खेत से सीधा आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर: विदेश भी नहीं खरीद रहा भारतीय कृषि उत्पाद

Amresh Kushwaha | Aug 16, 2026, 14:15 IST
Share
खेत से सीधा आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर
खेत से सीधा आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर

भारत के फल, सब्जी और मसालों में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मिल रहे हैं। इस वजह से जापान, चीन और यूरोप ने कई उत्पाद रिजेक्ट किए हैं। सरकारी आंकड़ों में भी हजारों सैंपल असुरक्षित पाए गए हैं। यह लोगों की सेहत और देश के निर्यात दोनों के लिए बड़ा खतरा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भारत के फल, सब्जी और मसालों में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मिल रहे हैं।
  • जापान ने भारतीय आमों के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
  • चीन ने चावल और मिर्च के कई कंसाइनमेंट रिजेक्ट कर दिए हैं।
  • सरकारी सर्वे में हजारों सैंपल सुरक्षित सीमा से ज्यादा जहरीले मिले हैं।
  • यह संकट सेहत के साथ-साथ देश के कृषि निर्यात को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
हमारी रोजाना की थाली में परोसा जाने वाला खाना अब सवालों के घेरे में है। जिस अनाज, फल और सब्जी को हम सेहतमंद समझकर खाते हैं, उसमें अनजाने में जहरीले केमिकल (कीटनाशक दवा) पहुंच रहे हैं। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है। इसका सीधा असर देश के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। साल 2026 में यह संकट और गहरा होता दिख रहा है।

जापान ने रोका भारतीय आमों का आयात

इस साल जापान ने भारत से आने वाले आमों पर बड़ा फैसला लिया है। जापान ने भारतीय प्रसंस्करण संयंत्रों में कई खामियां पाईं। इसके बाद उसने आम के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी। इस फैसले से अल्फांसो, केसर और चौसा जैसी लोकप्रिय किस्में जापानी बाजार से बाहर हो गईं। यह भारत के फल निर्यात के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

चीन ने भी लौटाए कई कंसाइनमेंट

जापान के अलावा चीन ने भी भारतीय उत्पादों पर सख्ती दिखाई है। चीन ने गैर बासमती चावल के कई कंसाइनमेंट खारिज कर दिए। चीन का कहना है कि इन खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी GMO (Genetically Modified Organism) अंश पाए गए। इसके अलावा भारतीय मिर्च के कंसाइनमेंट में भी गड़बड़ी मिली। चीन ने बताया कि इनमें तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मेथामिडोफॉस पाया गया। इसके बाद इन खेपों को भी वापस भेज दिया गया।

65030834-0c7
65030834-0c7


सप्लाई चेन में गड़बड़ी की पूरी कहानी

यह सिर्फ व्यापारिक नुकसान नहीं है। यह इस बात का सीधा संकेत है कि खेत से बाजार तक की पूरी सप्लाई चेन में गड़बड़ी है। कहीं न कहीं फसल उगाने से लेकर बेचने तक हर स्तर पर लापरवाही हो रही है। यही वजह है कि विदेशी बाजारों में भारत की साख भी प्रभावित हो रही है।

सरकारी आंकड़े भी डराने वाले

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने हाल ही में संसद में चौंकाने वाले आंकड़े रखे हैं। पिछले तीन साल में देश के 23 राज्यों से फल और सब्जियों के नमूने लिए गए। कुल 70 हजार 652 सैंपल की जांच हुई थी। इनमें से 3.1 प्रतिशत सैंपल तय सुरक्षित सीमा से ज्यादा जहरीले पाए गए। यह सीमा FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने तय की है। इसे मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट यानी MRL (Maximum Residue Limit) कहा जाता है।

aab77431-bc0
aab77431-bc0


पंजाब में बढ़ रही हैं गंभीर बीमारियां

पंजाब जैसे राज्यों में केमिकल के अंधाधुंध इस्तेमाल से हालात और गंभीर हो रहे हैं। यहां कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह चिंता की बात है क्योंकि यह असर सीधे आम लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। कई परिवार इन बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।

मूंग की फसल में भी बड़ी लापरवाही

सेहतमंद माने जाने वाले मूंग में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कुछ किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए खड़ी मूंग पर पैराक्वाट जैसे खतरनाक रसायन का छिड़काव करते हैं। यह रसायन पहले से प्रतिबंधित है। जब लोग इसे अंकुरित करके या दाल के रूप में खाते हैं, तो यही जहरीले अंश शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे फेफड़े, किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान होता है।

94cde07f-467
94cde07f-467


आलू, अदरक और फलों में भी खतरनाक मिलावट

सिर्फ मूंग ही नहीं, आलू और अदरक को आकर्षक दिखाने के लिए भी खतरनाक कलर का इस्तेमाल हो रहा है। फलों को जल्दी पकाने के लिए भी गलत तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसके लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।

