पेशाब टपकने की समस्या है तो खुद पढ़ें नमाज, इमाम बनकर दूसरों को न पढ़ाए, वायरल हुआ फतवा
Amresh Kushwaha | Mar 16, 2026, 13:47 IST
bhopal fatwa imamat urinary incontinence rules islam
भोपाल में पेशाब से जुड़े मामले को लेकर जारी फतवे ने हलचल मचा दी है। जानें क्या है इस फतवे में और माजूर व्यक्ति के लिए इमामत (Imamat) के शरई नियम के बारे में... साथ ही, आज होने वाली अहम बैठक के मायने...
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों एक धार्मिक आदेश यानी फतवा चर्चा का विषय बना हुआ है। जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता के जारी इस फतवे ने न केवल धार्मिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है। मामला इमामत (Imamat - नमाज का नेतृत्व करना) और शारीरिक शुद्धि से जुड़ा है।
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक आदेश (फतवा) तेजी से वायरल हो रहा है। इस फतवे में एक विशेष बीमारी की स्थिति में नमाज पढ़ाने को लेकर शरई राय (Religious Opinion) मांगी गई थी।
विवाद तब गहरा गया जब कुछ लोगों ने इस फतवे को सीधे तौर पर भोपाल के शहर काजी से जोड़कर साझा करना शुरू कर दिया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर आदेश में किसी व्यक्ति विशेष के नाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन शहर के काजी साहब शब्द के इस्तेमाल ने कयासों के बाजार को गर्म कर दिया है।
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दारुल इफ्ता ने जारी जवाब में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति प्रोस्टेट (Prostate) की बीमारी से पीड़ित है और उसे लगातार पेशाब की बूंदें आने की समस्या है, तो इस्लाम के नियमों के अनुसार उसे 'माजूर' (Excused/Disabled) माना जाता है। फतवे के अनुसार:
यह फतवा 9 मार्च 2026 को नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान कासमी की ओर से जारी किया गया था। इस पर मुफ्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर (Official Stamp) भी लगी है।
रिकॉर्ड के अनुसार, यह सवाल भोपाल के पीरगेट निवासी सहेल अली ने पूछा था। धार्मिक जानकारों का तर्क है कि फतवे अक्सर सामान्य शरई नियम स्पष्ट करने के लिए दिए जाते हैं और इन्हें व्यक्तिगत हमले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस फतवे के सार्वजनिक होने के बाद मुस्लिम समुदाय दो पक्षों में बंटता नजर आ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आज (16 मार्च 2026) ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने एक अहम बैठक बुलाई है।
कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने पुष्टि की है कि शहर काजी की बीमारी और नमाज की वैधता को लेकर उपजे भ्रम को दूर करने के लिए तमाम धर्मगुरुओं और संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
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जानें फतवा को लेकर क्यों मचा बवाल?
विवाद तब गहरा गया जब कुछ लोगों ने इस फतवे को सीधे तौर पर भोपाल के शहर काजी से जोड़कर साझा करना शुरू कर दिया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर आदेश में किसी व्यक्ति विशेष के नाम का उल्लेख नहीं है, लेकिन शहर के काजी साहब शब्द के इस्तेमाल ने कयासों के बाजार को गर्म कर दिया है।
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बीमारी की स्थिति में क्या कहता है शरियत का नियम?
- ऐसा व्यक्ति अपनी नमाज खुद तो पढ़ सकता है, लेकिन वह इमाम बनकर दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता।
- यदि किसी ने ऐसे व्यक्ति के पीछे फर्ज नमाज (Obligatory Prayer) पढ़ ली है, तो उसे वह नमाज दोबारा पढ़नी होगी।
कब और किसके द्वारा जारी हुआ यह आदेश?
रिकॉर्ड के अनुसार, यह सवाल भोपाल के पीरगेट निवासी सहेल अली ने पूछा था। धार्मिक जानकारों का तर्क है कि फतवे अक्सर सामान्य शरई नियम स्पष्ट करने के लिए दिए जाते हैं और इन्हें व्यक्तिगत हमले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आज होनी है अहम बैठक
कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने पुष्टि की है कि शहर काजी की बीमारी और नमाज की वैधता को लेकर उपजे भ्रम को दूर करने के लिए तमाम धर्मगुरुओं और संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
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