जब 'कद' नहीं, काबिलियत बनती है मिसाल, आज हैं लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल

Jinesh Jain | Apr 21, 2026, 14:16 IST
Share
Ashish Bhardwaj (46)
Photograph: (the sootr)

राजस्थान कैडर की आईएएस आरती डोगरा का कद भले ही छोटा है, लेकिन उनकी सफलता की ऊंचाई को शब्दों में बांध पाना मुश्किल है। वह सचमुच छोटे कद की बड़ी अधिकारी हैं।

राजस्थान की प्रशासनिक गलियारों में एक नाम ऐसा है जिसकी धमक प्रधानमंत्री कार्यालय तक सुनाई देती है। यह नाम है आईएएस आरती डोगरा का। मात्र 3 फीट 6 इंच का कद रखने वाली आरती ने अपनी काबिलियत का कद इतना ऊंचा कर लिया कि आज वह उन लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं जो अपनी शारीरिक कमियों या सामाजिक तानों के कारण टूट जाते हैं।

जन्म और शुरुआती चुनौतियां

आरती डोगरा का जन्म उत्तराखंड के देहरादून में एक सैन्य परिवार में हुआ। उनके पिता राजेंद्र डोगरा सेना में कर्नल थे और मां कुमकुम डोगरा एक निजी स्कूल में प्रधानाध्यापिका थीं। आरती अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं।

जब आरती का जन्म हुआ, तो डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे एक विशेष बच्ची हैं। उनका कद सामान्य बच्चों की तरह नहीं है। समाज के कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया था कि यह बच्ची समाज और माता-पिता पर बोझ होगी, इसे किसी विशेष स्कूल में डाल देना चाहिए। लेकिन आरती के माता-पिता के इरादे मजबूत थे। उन्होंने किसी की एक न सुनी और आरती को एक सामान्य बच्चे की तरह ही पाला, उसे वही संस्कार और वही आत्मविश्वास दिया जो किसी भी अन्य बच्चे को मिलता है।

शिक्षा के लिए देहरादून से दिल्ली तक का सफर

पढ़ाई में मेधावी आरती की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के ब्राइटलैंड स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने वेलहम गर्ल्स स्कूल देहरादून से आगे की पढ़ाई की। स्कूल के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और देश के सबसे बेहतरीन कॉलेजों में से एक लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह देहरादून लौट आईं और वहीं से उन्होंने परास्नातक की डिग्री भी हासिल की।

3.5 फीट का कद पर सपने बड़े थे, आरती ने ऐसे क्रैक किया UPSC और बनीं IAS |  Success Story of IAS Arti Dogra in Hindi
3.5 फीट का कद पर सपने बड़े थे, आरती ने ऐसे क्रैक किया UPSC और बनीं IAS | Success Story of IAS Arti Dogra in Hindi


मनीषा पंवार से मुलाकात बना जीवन का टर्निंग पॉइंट

पढ़ाई के दौरान ही आरती की मुलाकात मनीषा पंवार से हुई, जो उस समय आईएएस (IAS) अधिकारी थीं। मनीषा पंवार ने आरती के अंदर की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा की ओर प्रेरित किया। मनीषा पंवार का मार्गदर्शन आरती के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

मनीषा के व्यक्तित्व, उनकी कार्यशैली और समाज में उनके द्वारा लाए जा रहे बदलावों ने भी आरती को प्रशासनिक सेवा के लिए प्रेरित किया। यहीं से आरती ने ठान लिया कि वह आईएएस बनेंगी।

पहले ही प्रयास में लाईं 56वीं रैंक

आरती वापस देहरादून आईं और पोस्ट-ग्रेजुएशन के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। आरती ने अपनी पूरी ऊर्जा किताबों और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को समझने में लगा दी। नतीजा यह हुआ कि साल 2005 में अपने पहले ही प्रयास में आरती डोगरा ने यूपीएससी जैसी कठिनतम परीक्षा को न केवल पास किया, बल्कि पूरे भारत में 56वीं रैंक हासिल की। उन्हें राजस्थान कैडर मिला।

3 फुट की होने पर उड़ाते थे सब मजाक, IAS अफसर बन आरती ने बोलती की थी बंद; कर  चुकी हैं कई बड़े काम | Jansatta
3 फुट की होने पर उड़ाते थे सब मजाक, IAS अफसर बन आरती ने बोलती की थी बंद; कर चुकी हैं कई बड़े काम | Jansatta


