आईएएस मिशा सिंह ने वकालत छोड़ चुना समाज सेवा का रास्ता, तीसरे प्रयास में IAS बनी किसान की बेटी
Abhilasha Saksena Chakraborty | Oct 14, 2025, 14:33 IST
IAS Misha Singh
मिशा सिंह ने वकालत छोड़ आईएएस बनकर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। आज वो जिस तरह से प्रशासन में नवाचार ला रही हैं, उससे वो देशभर की बेटियों के लिए संघर्ष और सफलता की प्रेरणा हैं।
भारत में सिविल सेवा परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की यात्रा है। इसी यात्रा को साकार किया है किसान की बेटी मिशा सिंह ने, जिन्होंने अपने वकालत के पेशे को छोड़कर प्रशासन का रास्ता चुना।
दो बार असफल होने के बावजूद तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर आईएएस बनकर दिखाया और आज वो भारत की हर उस बेटी के लिए प्रेरणा हैं जो अपने आत्विश्वास और संघर्ष से कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
मिशा सिंह का जन्म और पालन-पोषण उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के अलीगंज क्षेत्र में हुआ था। पिता आनंद सिंह किसान हैं और मां विनोद कंवर गृहणी। उत्तरप्रदेश में ही पली-बढ़ी मिशा ने बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखा हालांकि उस समय तक उन्होंने आईएएस बनने का नहीं सोचा था। उनकी शुरुआती शिक्षा माउंट कार्मेल और जयपुरिया स्कूल से हुई।
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पढ़ाई में शुरू से ही होशियार रहीं मिशा डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ से एलएलबी (LLB) की पढ़ाई की। कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि सिस्टम में रहकर समाज की समस्याओं को बेहतर ढंग से हल किया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
हालांकि, शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिल्ली जाकर लॉ में पीजी डिप्लोमा करते हुए उन्होंने तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा 2015 में ऑल इंडिया रैंक 64 हासिल की।
![IAS Misha Singh]()
मिशा मानती हैं कि असफलता किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि सुधार का अवसर होती है।उन्होंने हर असफलता के बाद अपने प्रदर्शन का विश्लेषण किया, कमजोरियों को पहचाना और तैयारी की रणनीति बदली।
आईएएस मिशा सिंह अनुसार, UPSC की तैयारी में हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क जरूरी है, वरना आप जानकारी में उलझ जाएंगे। वे कहती हैं- मैंने हर अटेम्प्ट के बाद अपनी गलतियों को समझा। यही एनालिसिस मेरी सबसे बड़ी ताकत बना। अगली बार वो गलतियां नहीं करना ही मेरी सफलता का कारण बनीं।
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न्यूज़पेपर और करेंट अफेयर्स: वे नियमित रूप से अखबार पढ़ती थीं और हर मुद्दे का बैकग्राउंड समझने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं।
स्वयं के नोट्स: उन्होंने हर विषय के लिए अपने नोट्स तैयार किए, जिससे रिवीजन में मदद मिली।
रिवीजन और मॉक टेस्ट: मिशा का मानना है कि UPSC के लिए स्मार्ट स्टडी ज़रूरी है। तैयारी देखने के लिए मॉक टेस्ट देना जरूरी है।
इंटरनेट का सही उपयोग: उन्होंने ऑनलाइन लेक्चर्स और सरकारी रिपोर्ट्स का गहराई से अध्ययन किया।
![IAS Misha Singh]()
आईएएस मिशा सिंह बताती हैं कि प्रशासनिक सेवा में आने का सबसे बड़ा कारण वैरायटी है- यह सेवा आपको हर दिन कुछ नया सीखने, करने और समाज की मदद करने का मौका देती है। वकालत में जो कुछ सीखा उसको यहां सही तरीके से कार्यान्वित करने का मौका मिलता है।
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स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शाजपुर में आईएएस मिशा सिंह ने एक नया नवाचार शुरू किया था। उनकी इस पहल से यह प्रदेश का पहला जिला बना जहां ट्रांसजेंडर के लिए भी शौचालय की व्यवस्था की गई है। अमूमन थर्ड जेंडर पुरुष और स्त्री के शौचालय में जाने से विवाद की स्थिति बनती थी। थर्ड जेंडर को सम्मानित करने की दिशा में उनका यह प्रयास सराहनीय है। इसके साथ ही उन्होंने स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था करवायी है।
करियर एक नजर
नाम: मिशा सिंह
स्थान: अलीगंज, उत्तरप्रदेश
मिशा वर्तमान में रतलाम कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले वो कुछ कुछ दिन दमोह कलेक्टर के रूप में कार्यरत थीं। वो जबलपुर, शाजापुर और उमरिया में अपर कलेक्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं। वो रायसेन में एसडीएम भी रह चुकी हैं।
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सोशल मीडिया अकाउंट:
एक किसान परिवार की बेटी से लेकर एक कलेक्टर तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। उनकी ईमानदार और जमीनी कार्यशैली के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों में उनका विशेष सम्मान है।
दो बार असफल होने के बावजूद तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर आईएएस बनकर दिखाया और आज वो भारत की हर उस बेटी के लिए प्रेरणा हैं जो अपने आत्विश्वास और संघर्ष से कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
किसान परिवार में हुआ जन्म
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तीसरे प्रयास में हासिल की 64वीं रैंक
हालांकि, शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिल्ली जाकर लॉ में पीजी डिप्लोमा करते हुए उन्होंने तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा 2015 में ऑल इंडिया रैंक 64 हासिल की।
IAS Misha Singh
हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क है जरूरी
आईएएस मिशा सिंह अनुसार, UPSC की तैयारी में हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क जरूरी है, वरना आप जानकारी में उलझ जाएंगे। वे कहती हैं- मैंने हर अटेम्प्ट के बाद अपनी गलतियों को समझा। यही एनालिसिस मेरी सबसे बड़ी ताकत बना। अगली बार वो गलतियां नहीं करना ही मेरी सफलता का कारण बनीं।
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क्या थी तैयारी की रणनीति
स्वयं के नोट्स: उन्होंने हर विषय के लिए अपने नोट्स तैयार किए, जिससे रिवीजन में मदद मिली।
रिवीजन और मॉक टेस्ट: मिशा का मानना है कि UPSC के लिए स्मार्ट स्टडी ज़रूरी है। तैयारी देखने के लिए मॉक टेस्ट देना जरूरी है।
इंटरनेट का सही उपयोग: उन्होंने ऑनलाइन लेक्चर्स और सरकारी रिपोर्ट्स का गहराई से अध्ययन किया।
IAS Misha Singh
प्रशासनिक काम में मिलती है वैरायटी
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ट्रांसडेंजर्स के लिये बनवाए शौचालय
करियर एक नजर
नाम: मिशा सिंह
जन्म: 08-03-1988
स्थान: अलीगंज, उत्तरप्रदेश
एजुकेशन: बीए, एलएलबी
बैच: 2016
कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
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सोशल मीडिया अकाउंट: IAS Misha Singh
| प्लेटफ़ॉर्म | लिंक |
|---|---|
| X (Twitter) | https://x.com/mishasinghms |
| https://www.linkedin.com/in/misha-singh-987a15a/?originalSubdomain=in |
FAQ
- IAS मिशा सिंह कौन हैं और उन्होंने कब UPSC परीक्षा पास की थी?
मिशा सिंह उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली एक किसान परिवार की बेटी हैं। उन्होंने तीसरे प्रयास में वर्ष 2015 में UPSC परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 64 हासिल की - मिशा सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?
उन्होंने लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से LLB की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली में लॉ में पीजी डिप्लोमा करते हुए UPSC की तैयारी की। - मिशा सिंह ने असफलताओं के बाद सफलता कैसे हासिल की?
पहले दो प्रयासों में असफल होने के बाद उन्होंने अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण किया, रणनीति बदली और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। वे मानती हैं कि हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क ही UPSC में सफलता की कुंजी है। - मिशा सिंह की प्रशासनिक सेवा में कौन-सी पहलें सबसे खास रही हैं?
रतलाम की कलेक्टर बनने से पहले, शाजापुर में उन्होंने थर्ड जेंडर के लिए अलग शौचालय बनवाकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक मिसाल पेश की। उन्होंने स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था करवाई। - मिशा सिंह युवाओं को UPSC की तैयारी के लिए क्या सलाह देती हैं?
उनका कहना है कि असफलता को सुधार का अवसर समझें, नियमित रूप से अखबार पढ़ें, अपने नोट्स तैयार करें, और जितना संभव हो रिवीजन और मॉक टेस्ट करें। निरंतरता और आत्मविश्वास ही सफलता की असली चाबी हैं।
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