यूरोप में भी रिजेक्ट हुए सैकड़ों उत्पाद

यह समस्या सिर्फ एशियाई देशों तक सीमित नहीं है। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण यानी EFSA (European Food Safety Authority) के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। सिर्फ दो साल में भारत के 365 से ज्यादा उत्पाद रिजेक्ट किए गए। इनमें कीटनाशक और भारी धातुओं की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई। कुछ उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड जैसे कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी मिले। यह रसायन कई देशों में पहले से प्रतिबंधित है।

आखिर इसके पीछे असली रसायन का मकसद क्या है

हैरानी की बात यह है कि इन खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल फसल उगाने के लिए नहीं होता। इनका इस्तेमाल कटाई के बाद किया जाता है। ये रसायन फसल को जल्दी पकाने, सुखाने या स्टोरेज में सड़ने से बचाने के लिए डाले जाते हैं। जब यही जहरीले अंश विदेशी जांच में पकड़े जाते हैं, तो भारत का निर्यात तेजी से गिर जाता है।

a9006cf6-36d
a9006cf6-36d


किसकी है असली जिम्मेदारी

यह सवाल बार बार उठता है कि इसके लिए किसे जिम्मेदार माना जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ किसान इसके दोषी नहीं हैं। असली गड़बड़ी पूरी व्यवस्था में है। पेस्टिसाइड कंपनियां और डीलर मुनाफे के लिए किसानों को अंधाधुंध केमिकल बेच रहे हैं। दूसरी तरफ व्यापारी उपज को चमकदार दिखाने के लिए घातक केमिकल मिला रहे हैं। किसानों को सही जानकारी देने वाला कोई तंत्र मौजूद नहीं है।

सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल

यहां सबसे बड़ा सवाल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी पर उठता है। कृषि विभाग और प्रसार तंत्र की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे किसानों को जागरूक करें। यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि बाजार में कोई प्रतिबंधित रसायन न बिके। लेकिन जब भी कोई कंसाइनमेंट रिजेक्ट होकर वापस आता है, तो अलग अलग विभाग एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगते हैं। कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता।

सरकार ने उठाया एक जरूरी कदम

हाल ही में सरकार ने पैराक्वाट जैसे खतरनाक खरपतवारनाशी पर प्रतिबंध लगाया है। इस रसायन का कोई एंटीडोट यानी विषनाशक दवा मौजूद नहीं है। इसकी वजह से देश भर में लगातार मौतें हो रही थीं। इस प्रतिबंध को एक सराहनीय कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक रसायन पर रोक काफी नहीं है।

आगे क्या करने की जरूरत है

खेती से लेकर कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग तक हर स्तर पर आधुनिक टेस्टिंग लैब बनानी होगी। सप्लाई चेन में पारदर्शिता लाना बेहद जरूरी है। किसानों को सही वैज्ञानिक तरीके सिखाने की जरूरत है। साथ ही नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई भी जरूरी है। तभी हमारी थाली तक पहुंचने वाला हर दाना सुरक्षित बन पाएगा।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर हर नागरिक की सेहत से सीधे जुड़ी है क्योंकि हम रोजाना जो खाना खाते हैं, उसकी सुरक्षा हमारा मौलिक हक है। साफ और सुरक्षित भोजन पाना हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है। यह खबर सरकारी तंत्र, कृषि विभाग और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।

यह सरकारी आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय पूरी व्यवस्था की खामियां सामने लाई गई हैं। यह लोगों को अपने खानपान को लेकर जागरूक भी बनाती है।

FAQ

  1. जापान और चीन ने भारतीय कृषि उत्पादों पर रोक क्यों लगाई?
    जापान ने भारतीय आमों के प्रसंस्करण संयंत्रों में खामियां पाकर आयात पर रोक लगाई। इससे अल्फांसो, केसर और चौसा आम प्रभावित हुए। चीन ने गैर बासमती चावल में GMO अंश और मिर्च में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मेथामिडोफॉस पाया। इसी वजह से चीन ने कई कंसाइनमेंट वापस भेज दिए।
  2. भारत में फल और सब्जियों में कीटनाशक की समस्या कितनी बड़ी है?
    कृषि मंत्रालय के अनुसार पिछले तीन साल में 23 राज्यों से 70,652 सैंपल लिए गए। इनमें से 3.1 प्रतिशत सैंपल FSSAI की तय सुरक्षित सीमा से ज्यादा जहरीले मिले। पंजाब जैसे राज्यों में केमिकल के अत्यधिक इस्तेमाल से कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं। यह आंकड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरे की ओर इशारा करते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...

100 दिन में मिला 122 टन जहरीला खाना! जानिए आपकी थाली तक कैसे पहुंच रहा स्लो पॉइजन

कम दिनों में अति-बारिश से तबाही और बढ़ी गर्मी, यो-यो मानसून से कैसे निपटेगा भारत

वेश्या, रखैल जैसे शब्दों पर अब लगी पूरी रोक, 125 केसों को पढ़कर भोपाल में तैयार हुई गाइडलाइन

टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश क्यों अटकी? नोएल टाटा के सवाल से खुला राज

Tags:
  • Food Safety and Standards Authority of India
  • अंतरराष्ट्रीय
  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय
  • कीटनाशक दवा
  • FSSAI
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google