प्रशासक नहीं बनते तो शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवारते आईएएस सौरव कुमार सुमन
Abhilasha Saksena Chakraborty | Jan 16, 2026, 16:57 IST
IAS Saurabh Kumar Suman
आईएएस सौरव कुमार सुमन शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम मानते हैं। वो अच्छे प्रशासक के साथ ही अच्छे शिक्षक भी हैं। प्रशासन के साथ-साथ युवाओं को मार्गदर्शन देना भी वो अपना दायित्व समझते हैं।
आईएएस बनने का सपना तो बहुत से युवा देखते हैं, लेकिन सफल कम ही हो पाते हैं। सौरव कुमार सुमन उन्हीं चंद लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अपने दृढ़ निश्चय और कठिन मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
आज वे उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रशासन को केवल नियमों और आदेशों तक सीमित नहीं रखा। बल्कि, समाज की जरूरतों को समझकर हमेशा निर्णय लिया।वे एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ एक मार्गदर्शक और शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। यही संतुलन उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देता है।
सौरव कुमार सुमन का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले में एक साधारण और शिक्षित परिवार में हुआ। उनके पिता प्रमोद नारायण राय हायर सेकंडरी स्कूल में प्रधानाचार्य रहे। माता आशा सिन्हा भी शिक्षा विभाग से जुड़ी रहीं।
घर का वातावरण अनुशासन, शिक्षा और नैतिक मूल्यों से भरा हुआ था, जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। सौरव अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। सौरव का कहना है कि बचपन में माता-पिता से मिली सीख और संस्कार ही आज उनके प्रशासनिक कार्यों की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।
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सौरव सुमन की शुरुआती पढ़ाई बेगूसराय में हुई। दसवीं के बाद उन्होंने पटना कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) से भूगोल विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।
शुरू से ही उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बाद वर्ष 2010 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। वर्ष 2011 से वे आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रहे हैं।
सौरव सुमन अक्सर कहते हैं कि यदि वे आईएएस अधिकारी नहीं बनते, तो शिक्षक बनते। यही कारण है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद शिक्षा से उनका जुड़ाव कभी नहीं टूटा।
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जबलपुर में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने ज्ञानाश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लास की शुरुआत की। इस पहल के तहत यूपीएससी और एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे 200 चयनित अभ्यर्थियों को मुफ्त मार्गदर्शन दिया जाता है।
यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से संचालित होता है। खास बात यह है कि सौरव सुमन स्वयं सप्ताह में दो दिन छात्रों को पढ़ाते और मार्गदर्शन देते हैं।इसी तरह टीकमगढ़ में कलेक्टर रहते हुए भी उन्होंने गरीब परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क प्रशासनिक सेवा अकादमी का संचालन किया।
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कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान, जब वे छिंदवाड़ा जिले के कलेक्टर थे, तब उनके नेतृत्व की देशभर में चर्चा हुई। उस समय ऑक्सीजन संकट पूरे देश में गंभीर समस्या बना हुआ था, लेकिन छिंदवाड़ा में ऑक्सीजन की कभी कमी नहीं होने दी गई।
उनकी रणनीति के तहत जिले में हर समय 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का भंडार सुनिश्चित किया गया। इतना ही नहीं, छिंदवाड़ा ने मध्य प्रदेश के अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन आपूर्ति में मदद की। इसके लिए आईनेक्स और लिंडे जैसी कंपनियों से पहले से करार किया गया था। सौरभ सुमन इसे अपने प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनते हैं।
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आईएएस सौरव सुमन मानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर अध्ययन से सफलता पाई जा सकती है। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि मार्गदर्शन लें, लेकिन दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानें।
सौरव कुमार सुमन को क्रिकेट और बैडमिंटन खेलना पसंद है। समय मिलने पर वो अक्सर खेल के लिए समय निकाल लेते हैं। इसके अलावा वे किताबें पढ़ने और फिल्में देखने में भी रुचि रखते हैं।
IAS Saurav Kumar Suman हमेशा कामों को परफेक्ट तरीके से पूरा करने की कोशिश करते हैं। इस वजह से उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया है। श्योपुर कलेक्टर रहते हुए उन्हें शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए बेस्ट इलेक्शन ऑफिसर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
