2029 के लिए बीजेपी ने अपनाया अर्जुन सिंह का फॉर्मूला
Aman Vaishnav | Apr 08, 2026, 16:05 IST
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केंद्र सरकार 2029 चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी में है। इसके लिए लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी। क्या आपको पता है कि इसके लिए केंद्र सरकार एमपी के पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के फार्मूले पर जा रही है...
केंद्र सरकार 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण देना चाहती है। इसके लिए लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। इसमें 273 नई सीटें होंगी और ये सभी महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में एक चुनावी सभा में यह बात कही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए नई सीटें बनाई जाएंगी, लेकिन इससे मौजूदा सांसदों की सीटें नहीं जाएंगी।
दिलचस्प बात यह है कि यह तरीका बिल्कुल नया नहीं है। UPA सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री अर्जुन सिंह ( एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री) ने 2005-06 में यही फॉर्मूला उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण लागू करने के लिए अपनाया था।
अर्जुन सिंह ने 93वें संविधान संशोधन और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम को आगे बढ़ाया था।इस कानून ने IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों में OBC छात्रों के लिए 27% आरक्षण अनिवार्य किया।
उस समय सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि OBC कोटा लागू होने से सामान्य वर्ग की सीटें कम न हों। इसका हल निकाला गया तीन साल में 54% सीटों के विस्तार से।
यही फॉर्मूला अब लोकसभा सीटों पर लागू होगा। उदाहरण के तौर पर, केरल की लोकसभा सीटें 20 से बढ़कर 30 होंगी। इनमें 10 सीटें महिलाओं के लिए होंगी।
उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 होंगी और 40 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। SC और ST के लिए जो 15% और 7% आरक्षण पहले से है, उसमें भी एक तिहाई सीटें उनके वर्ग की महिलाओं के लिए होंगी।
अर्जुन सिंह के दौर में उच्च शिक्षा का विस्तार जरूरी था। देश की युवा आबादी बड़ी तेजी से बढ़ रही थी। नई IIT, IIM और AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) खुल रहे थे। इसलिए सीटें बढ़ाना उस वक्त स्वाभाविक था। अर्जुन सिंह ने इसे निवेश के रूप में देखा, बोझ के रूप में नहीं।
आज वैसी ही जरूरत संसद में है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी अब तक बेहद कम रही है। सीटें बढ़ाकर उन्हें जगह देना उसी सोच का विस्तार है।
राजनीतिक रूप से यह बड़ी बात है कि BJP ने वही रास्ता चुना जो कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने शिक्षा में अपनाया था। दोनों मामलों में तर्क एक ही है। नई सामाजिक जरूरत को पूरा करो, लेकिन किसी मौजूदा अधिकार को मत छीनो। इसके लिए पाई को बड़ा करो।
यह फॉर्मूला राजनीतिक रूप से भी स्मार्ट है। मौजूदा सांसदों को डर नहीं होगा कि उनकी सीट जाएगी। इससे विरोध कम होगा और बदलाव आसान होगा।
अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को हुआ था। वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में 2004 से 2009 तक मानव संसाधन विकास मंत्री थे। अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चुरहट इलाके से जुड़े थे।
वह पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में भी मंत्री थे, लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने नारायण दत्त तिवारी के साथ मिलकर ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) पार्टी बनाई, लेकिन 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
फिर वे कांग्रेस में वापस लौटे, लेकिन एक बार फिर होशंगाबाद से चुनाव हार गए। अर्जुन सिंह तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे (पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह) और कुछ समय के लिए पंजाब के राज्यपाल भी रहे। 2000 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिला था।
