सपनों के लिए छोड़ीं दो बड़ी नौकरियां, आईएएस शुभम चौधरी का असिस्टेंट प्रोफेसर से आईएएस बनने तक का संघर्षपूर्ण सफर

Jageshwar prasad | Apr 22, 2026, 18:21 IST
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Ashish Bhardwaj (58)
Photograph: (the sootr)

राजस्थान कैडर की आईएएस शुभम चौधरी ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा में आने के लिए बड़ी नौकरियों को ठोकर मार दी। उनका आईएएस बनने का सफर संघर्षपूर्ण रहा, जो लाखों युवाओं को प्रेरित कर सकता है।

अक्सर लोग एक सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी मिलने के बाद अपनी मेहनत को विराम दे देते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके सपने उन्हें रुकने नहीं देते। ऐसी ही एक मिसाल हैं आईएएस शुभम चौधरी। सिटीबैंक की शानदार नौकरी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर का सम्मानित पद छोड़कर उन्होंने सिविल सेवा का कठिन रास्ता चुना। देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि अटूट संकल्प के आगे कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं है।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

शुभम चौधरी का जन्म दिल्ली में हुआ। हालांकि उनका परिवार मूलतः हरियाणा से ताल्लुक रखता है। उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के प्रसिद्ध दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) वसंत कुंज से हुई। इसके बाद उन्हें पोलैंड में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने अमेरिकन स्कूल ऑफ वारसॉ से इंटरनेशनल बैकलॉरिएट की पढ़ाई पूरी की। इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उनके व्यक्तित्व को एक नई गहराई दी।

भारत लौटकर उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स किया और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) से मास्टर डिग्री हासिल की। शिक्षा के प्रति उनकी यह ललक उनके भावी प्रशासनिक करियर की मजबूत बुनियाद बनी।

सिविल सेवा की ओर झुकाव

मास्टर्स के बाद शुभम ने सिटीबैंक में बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर एक साल काम किया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना और दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गईं। तीन साल तक छात्रों को इकोनॉमिक्स पढ़ाने के दौरान ही उनके मन में समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने महसूस किया कि वे प्रशासन के जरिए सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

हार न मानने वाला संकल्प

यूपीएससी टॉपरशुभम चौधरी का सफर धैर्य और अटूट संकल्प की एक मिसाल पेश करता है। प्रोफेसर की जिम्मेदारी संभालते हुए इस कठिन परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपने पहले प्रयास में वह केवल रिजर्व लिस्ट तक ही पहुंच सकीं, पर इस शुरुआती बाधा ने उनके इरादों को कमज़ोर नहीं होने दिया।

दूसरे प्रयास में उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) आवंटित हुई, लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट रूप से IAS ही था। इसी लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने फिर से पूरे जोश के साथ परीक्षा दी। अंततः वर्ष 2013 में तीसरे प्रयास में अखिल भारतीय 11वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को हकीकत में बदल दिया।



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राजस्थान कैडर की सशक्त अधिकारी

2014 बैच की प्रशासनिक अधिकारी शुभम चौधरी को राजस्थान कैडर मिला। उन्होंने वित्त मंत्रालय (केंद्र सरकार) में सहायक सचिव के रूप में काम करने के साथ राजस्थान के विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दीं। वे अलवर में SDM, सिरोही और कोटा में जिला परिषद की CEO तथा डूंगरपुर, सवाई माधोपुर और राजसमंद में कलेक्टर रह चुकी हैं। वर्तमान में, वे प्रतापगढ़ की कलेक्टर के रूप में तैनात हैं।



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शुभम चौधरी की विनिंग स्ट्रेटेजी

उनकी सफलता कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का परिणाम थी:

विषयों का सही चुनाव: उन्होंने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि (इकोनॉमिक्स) का लाभ उठाया और अर्थशास्त्र एवं लोक प्रशासन को वैकल्पिक विषय चुना।

रिवीजन की ताकत: वे मुख्य परीक्षा से पहले सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक विषयों को कम से कम 3-4 बार रिवाइज कर चुकी थीं।

करंट अफेयर्स: दैनिक समाचार पत्र पढ़ना उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा था।

लेखन अभ्यास: उत्तर लेखन और मॉक टेस्ट ने उनकी तैयारी को धार दी।

उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा संदेश

शुभम चौधरी की सलाह स्पष्ट है कि आधार मजबूत करें और निरंतरता बनाए रखें। उनका मानना है कि यूपीएससी एग्जामएक मैराथन है, जहाँ धैर्य और नियमित अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। सफलता यह नहीं है कि आप कभी असफल नहीं हुए, बल्कि सफलता यह है कि आप गिरकर कितनी बार मजबूती से खड़े हुए।

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