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आईएएस बनने का सपना तो बहुत से युवा देखते हैं, लेकिन सफल कम ही हो पाते हैं। सौरभ कुमार सुमन उन्हीं चंद लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अपने दृढ़ निश्चय और कठिन मेहनत से यह मुक़ाम हासिल किया।
आज वे उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रशासन को केवल नियमों और आदेशों तक सीमित नहीं रखा। बल्कि, समाज की जरूरतों को समझकर हमेशा निर्णय लिया। वे एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ एक मार्गदर्शक और शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। यही संतुलन उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देता है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
सौरभ कुमार सुमन का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले में एक साधारण और शिक्षित परिवार में हुआ। उनके पिता प्रमोद नारायण राय हायर सेकंडरी स्कूल में प्रधानाचार्य रहे। माता आशा सिन्हा भी शिक्षा विभाग से जुड़ी रहीं।
घर का वातावरण अनुशासन, शिक्षा और नैतिक मूल्यों से भरा हुआ था, जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। सौरव अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। सौरव का कहना है कि बचपन में माता-पिता से मिली सीख और संस्कार ही आज उनके प्रशासनिक कार्यों की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।
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शिक्षा से प्रशासन तक का सफर
सौरभ सुमन की शुरुआती पढ़ाई बेगूसराय में हुई। दसवीं के बाद उन्होंने पटना कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) से भूगोल विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।
शुरू से ही उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बाद वर्ष 2010 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। वर्ष 2011 से वे आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रहे हैं।
शिक्षक बनने का सपना
सौरभ सुमन अक्सर कहते हैं कि यदि वे आईएएस अधिकारी नहीं बनते, तो शिक्षक बनते। यही कारण है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद शिक्षा से उनका जुड़ाव कभी नहीं टूटा।
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ज्ञानाश्रय: शिक्षा के लिए समर्पित पहल
जबलपुर में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने ‘ज्ञानाश्रय’ निःशुल्क कोचिंग क्लास की शुरुआत की। इस पहल के तहत यूपीएससी और एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे 200 चयनित अभ्यर्थियों को मुफ्त मार्गदर्शन दिया जाता है।
यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से संचालित होता है। खास बात यह है कि सौरभ सुमन स्वयं सप्ताह में दो दिन छात्रों को पढ़ाते और मार्गदर्शन देते हैं।
इसी तरह टीकमगढ़ में कलेक्टर रहते हुए भी उन्होंने गरीब परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क प्रशासनिक सेवा अकादमी का संचालन किया।
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कोविड काल में नेतृत्व की मिसाल
कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान, जब वे छिंदवाड़ा जिले के कलेक्टर थे, तब उनके नेतृत्व की देशभर में चर्चा हुई। उस समय ऑक्सीजन संकट पूरे देश में गंभीर समस्या बना हुआ था, लेकिन छिंदवाड़ा में ऑक्सीजन की कभी कमी नहीं होने दी गई।
उनकी रणनीति के तहत जिले में हर समय 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का भंडार सुनिश्चित किया गया। इतना ही नहीं, छिंदवाड़ा ने मध्य प्रदेश के अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन आपूर्ति में मदद की। इसके लिए ‘आईनेक्स’ और ‘लिंडे’ जैसी कंपनियों से पहले से करार किया गया था। सौरभ सुमन इसे अपने प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनते हैं।
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सफलता का मंत्र
आईएएस सौरभ सुमन मानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर अध्ययन से सफलता पाई जा सकती है। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि मार्गदर्शन लें, लेकिन दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानें।
क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने के हैं शौकीन
सौरभ कुमार सुमन को क्रिकेट और बैडमिंटन खेलना पसंद है। समय मिलने पर वो अक्सर खेल के लिए समय निकाल लेते हैं। इसके अलावा वे किताबें पढ़ने और फिल्में देखने में भी रुचि रखते हैं।
बेस्ट इलेक्शन ऑफिसर अवार्ड
IAS Saurabh Kumar Suman हमेशा कामों को परफेक्ट तरीके से पूरा करने की कोशिश करते हैं। इस वजह से उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया है। श्योपुर कलेक्टर रहते हुए उन्हें शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए बेस्ट इलेक्शन ऑफिसर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
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करियर एक नजर
- नाम: आईएएस सौरभ कुमार सुमन
- जन्म: 15-12-1985
- जन्मस्थान: बेगूसराय, झारखंड
- एजुकेशन: एमए
- बैच: 2011
- कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
आईएएस सौरभ कुमार सुमन वर्तमान में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में ओएसडी-कम-आयुक्त-कम-निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वो अनुसूचित जाति विकास विभाग और अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। पहले वो मध्यप्रदेश के श्यौपुर, टीकमगढ़, छतरपुर और जबलपुर ज़िलों के कलेक्टर रह चुके हैं।
FAQ
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