तीन बार असफल हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और आईएएस बने भारती दासन
Anjali Dwivedi | Mar 21, 2026, 12:21 IST
ias bharti dasan
12वीं में कम अंक आए तो भारती दासन टूटे नहीं, उन्होंने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और जुट गए बडे़ लक्ष्य की ओर। चौथे प्रयास में IAS बनकर मिसाल पेश की। रायपुर कलेक्टर के रूप में उनका काम आज भी याद किया जाता है।
31 जुलाई 1977 को तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले में जन्मे भारती दासन का बचपन एक अनुशासित माहौल में बीता। उनके पिता सरकारी शिक्षक थे। इतिहास और अंग्रेजी पढ़ाते थे। घर में पढ़ाई को लेकर सख्ती इतनी थी कि फर्स्ट आना ही लक्ष्य था।
10वीं में उन्होंने स्कूल टॉप किया… लेकिन 12वीं में कम अंक आए। रिजल्ट से भारती दासन के पिताजी काफी हताश हुए। यही वो मोड़ था, जिसने भारती दासन को अंदर से झकझोर दिया।
सीनियर्स से मिली
परिवार चाहता था कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन कम अंकों ने रास्ता बंद कर दिया। मां ने दोबारा 12वीं की परीक्षा देने की सलाह दी, लेकिन भारती दासन ने फैसला लिया-अब जो करूंगा, उसमें टॉप करूंगा।
यहीं से उन्होंने अपनी राह खुद बनानी शुरू की। मदुरई एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई सीनियर्स को UPSC में चयनित होते देखा। आईएएस और आईपीएस अफसरों से मुलाकात ने उनके भीतर एक नई आग जगा दी।
एमएससी के लिए दिल्ली पहुंचे तो हालात आसान नहीं थे। एक कमरा, 5 छात्र, जमीन पर सोकर पढ़ाई। वसंत हॉस्टल के कमरा नंबर 39 में उन्होंने दिन-रात मेहनत की। यहीं उन्होंने पीएचडी भी पूरी की और अपने सपनों को आकार दिया।
यूपीएससी की राह आसान नहीं थी। पहले प्रयास में प्री तक नहीं निकला। फिर दूसरे प्रयास में प्री निकला, मेंस में रुक गए। तीसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर भी चयन नहीं हुआ और आखिरकार चौथे प्रयास में आईएएस बन ही गए। यह संघर्ष बताता है सफलता उन्हीं को मिलती है, जो हार मानना नहीं जानते।
आईएएस बनने से पहले उन्होंने बैंगलोर के एक कॉलेज में सिर्फ 28 दिन पढ़ाया, लेकिन जैसे ही मेंस परीक्षा का समय आया, नौकरी छोड़ दी। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने उस नौकरी का वेतन तक नहीं लिया।
यूपीएससी को लेकर उनके माता-पिता ने हमेशा उनका सपोर्ट किया। वे हमेशा उन्हें लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रेरित करते रहे। उनकी पत्नी, जो कॉलेज में उनकी जूनियर थीं, हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती थीं।
जिस दिन वे पढ़ाई नहीं करते, उस दिन वो उनसे नाराज भी हो जाती थीं। आज उनके दो बेटे हैं और एक मजबूत परिवार है जो उनकी ताकत है।
2006 बैच के IAS बनने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। जिला बनने के बाद वे सूरजपुर के पहले कलेक्टर बने। उसके बाद जांजगीर-चांपा और रायपुर के कलेक्टर बने। मार्कफेड में बड़ा सुधार किया, जिसे सरकार ने भी सराहा।
कोविड महामारी के समय भारती दासन रायपुर के कलेक्टर थे। उस समय पब्लिक अवेरनेस को लेकर जो काम किया उसे आज भी रायपुर की जनता याद करती है। वर्तमान में सचिव (कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार) हैं।
आईएएस भारती दासन की कहानी युवाओं के लिए एक बड़ा मैसेज है। असफलता आपको तोड़ने नहीं, बनाने आती है। परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मेहनत रास्ता बना ही देती है और सबसे जरूरी बात...खुद पर विश्वास करो, टूटने मत दो। अगर हम इन लाइनों पर काम करें तो सफलता मिलना तय है।
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10वीं में उन्होंने स्कूल टॉप किया… लेकिन 12वीं में कम अंक आए। रिजल्ट से भारती दासन के पिताजी काफी हताश हुए। यही वो मोड़ था, जिसने भारती दासन को अंदर से झकझोर दिया।
सीनियर्स से मिली सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा
यहीं से उन्होंने अपनी राह खुद बनानी शुरू की। मदुरई एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई सीनियर्स को UPSC में चयनित होते देखा। आईएएस और आईपीएस अफसरों से मुलाकात ने उनके भीतर एक नई आग जगा दी।
दिल्ली के छोटे कमरे से बड़ा सपना
यूपीएससी की राह आसान नहीं थी। पहले प्रयास में प्री तक नहीं निकला। फिर दूसरे प्रयास में प्री निकला, मेंस में रुक गए। तीसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर भी चयन नहीं हुआ और आखिरकार चौथे प्रयास में आईएएस बन ही गए। यह संघर्ष बताता है सफलता उन्हीं को मिलती है, जो हार मानना नहीं जानते।
28 दिन की प्रोफेसरी
यूपीएससी को लेकर उनके माता-पिता ने हमेशा उनका सपोर्ट किया। वे हमेशा उन्हें लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रेरित करते रहे। उनकी पत्नी, जो कॉलेज में उनकी जूनियर थीं, हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती थीं।
जिस दिन वे पढ़ाई नहीं करते, उस दिन वो उनसे नाराज भी हो जाती थीं। आज उनके दो बेटे हैं और एक मजबूत परिवार है जो उनकी ताकत है।
प्रशासन में दमदार पहचान
कोविड महामारी के समय भारती दासन रायपुर के कलेक्टर थे। उस समय पब्लिक अवेरनेस को लेकर जो काम किया उसे आज भी रायपुर की जनता याद करती है। वर्तमान में सचिव (कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार) हैं।
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