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आईएएस सौरव कुमार सुमन वर्तमान में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में ओएसडी-कम-आयुक्त-कम-निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वो अनुसूचित जाति विकास विभाग और अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। पहले वो मध्यप्रदेश के श्यौपुर, टीकमगढ़, छतरपुर और जबलपुर जि
लों के कलेक्टर रह चुके हैं।
(प्रोफाइल 129- 2 मार्च 2026 तक अपडेट)
आज वे उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रशासन को केवल नियमों और आदेशों तक सीमित नहीं रखा। बल्कि, समाज की जरूरतों को समझकर हमेशा निर्णय लिया।वे एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ एक मार्गदर्शक और शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। यही संतुलन उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देता है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
घर का वातावरण अनुशासन, शिक्षा और नैतिक मूल्यों से भरा हुआ था, जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। सौरव अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। सौरव का कहना है कि बचपन में माता-पिता से मिली सीख और संस्कार ही आज उनके प्रशासनिक कार्यों की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।
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शिक्षा से प्रशासन तक का सफर
शुरू से ही उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बाद वर्ष 2010 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। वर्ष 2011 से वे आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रहे हैं।
शिक्षक बनने का सपना
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ज्ञानाश्रय: शिक्षा के लिए समर्पित पहल
यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से संचालित होता है। खास बात यह है कि सौरव सुमन स्वयं सप्ताह में दो दिन छात्रों को पढ़ाते और मार्गदर्शन देते हैं।इसी तरह टीकमगढ़ में कलेक्टर रहते हुए भी उन्होंने गरीब परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क प्रशासनिक सेवा अकादमी का संचालन किया।
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कोविड काल में नेतृत्व की मिसाल
उनकी रणनीति के तहत जिले में हर समय 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का भंडार सुनिश्चित किया गया। इतना ही नहीं, छिंदवाड़ा ने मध्य प्रदेश के अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन आपूर्ति में मदद की। इसके लिए आईनेक्स और लिंडे जैसी कंपनियों से पहले से करार किया गया था। सौरभ सुमन इसे अपने प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनते हैं।
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सफलता का मंत्र
क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने के हैं शौकीन
बेस्ट इलेक्शन ऑफिसर अवार्ड
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करियर एक नजर
- नाम: आईएएस सौरव कुमार सुमन
- जन्म: 15-12-1985
- जन्मस्थान: बेगूसराय, झारखंड
- एजुकेशन: एमए
- बैच: 2011
- कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
FAQ
- आईएएस सौरव कुमार सुमन किस वर्ष सिविल सेवा में चयनित हुए थे?
सौरव कुमार सुमन का चयन वर्ष 2010 में सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हुआ था और वे 2011 से आईएएस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। - सौरव कुमार सुमन शिक्षा के क्षेत्र में किस पहल के लिए जाने जाते हैं?
वे जबलपुर में ज्ञानाश्रय निःशुल्क कोचिंग पहल के लिए जाने जाते हैं, जिसके तहत यूपीएससी और एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे चयनित छात्रों को मुफ्त मार्गदर्शन दिया जाता है। - कोविड-19 के दौरान सौरव कुमार सुमन की सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि क्या रही?
छिंदवाड़ा कलेक्टर रहते हुए उन्होंने जिले में ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की और अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन आपूर्ति में मदद की, जिससे कई जानें बचाई जा सकीं।
लों के कलेक्टर रह चुके हैं।
FAQ
- आईएएस सौरभ कुमार सुमन किस वर्ष सिविल सेवा में चयनित हुए थे?
सौरभ कुमार सुमन का चयन वर्ष 2010 में सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हुआ था और वे 2011 से आईएएस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। - सौरभ कुमार सुमन शिक्षा के क्षेत्र में किस पहल के लिए जाने जाते हैं?
वे जबलपुर में ‘ज्ञानाश्रय’ निःशुल्क कोचिंग पहल के लिए जाने जाते हैं, जिसके तहत यूपीएससी और एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे चयनित छात्रों को मुफ्त मार्गदर्शन दिया जाता है। - कोविड-19 के दौरान सौरभ कुमार सुमन की सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि क्या रही?
छिंदवाड़ा कलेक्टर रहते हुए उन्होंने जिले में ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की और अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन आपूर्ति में मदद की, जिससे कई जानें बचाई जा सकीं।
(प्रोफाइल 129- 2 मार्च 2026 तक अपडेट)
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