भ्रष्टाचार पर हाई कोर्ट का अहम आदेश, पुख्ता सबूत हों तो गवाहों के पलटने का प्रभाव नहीं
Mukesh Sharma | Mar 13, 2026, 20:16 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में पुख्ता सबूत होने पर शिकायतकर्ता व गवाहों के पलटने को प्रभावहीन माना है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता व गवाहों के पलटने के बावजूद ट्रायल कोर्ट के सजा के आदेश को बहाल रखा है।
News In Short
- विश्वसनीय साक्ष्य हों तो शिकायतकर्ता के मुकरने से भ्रष्टाचार का मामला नहीं होता कमजोर
- राजस्थान हाई कोर्ट ने टिप्पणी के साथ ट्रायल कोर्ट की सजा को रखा बरकरार।
- कोर्ट ने कहा, रिश्वत मांगने और लेने के पुख्ता सबूत हों तो गवाहों के पलटने का प्रभाव नहीं।
- कोर्ट ने माना, वॉइस रिकॉर्डिंग से रिश्वत की मांग होती है साबित।
- सबूतों की सुसंगत श्रंखला होना दोष सिद्धि व सजा के लिए पर्याप्त आधार।
News In Detail
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य,ट्रैप कार्यवाही और बरामदगी के माध्यम से रिश्वत की मांग और स्वीकृति को पर्याप्त रूप से सिद्ध कर दिया है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने यह आदेश पृथ्वीलाल मीणा व हेमराज की अपील को खारिज करते हुए दिए।
मुकरने से मामला समाप्त नहीं होता
भ्रष्टाचार के मामलों में कई बार दबाव, समझौते या अन्य कारणों से गवाह अपने बयान बदल लेते हैं। ऐसे में अदालत को उपलब्ध सभी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होता है। यदि स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद हों तो उनके आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी जा सकती है।
वॉइस रिकॉर्डिंग से रिश्वत की मांग सिद्ध
इन रिकॉर्डिंग्स के ट्रांसक्रिप्ट के साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि इन बातचीतों से स्पष्ट होता है कि सहायक अभियंता ने अवैध राशि की मांग की और उसे एक मध्यस्थ के माध्यम से लेने का निर्देश दिया।
एसीबी ट्रैप में बरामद हुई राशि
ट्रैप के दौरान शिकायतकर्ता ने फिनॉलफ्थेलीन पाउडर लगे 5,500 रुपए की राशि आरोपी के सहयोगी को दी। इसके तुरंत बाद एसीबी टीम ने मौके पर पहुंचकर उसके पास से वही राशि बरामद कर ली। परीक्षण के दौरान फिनॉलफ्थेलीन टेस्ट भी सकारात्मक पाया गया, जिससे यह साबित हुआ कि आरोपी ने रिश्वत की राशि को हाथ लगाया था।
मध्यस्थ के माध्यम से रिश्वत लेना भी अपराध
अदालत ने कहा कि यदि यह सिद्ध हो जाए कि मध्यस्थ ने लोक सेवक के निर्देश पर रिश्वत ली है, तो उसे कानूनन लोक सेवक द्वारा रिश्वत स्वीकार करना ही माना जाएगा। रिकॉर्डिंग, ट्रैप कार्यवाही और बरामदगी से दोनों आरोपियों के बीच स्पष्ट सांठगांठ साबित होती है।
ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
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