मूल्यांकन रिपोर्ट के बदले 25 हजार की रिश्वत

लोक आयोग में प्रकरण:

  • अनिल कुमार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी - फर्जी भुगतान
  • हरविलास बरेठ, सब इंजीनियर - मनरेगा के फर्जी मजदूरों का भुगतान
  • सोनू देवांगन, तकनीकी सहायक - मनरेगा के फर्जी मजदूरों का भुगतान
  • रामनारायण कश्यप, सचिव - फर्जी भुगतान
  • लखनलाल साहू - फर्जी भुगतान
  • उत्तम कुमार चौधरी, सब इंजीनियर - सरकारी राशि का आहरण
  • रोहित कुमार नायक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी - कारखाने के कामों का सही मूल्यांकन नहीं
  • विवेक गोस्वामी - पक्षपातपूर्ण राशि का भुगतान
  • सरिता तिवारी, संयुक्त आयुक्त - अनुपातहीन संपत्ति अर्जित
  • राजेंद्र पांडेय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी - भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं
  • अनीता जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी - खरीदी में अनियमितता
  • बरन सिंह भंडावी - अवैध कब्जा
  • बीआर वर्मा - गलत तरीके से नियुक्ति
  • मनोज कुमार तिवारी, तत्कालीन संचालक - किराए के वाहन की राशि खुद को भुगतान
  • वृंदावती प्रधान - मनरेगा में अनियमितता
  • आकाश सोनी, सहायक संचालक - फर्जी दिव्यांगता से नौकरी

प्रकरण दर्ज होने के बाद भी मिला प्रमोशन:

  • हरिओम शर्मा - चीफ इंजीनियर
  • दिनेश अग्रवाल - उप संचालक
  • कमलराम साहू - अधीक्षण अभियंता
  • अनिल कुमार मिश्रा - सब इंजीनियर
  • हरिशंकर चौहान - संयुक्त आयुक्त
  • सरिता तिवारी - संयुक्त आयुक्त

आगे क्या:

विभागीय सूत्रों के अनुसार अब इन मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है, जिसमें निलंबन, बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

निष्कर्ष:

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप और प्रकरण दर्ज हैं, तो उन्हें प्रमोशन कैसे मिला। विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

यह खबरें भी पढ़ें...

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार ! पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमित शाह को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ में 166 स्कूलों पर ताला, विधानसभा में उठे सवाल, उद्योग विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर बांट रहे जमीन

हाईकोर्ट की EOW को फटकार, एक साल के बच्चे को ही बना दिया भ्रष्टाचार का आरोपी

भ्रष्टाचार पर हाई कोर्ट का अहम आदेश, पुख्ता सबूत हों तो ​गवाहों के पलटने का प्रभाव नहीं

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • भ्रष्टाचार
  • प्रमोशन
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
  • छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई