महंगी होने वाली है मध्य प्रदेश में बिजली! 20 मार्च को GoM की बैठक तय करेगी आपका बिल
Amresh Kushwaha | Mar 19, 2026, 15:13 IST
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20 मार्च को दिल्ली में होने वाली GoM की बैठक मध्य प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं का भविष्य तय करेगी। निजीकरण और सब्सिडी फ्रीज होने से आम जनता और किसानों पर बोझ बढ़ सकता है।
मध्यप्रदेश की जनता की जेब पर बड़ा झटका लगने वाला है! 20 मार्च को दिल्ली में होने वाली Group of Ministers (GoM) की बैठक में यह तय किया जाएगा कि निजी कंपनियों को उद्योग कनेक्शन मिलेंगे।
साथ ही, सरकारी DISCOMs केवल घरेलू और किसानों के लिए बिजली सप्लाई करेंगे। इसका मतलब है कि आपके घर और खेत की बिजली महंगी हो सकती है, जबकि उद्योग सस्ती बिजली का फायदा उठाएंगे।
क्यों बढ़ सकता है आम आदमी और किसान का
यदि निजी कंपनियां सिर्फ उद्योगों को ही बिजली कनेक्शन देंगी, तो अब सरकारी कंपनियों के पास सिर्फ घरों और खेतों के कनेक्शन रह जाएंगे। इसका मतलब यह है कि सरकारी कंपनियों की कमाई कम होगी, और बिजली का खर्चा बढ़ेगा।
फिलहाल उद्योग (Factories/Industrial Consumers) ज्यादा टैरिफ (कीमत) चुकाते हैं। इसकी वजह से घरों और किसानों को सस्ती बिजली मिल रही थी। वहीं, अब यदि यह बदलाव हुआ, तो घरों और खेतों का बिजली बिल बढ़ सकता है। किसानों के लिए सिंचाई का खर्च भी ज्यादा हो सकता है।
एक और बात यह है कि सरकार ने सब्सिडी को स्थिर रखने का प्रस्ताव दिया है, यानी बिजली महंगी होने पर भी सब्सिडी नहीं बढ़ेगी।
उद्योग ज्यादा बिल देते हैं। घरेलू और किसानों को सस्ती बिजली मिलती है। इसे Cross Subsidy कहते हैं
• निजी कंपनियां सिर्फ औद्योगिक कनेक्शन लेंगी।
• सरकारी DISCOMs के पास केवल घरेलू और कृषि उपभोक्ता रहेंगे।
• कमाई घटेगी। लागत बढ़ेगी। इससे बिल बढ़ सकते हैं।
सब्सिडी को फ्रीज (स्थिर) करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इसका अर्थ है कि सब्सिडी की राशि भविष्य के लिए तय कर दी जाएगी और टैरिफ बढ़ने पर भी इसमें कोई वृद्धि नहीं होगी।
इस बैठक में ये तय होगा कि आपके ऊपर बिजली बिल का बोझ आएगा या नहीं। बैठक में निजीकरण मॉडल और सब्सिडी नीति पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
यदि निजी कंपनियों को उद्योगों का कनेक्शन मिलता है और सब्सिडी स्थिर रहती है, तो इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। इसका मतलब ये होगा कि आम जनता और किसानों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा, जबकि उद्योग सस्ती बिजली का फायदा उठाएंगे। वहीं, यदि यह फैसला होता है, तो आपके घर और खेत का बिजली बिल महंगा हो सकता है।
बिजली कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जिन विकल्पों पर चर्चा की गई है उनमें शामिल हैं:
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साथ ही, सरकारी DISCOMs केवल घरेलू और किसानों के लिए बिजली सप्लाई करेंगे। इसका मतलब है कि आपके घर और खेत की बिजली महंगी हो सकती है, जबकि उद्योग सस्ती बिजली का फायदा उठाएंगे।
क्यों बढ़ सकता है आम आदमी और किसान का बिजली बिल ?
फिलहाल उद्योग (Factories/Industrial Consumers) ज्यादा टैरिफ (कीमत) चुकाते हैं। इसकी वजह से घरों और किसानों को सस्ती बिजली मिल रही थी। वहीं, अब यदि यह बदलाव हुआ, तो घरों और खेतों का बिजली बिल बढ़ सकता है। किसानों के लिए सिंचाई का खर्च भी ज्यादा हो सकता है।
एक और बात यह है कि सरकार ने सब्सिडी को स्थिर रखने का प्रस्ताव दिया है, यानी बिजली महंगी होने पर भी सब्सिडी नहीं बढ़ेगी।
जानिए पूरी कहानी आम जनता की जेब से जोड़कर
अभी सिस्टम कैसे काम करता है?
निजीकरण लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
• सरकारी DISCOMs के पास केवल घरेलू और कृषि उपभोक्ता रहेंगे।
• कमाई घटेगी। लागत बढ़ेगी। इससे बिल बढ़ सकते हैं।
सब्सिडी पर खतरा
वित्तीय पैकेज और लाभ
- निजी कंपनियों को 50 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण मिल सकता है।
- सरकारी कंपनियों को 10 साल के लिए 3.5% की सब्सिडी दर पर ऋण मिल सकता है।
20 मार्च को होगी GoM बैठक
यदि निजी कंपनियों को उद्योगों का कनेक्शन मिलता है और सब्सिडी स्थिर रहती है, तो इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। इसका मतलब ये होगा कि आम जनता और किसानों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा, जबकि उद्योग सस्ती बिजली का फायदा उठाएंगे। वहीं, यदि यह फैसला होता है, तो आपके घर और खेत का बिजली बिल महंगा हो सकता है।
तेजी से बढ़ रहा निजीकरण
- निजी कंपनी को 51% हिस्सेदारी बेचना।
- प्रबंधन नियंत्रण के साथ 26% हिस्सेदारी बेचना।
- कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध (Listing) करना।
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