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33 प्रतिशत आरक्षण बिल संसद में पास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में एक चुनावी सभा में यह बात कही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए नई सीटें बनाई जाएंगी, लेकिन इससे मौजूदा सांसदों की सीटें नहीं जाएंगी।
अर्जुन सिंह का वही पुराना फॉर्मूला
अर्जुन सिंह ने 93वें संविधान संशोधन और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम को आगे बढ़ाया था।इस कानून ने IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों में OBC छात्रों के लिए 27% आरक्षण अनिवार्य किया।
सीटें बढ़ाईं, लेकिन किसी का नुकसान नहीं हुआ
उदाहरण के तौर पर पहले हर 100 सीटों में से 78 सामान्य वर्ग के लिए थीं। 22.5 अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए। OBC कोटा जुड़ने के बाद कुल सीटें 100 से बढ़कर 154 हो गईं। इससे 78 सीटें सामान्य वर्ग के लिए वैसी ही रहीं। यानी संख्या में कोई कटौती नहीं हुई। बस, जो पहले 78% था, वह अब 50.5% हो गया, लेकिन असल सीटें उतनी ही रहीं। अर्जुन सिंह ने इसे सभी के लिए फायदेमंद नीति बताया था।
अब लोकसभा सीटों में भी यही गणित
उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 होंगी और 40 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। SC और ST के लिए जो 15% और 7% आरक्षण पहले से है, उसमें भी एक तिहाई सीटें उनके वर्ग की महिलाओं के लिए होंगी।
जनसंख्या बढ़ी तो नए IIT, IIM और AIIMS
आज वैसी ही जरूरत संसद में है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी अब तक बेहद कम रही है। सीटें बढ़ाकर उन्हें जगह देना उसी सोच का विस्तार है।
BJP ने अपनाया UPA का तरीका
यह फॉर्मूला राजनीतिक रूप से भी स्मार्ट है। मौजूदा सांसदों को डर नहीं होगा कि उनकी सीट जाएगी। इससे विरोध कम होगा और बदलाव आसान होगा।
कौन थे अर्जुन सिंह?
वह पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कैबिनेट में भी मंत्री थे, लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने नारायण दत्त तिवारी के साथ मिलकर ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) पार्टी बनाई, लेकिन 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
फिर वे कांग्रेस में वापस लौटे, लेकिन एक बार फिर होशंगाबाद से चुनाव हार गए। अर्जुन सिंह तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे (पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह) और कुछ समय के लिए पंजाब के राज्यपाल भी रहे। 2000 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी मिला था।
FAQ
- महिला आरक्षण के लिए लोकसभा सीटें क्यों बढ़ाई जा रही हैं?
सरकार चाहती है कि महिलाओं को 33% आरक्षण मिले, लेकिन मौजूदा सांसदों की सीटें न घटें। इसलिए लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। 273 नई सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए होंगी। यह वही तरीका है जो 2005-06 में उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण लागू करते वक्त अपनाया गया था। तब भी सीटें बढ़ाकर सामान्य वर्ग की सीटें बचाई गई थीं। - अर्जुन सिंह का OBC फॉर्मूला क्या था और वह कैसे काम किया?
अर्जुन सिंह UPA सरकार में शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने 2005-06 में IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में OBC छात्रों के लिए 27% आरक्षण लागू किया। लेकिन इसके लिए सीटें घटाई नहीं गईं। इसके बजाय तीन साल में कुल सीटें 54% बढ़ाई गईं। इससे सामान्य वर्ग की सीटें जस की तस रहीं और OBC छात्रों को भी जगह मिली। यही "पाई को बड़ा करने" का फॉर्मूला अब महिला आरक्षण में लागू हो रहा है। - क्या महिला आरक्षण 2029 के चुनाव से लागू हो जाएगा?
सरकार की योजना है कि 2029 के आम चुनाव से पहले यह व्यवस्था लागू हो। इसके लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का विस्तार जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने केरल की एक सभा में इसका संकेत दिया था। लेकिन इसके लिए संविधान संशोधन और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह प्रक्रिया समय लेती है, इसलिए अभी यह तय नहीं है कि 2029 तक सब कुछ पूरा हो पाएगा या नहीं।
डॉ. गोविंद सिंह ने 1990 में बनवाई थी कोठी, अर्जुन सिंह की खूबसूरत केरवा कोठी भी विवादों में रह चुकी
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