जोरदार रिटर्न ने भारतीयों को बनाया ETF का दीवाना, बदल रही सोना में निवेश की आदत
Amresh Kushwaha | May 13, 2026, 14:31 IST
india gold investment shift etf returns
मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय अब पारंपरिक गहनों के बजाय गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। घरों में जमा 478 लाख करोड़ का सोना अब देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन सकता है।
भारत में सोना (Gold) केवल एक पीली धातु नहीं है; यह एक भावना है, एक सुरक्षा कवच है और पीढ़ियों का विश्वास है। क्या आप जानते हैं कि भारतीय घरों की तिजोरियों में इतना सोना दबा है जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी पीछे छोड़ दे?
मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स ने देश की इस सुनहरी ताकत का पर्दाफाश किया है। आजthesootr के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कैसे भारतीयों के निवेश करने का अंदाज अब बदल रहा है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) की मई 2026 की रिपोर्ट ने पूरे आर्थिक जगत को चौंका दिया है। भारतीय परिवारों के पास इस समय लगभग पांच ट्रिलियन डॉलर यानी 478 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सोना जमा है।
यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह भारत की कुल जीडीपी (Gross Domestic Production) के करीब डेढ़ गुना के बराबर है। एसोचैम (ASSOCHAM) के अनुसार, इसका 75-80% हिस्सा गहनों के रूप में घरों में रखा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि यह भंडार दुनिया के सबसे बड़े 10 केंद्रीय बैंकों के कुल सोने के रिजर्व से भी कहीं अधिक है। अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों को छोड़ दें, तो भारतीयों के पास मौजूद इस सोने की कीमत दुनिया के लगभग हर देश की सालाना जीडीपी (GDP) से ज्यादा है।
गहनों से
वक्त के साथ भारतीयों की सोच बदल रही है। अब लोग सिर्फ भारी-भरकम गहने ही नहीं, बल्कि कागजी सोने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो निवेश (Investment) की हिस्सेदारी 2024 के 29% से बढ़कर 2025 में 42% तक पहुंच गई है।
शहरी मध्यवर्ग अब बैंक लॉकर के चक्कर काटने के बजाय गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) को प्राथमिकता दे रहा है। वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड ETF में निवेश 2.6 गुना बढ़ा है, जो एक नया रिकॉर्ड है।
साल 2015 में शुरू हुई सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना, जो कभी निवेशकों की पहली पसंद थी, अब बंद हो गई है। इसका मुख्य कारण सरकार पर बढ़ता वित्तीय बोझ है। 2015 में सोना 26 हजार 300 प्रति 10 ग्राम था, जो मार्च 2025 तक 84 हजार 450 पर पहुंच गया।
इस भारी उछाल के कारण सरकार को निवेशकों को उम्मीद से कहीं ज्यादा पैसा लौटाना पड़ा है। इससे सरकारी खजाने पर एक लाख 12 हजार करोड़ की देनदारी बन गई थी। इसी वजह से बजट 2026 में भी किसी नए बॉन्ड की घोषणा नहीं की गई है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी खजाने और आम जनता के भंडार के बीच एक बड़ा अंतर नजर आता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council - WGC) के डेटा के मुताबिक, भारत के आधिकारिक खजाने यानी RBI के पास 880.3 टन सोना है, जो दुनिया में आठवें स्थान पर है। हालांकि, जब हम प्राइवेट स्टॉक यानी जनता के पास रखे सोने की बात करते हैं, तो भारत इस मामले में पूरी दुनिया का निसंदेह राजा है।
एसोचैम ने एक ऐसा रोडमैप (Roadmap) तैयार किया है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। रिपोर्ट का दावा है कि यदि हम हर साल अपने कुल सोने का केवल 2% हिस्सा भी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के जरिए बैंकिंग सिस्टम में ले आएं, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान होगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस कदम से 2047 तक भारत की अनुमानित 34 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी को 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया जा सकता है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के चलते सोना 6200 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। इसका मतलब है कि भारत में इसकी कीमत दो लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को एक राष्ट्रीय स्वर्ण नीति (National Gold Policy) बनानी चाहिए, ताकि घरों में बंद यह 478 लाख करोड़ की संपत्ति देश की अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में आ सके।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिपोर्ट, मई 2026 - भारतीय परिवारों में सोने की कुल वैल्यू
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मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स ने देश की इस सुनहरी ताकत का पर्दाफाश किया है। आज
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यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह भारत की कुल जीडीपी (Gross Domestic Production) के करीब डेढ़ गुना के बराबर है। एसोचैम (ASSOCHAM) के अनुसार, इसका 75-80% हिस्सा गहनों के रूप में घरों में रखा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि यह भंडार दुनिया के सबसे बड़े 10 केंद्रीय बैंकों के कुल सोने के रिजर्व से भी कहीं अधिक है। अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों को छोड़ दें, तो भारतीयों के पास मौजूद इस सोने की कीमत दुनिया के लगभग हर देश की सालाना जीडीपी (GDP) से ज्यादा है।
गहनों से डिजिटल गोल्ड तक का सफर
शहरी मध्यवर्ग अब बैंक लॉकर के चक्कर काटने के बजाय गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) को प्राथमिकता दे रहा है। वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड ETF में निवेश 2.6 गुना बढ़ा है, जो एक नया रिकॉर्ड है।
सरकार के लिए क्यों बना महंगा सौदा?
इस भारी उछाल के कारण सरकार को निवेशकों को उम्मीद से कहीं ज्यादा पैसा लौटाना पड़ा है। इससे सरकारी खजाने पर एक लाख 12 हजार करोड़ की देनदारी बन गई थी। इसी वजह से बजट 2026 में भी किसी नए बॉन्ड की घोषणा नहीं की गई है।
इन बदलावों को नीचे दिए गए ग्राफ से समझें...
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तिजोरी में बंद सोता हुआ निवेश और RBI का आठवां नंबर
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क्या दो लाख रुपए तक पहुंचेगा भाव?
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को एक राष्ट्रीय स्वर्ण नीति (National Gold Policy) बनानी चाहिए, ताकि घरों में बंद यह 478 लाख करोड़ की संपत्ति देश की अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में आ सके।
Sources
SBI रिसर्च रिपोर्ट: Coming Of A Turbulent Age - राष्ट्रीय गोल्ड नीति की सिफारिश
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