कर्नल सोफिया पर विवादित टिप्पणी मामले में मंत्री विजय शाह को SC से झटका, अभियोजन मंजूरी में दखल से इनकार
Sourabh Bhatnagar | Aug 31, 2026, 14:13 IST
विजय शाह केस
मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यह पूरा विवाद कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विजय शाह की एक टिप्पणी से जुड़ा है।
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई। मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि जांच पूरी कर ली गई है, लेकिन मंत्री के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी अभी लंबित है।
एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभियोजन की मंजूरी के लिए मामला सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा गया है। अभी राज्यपाल स्तर से फैसला होना बाकी है।
बता दें कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने उन्हें 'आतंकवादियों की बहन' कह दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में जमा कर दी गई है। हालांकि, विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी अभी नहीं मिली है। यह मामला फिलहाल राज्यपाल के पास लंबित है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। इसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे। SIT की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने अदालत के सामने पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए सिफारिश राज्यपाल के पास भेज दी गई है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि राज्यपाल को इस मामले में फैसला लेने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी इसी बात पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आखिरकार सक्षम प्राधिकारी के पास ही जानी है। इसलिए कोर्ट ने फिलहाल अभियोजन मंजूरी के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने का फैसला किया।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने SIT से एक अहम सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि अगर मंजूरी नहीं मिलती तो आगे क्या होगा। इस पर ASG केएम नटराज ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि तब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यानी SIT की जांच का काम पूरा हो चुका है। लेकिन आगे की कार्रवाई पूरी तरह मंजूरी पर निर्भर करेगी। अगर राज्यपाल मंजूरी दे देते हैं तो चार्जशीट दाखिल होगी। अगर मंजूरी नहीं मिलती तो मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगेगी। इस तरह केस का अगला कदम राज्यपाल के फैसले पर टिका है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला काफी अहम होगा।
विजय शाह की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह भी अदालत में मौजूद थे। उन्होंने मंत्री की सार्वजनिक माफी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने अगले ही दिन माफी मांग ली थी। मनींदर सिंह ने अदालत से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मंजूरी पर विचार करते समय माफी को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। तभी वे अपनी गलती और माफी की बात रख पाएंगे। यह बात पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जा चुकी है। इस पर ASG केएम नटराज ने कहा कि मामला अभी विचाराधीन है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि माफी वाले पहलू पर भी विचार होगा। कोर्ट ने इस दलील पर कोई तुरंत टिप्पणी नहीं की।
यह पूरा विवाद कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विजय शाह के बयान (विजय शाह सोफिया कुरैशी बयान) से शुरू हुआ था। कर्नल कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की ओर से मीडिया को जानकारी दी थी।
इसी दौरान विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें 'आतंकवादियों की बहन' कह दिया था। इस बयान के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया। कई लोगों ने इसे सेना और कर्नल कुरैशी का अपमान बताया।
विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा और विजय शाह के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया गया था।
11 मई 2025 को शाह ने कहा था कि आतंकियों ने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने उनकी बहन को उनके घर भेजा। शाह ने यह भी कहा कि मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते इसलिए समाज की बहन को भेजा। उन्होंने देश के मान-सम्मान और सुहाग के बदले की बात कही थी। इस बयान को लेकर देशभर में नाराजगी फैल गई थी। कई संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताया था। बीजेपी संगठन ने भी शाह को फटकार लगाई थी।
कर्नल सोफिया कुरैशी की उम्र 43 साल है। उनका घर गुजरात में है। उन्होंने बायोकेमिस्ट्री से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उनके पति मेजर ताजुद्दीन कुरैशी हैं। कुरैशी 1999 में महज 17 साल की उम्र में शॉर्ट सर्विस कमीशन से सेना में शामिल हुई थीं।
2006 में उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हिस्सा लिया था। वे एक्सरसाइज फोर्स-18 प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने सेना की तरफ से मीडिया को जानकारी दी थी। इसी दौरान विजय शाह ने उनके बारे में विवादित टिप्पणी कर दी थी।
कौन हैं
कुंअर विजय शाह की उम्र 62 साल है। वे पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वे हरसूद विधानसभा सीट से विधायक हैं। शाह की राजनीति की शुरुआत इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से हुई थी। वे शुरुआत में एबीवीपी (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) से जुड़े थे।
उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा था। 2023 में उन्होंने आठवां विधानसभा चुनाव लड़ा। वे पहली बार 2003 में मंत्री बने थे। 2023 में वे पांचवीं बार मंत्री बने। शाह आठ बार के विधायक हैं और 20 साल से कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास संस्कृति, पर्यटन, आदिम जाति कल्याण, वन, तकनीकी शिक्षा सहित कई अहम विभाग हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब शाह की टिप्पणी विवाद का कारण बनी हो। 2013 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। इस विवाद के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सितंबर 2022 में उन्होंने राहुल गांधी के अविवाहित होने पर भी टिप्पणी की थी।
खंडवा की एक सभा में उन्होंने यह बयान दिया था। नवंबर 2023 में बालाघाट में शूटिंग कर रहीं अभिनेत्री विद्या बालन से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। विद्या बालन ने रात में मिलने से इनकार किया था। इसके बाद शाह ने वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवा दी थी।
अब SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है और इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जा चुकी है। हालांकि, विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जरूरी अभियोजन मंजूरी का फैसला अभी बाकी है। यह मामला फिलहाल राज्यपाल के पास लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले (vijay shah case) में अभी कोई दखल नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस पर फैसला लेने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है और राज्यपाल को अपना निर्णय लेने का मौका मिलना चाहिए।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के फैसले पर टिकी हैं। यही फैसला तय करेगा कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ आगे चार्जशीट (सोफिया कुरैशी न्यूज) दाखिल होगी या मामला यहीं खत्म हो जाएगा।
फिलहाल यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है। सेना और सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर लोगों की नजर हमेशा रहती है, इसलिए इस केस को लेकर भी लगातार दिलचस्पी बनी हुई है।
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एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभियोजन की मंजूरी के लिए मामला सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा गया है। अभी राज्यपाल स्तर से फैसला होना बाकी है।
बता दें कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने उन्हें 'आतंकवादियों की बहन' कह दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
राज्यपाल करेंगे फैसला
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। इसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे। SIT की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने अदालत के सामने पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए सिफारिश राज्यपाल के पास भेज दी गई है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि राज्यपाल को इस मामले में फैसला लेने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी इसी बात पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आखिरकार सक्षम प्राधिकारी के पास ही जानी है। इसलिए कोर्ट ने फिलहाल अभियोजन मंजूरी के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने का फैसला किया।
मंजूरी मिली तो चार्जशीट
माफी का हुआ जिक्र
क्या था पूरा विवाद
इसी दौरान विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें 'आतंकवादियों की बहन' कह दिया था। इस बयान के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया। कई लोगों ने इसे सेना और कर्नल कुरैशी का अपमान बताया।
विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा और विजय शाह के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया गया था।
क्या कहा था विजय शाह ने
कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी
2006 में उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हिस्सा लिया था। वे एक्सरसाइज फोर्स-18 प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने सेना की तरफ से मीडिया को जानकारी दी थी। इसी दौरान विजय शाह ने उनके बारे में विवादित टिप्पणी कर दी थी।
कौन हैं मंत्री विजय शाह
उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा था। 2023 में उन्होंने आठवां विधानसभा चुनाव लड़ा। वे पहली बार 2003 में मंत्री बने थे। 2023 में वे पांचवीं बार मंत्री बने। शाह आठ बार के विधायक हैं और 20 साल से कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास संस्कृति, पर्यटन, आदिम जाति कल्याण, वन, तकनीकी शिक्षा सहित कई अहम विभाग हैं।
पहले भी जा चुका है मंत्री पद
खंडवा की एक सभा में उन्होंने यह बयान दिया था। नवंबर 2023 में बालाघाट में शूटिंग कर रहीं अभिनेत्री विद्या बालन से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। विद्या बालन ने रात में मिलने से इनकार किया था। इसके बाद शाह ने वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवा दी थी।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले (vijay shah case) में अभी कोई दखल नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस पर फैसला लेने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है और राज्यपाल को अपना निर्णय लेने का मौका मिलना चाहिए।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के फैसले पर टिकी हैं। यही फैसला तय करेगा कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ आगे चार्जशीट (सोफिया कुरैशी न्यूज) दाखिल होगी या मामला यहीं खत्म हो जाएगा।
फिलहाल यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है। सेना और सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर लोगों की नजर हमेशा रहती है, इसलिए इस केस को लेकर भी लगातार दिलचस्पी बनी हुई है।
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