मां ने कहा बेटी ने बेटे की कमी पूरी की

जब उन्होंने UPSC की परीक्षा पास की, तो कई लोग उन्हें बधाई देने आए। इस मौके पर कुछ लोगों ने उनकी मां से कहा, बेटी ने बेटे की कमी पूरी कर दी। इस पर उनकी मां का जवाब था, बेटे की कभी कमी नहीं रही। वह हमारी बेटी है और उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है।

प्रशासनिक मिसाल: जहां गईं, वहां परिवर्तन लाईं

आरती डोगरा की पहचान एक ऑफिस-बाउंड अफसर की नहीं, बल्कि फील्ड अफसर की रही है। उन्होंने कई जिलों में ऐसे कार्य किए जो आज केस स्टडी बन चुके हैं:

1 ) बीकानेर का 'बंको बिकाणो' अभियान
बीकानेर की जिला कलेक्टर रहते हुए उन्होंने 'बंको बिकाणो' अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य खुले में शौच को पूरी तरह बंद करना था। इसके लिए उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को समझाया कि यह केवल सफाई नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और बच्चों के स्वास्थ्य का मुद्दा है। उन्होंने एक मोबाइल सॉफ्टवेयर भी बनवाया जिससे शौचालयों के निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाती थी। इस अभियान की सफलता इतनी बड़ी थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी तारीफ की और स्वच्छ भारत मिशन के लिए इसे एक प्रेरणा बताया।

2 ) अनाथ बच्चियों को गोद लेने के लिए डॉक्टरों को किया प्रेरित
बीकानेर की जिला कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आरती डोगरा ने डॉक्टरों को प्रेरित किया कि वे एक अनाथ बच्ची को गोद लें और उसकी देखभाल, भोजन, आवास और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाएं। इसके परिणामस्वरूप 40 डॉक्टरों ने 40 बच्चियों की जिम्मेदारी ली, और यह परंपरा आज भी बीकानेर जिले में जारी है। इस पहल के लिए उन्हें 'बेटियां अनमोल हैं (Daughters are Precious)' पुरस्कार भी मिला है।

3) अजमेर में दिव्यांगों को दिया लोकतंत्र का अधिकार
अजमेर कलेक्टर के रूप में उन्होंने दिव्यांगों (विकलांगों) के लिए दिव्यांग रथ की शुरुआत की। उनका मानना है कि लोकतंत्र में हर वोट की कीमत है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर पोलिंग बूथ पर व्हीलचेयर हो और दिव्यांगों को घर से लाने-ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था हो। उनके इन प्रयासों के कारण लगभग 17,000 से अधिक दिव्यांगों ने मतदान में हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

कहानी उस इकलौती बेटी आरती डोगरा की, जिसे मां-बाप के लिए बोझ समझते थे लोग,  वो बनीं आईएएस | arti dogra IAS biography in hindi and Know Her hight,  family, Posting and
कहानी उस इकलौती बेटी आरती डोगरा की, जिसे मां-बाप के लिए बोझ समझते थे लोग, वो बनीं आईएएस | arti dogra IAS biography in hindi and Know Her hight, family, Posting and




वर्तमान भूमिका

वर्तमान में आरती डोगरा राजस्थान सरकार के ऊर्जा विभाग की सचिव, डिस्कॉम्स राजस्थान की अध्यक्ष, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक और राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की अध्यक्ष हैं।

आरती डोगरा अजमेर, बीकानेर और बूंदी की कलेक्टर रहने के साथ जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जोधपुर डिस्कॉम) की मैनेजिंग डायरेक्टर बनने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी भी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिजली चोरी रोकने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने में कड़े और तकनीकी फैसले लिए थे।

वह आज भी लाखों युवाओं के लिए यह संदेश लेकर खड़ी हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा मंजिल को नहीं रोक सकती। वह सचमुच छोटे कद की बड़ी अधिकारी हैं-जिनकी सफलता की ऊंचाई को शब्दों में बांध पाना मुश्किल है।

ये भी पढ़ें:-

बिना कोचिंग और बिना संसाधनों के आईएएस बने जोगाराम, दो दिन पुराने अखबार और रेडियो से लिखी कामयाबी की कहानी

राशन की दुकान ने दिया IAS बनने का सपना, निशांत जैन की वह कहानी जो हर छात्र को पढ़नी चाहिए

IIT टॉपर से UPSC टॉपर तक, कनिष्क कटारिया की वो लव स्टोरी, जिसने IAS बनने का सपना बुना

सरकारी स्कूल में पढ़े, सरकारी शिक्षक बने, फिर पहले ही प्रयास में बन गए आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार

Tags:
  • IAS
  • आईएएस
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा
  • प्रशासनिक सेवा
  • जिला कलेक्टर
  • राजस्थान कैडर
  • आईएएस आरती डोगरा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा