क्या है Hindu Succession Act, 18 साल की हर महिला को पता होनी चाहिए ये बातें, वरना प्रॉपर्टी जाएगी हाथ से

Kaushiki | Dec 07, 2025, 13:25 IST
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hindu succession act
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महिलाएं अपनी वसीयत जरूर बनाएं। नहीं तो हिंदू उत्तराधिकार कानून की धारा 15(1)(b) के तहत संपत्ति पति या ससुराल को चली जाएगी। अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए वसीयत है जरूरी।

अक्सर यह माना जाता है कि वसीयत बनाना केवल पुरुषों का काम है। ऐसे में आज की आत्मनिर्भर महिलाएं भी अपनी प्रॉपर्टी सेल्फ-अक्वायर्ड कर सकती हैं।

इसी कॉन्टेक्स्ट में, हाल ही में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) की धारा 15(1)(b) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर कानूनी मामला उठा। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई विवाहित महिला बिना वसीयत मरे तो, संपत्ति पर पहला हक पति या ससुराल का होता है।

हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत, ऐसे में मायके वालों को सबसे आखिर में हक मिलता है। इस डिस्क्रिमिनेशन कानूनी प्रावधान को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हर महिला को अपनी मेहनत की कमाई और संपत्ति की सुरक्षा के लिए वसीयत बनाने की सख्त सलाह दी है।

Ladderup Trustee Services | Succession Laws
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हिंदू उत्तराधिकार कानून क्या है

हिंदू उत्तराधिकार कानून (Hindu Succession Act), 1956। ये तय करता है कि बिना वसीयत किए मरे हुए व्यक्ति की संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा। किस-किस को कितना हिस्सा मिलेगा। यह कानून हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लोगों पर लागू होता है।

यह कानून महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार देता है। यानी बेटियों का भी पैतृक संपत्ति पर बेटों के बराबर जन्मसिद्ध अधिकार होता है। संक्षेप में, यह कानूनी रूप से उत्तराधिकार के नियम स्थापित करता है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 15: लिंग पूर्वाग्रह और सुधार की  आवश्यकता - iPleaders
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क्या था इस कानून से जुड़ा मामला

आपको बता दें कि, दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाली एडवोकेट स्निधा मेहरा ने कोर्ट में एक बहुत ही अहम अपील की थी। उनकी आपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act, 1956) की धारा 15 (1) (b) पर थी। मेहरा का कहना था कि यह धारा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है।

अगर कोई महिला बिना वसीयत के मर जाती है, तो यह कानून उसकी स्वतंत्रता और संपत्ति पर उसके अधिकार को नजरअंदाज करता है। मेहरा ने कहा कि जब संपत्ति सीधे पति या ससुराल वालों को चली जाती है, तो यह महिला की मर्जी के खिलाफ हो सकता है।

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अगर महिला बिना वसीयत के मर जाए, तो क्या होता है?

यही वह सबसे बड़ा पॉइंट है जिसके कारण वसीयत बनाना जरूरी है। हिंदू उत्तराधिकार कानून की धारा 15 और 16 के मुताबिक, अगर महिला वसीयत नहीं बनाती है, तो उसकी संपत्ति का बंटवारा इस ऑर्डर में होता है:

  • सबसे पहले: संपत्ति उसके पति को मिलेगी।
  • उसके बाद: अगर पति नहीं है, तो संपत्ति पति के परिवार/रिश्तेदारों के पास जाएगी।
  • सबसे आखिर में: अगर वहां भी कोई नहीं है, तब जाकर संपत्ति पर महिला के मायके यानी उसके माता-पिता और भाई-बहनों का हक बनेगा।
  • जाहिर है ये नियम कई महिलाओं को असहज कर सकता है। खासकर अगर उनके अपने परिवार (मायके) के साथ ज्यादा नजदीकी हो।
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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं से क्या अपील की?

इस मामले पर विचार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सीधे हर उम्र की महिलाओं को एक बहुत ही जरूरी सलाह दी है:

  • वसीयत जरूर बनाएं: कोर्ट ने कहा कि आप चाहे सिंगल हों या अनमैरिड, अपनी वसीयत जरूर तैयार करें।
  • कानून आउटडेटेड: कोर्ट ने यह भी माना कि 1956 का यह कानून अब आउटडेटेड हो चुका है। आज की महिलाएं पहले से कहीं ज्याद अपनी संपत्ति की मालिक हैं।
  • कोर्ट का नया नियम: अगर कोई महिला बिना वसीयत के मर जाती है, तो अब सीधे कोर्ट केस शुरू नहीं होगा। पहले मेडिएशन की कोशिश की जाएगी। मेडिएशन में जो फैसला होगा, उसे ही कोर्ट का आदेश मान लिया जाएगा। यह एक बड़ी राहत है ताकि कानूनी झंझट कम हो।
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वसीयत बनाने से जुड़ी 7 जरूरी बातें

वसीयत सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है। यह आपकी फ्रीडम, आपका अधिकार और आपकी सुरक्षा है। वकीलों के मुताबिक, महिला होने के नाते आपको वसीयत से जुड़ी ये 7 बातें जरूर पता होनी चाहिए:

  • केवल रजिस्टर्ड वसीयत ही सही:
    एडवोकेट चारू वलीखन्ना के मुताबिक, वसीयत को सिर्फ लिखकर गद्दे के नीचे रखना काफी नहीं है। केवल रजिस्टर्ड वसीयत ही कानूनी रूप से विवादास्पद नहीं होती है। यही वैद्य मानी जाती है।
  • पति के उत्तराधिकारियों पर प्राथमिकता:
    वसीयत बनाने से आप हिंदू उत्तराधिकार कानून के नियम को बाईपास कर सकती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी संपत्ति, शेयर्स, पैसा उन्हीं लोगों को मिले जिन्हें आप खुद चुनती हैं।
  • झंझट रहित ट्रांसफर:
    वसीयत परिवार में संपत्ति को लेकर कोई झंझट नहीं होने देती। ट्रांसफर सुचारू रूप से होता है। अगर आप 18 साल की आयु पार कर चुकी हैं और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं, तो आप कभी भी वसीयत बना सकती हैं।
  • नॉमिनी ही उत्तराधिकारी नहीं:
    यह न समझें कि सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट में सिर्फ नॉमिनी भर देने से काम चल जाएगा। नॉमिनी केवल संपत्ति को अस्थायी रूप से रखने वाला होता है। आपको वसीयत में साफ-साफ लिखना होगा कि आपके वित्तीय ऐसेट का लीगल उत्तराधिकारी कौन होगा।
  • समय-समय पर अपडेट करें:
    प्लानमाईएस्टेट अडवायजर एलएलपी के शैलेंद्र दुबे के मुताबिक, वसीयत लिखने के बाद साल में कम से कम एक बार उसे अपडेट जरूर करवा लें। अगर आपकी संपत्ति या रिश्ते में कोई बदलाव आया हो, तो यह बहुत जरूरी है।
  • पूरी जानकारी दें:
    वसीयत में आपके पर्सनल डिटेल्स के साथ-साथ, जिन लोगों को आप हिस्सा दे रही हैं, उनका पूरा पता और यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर (जैसे आधार) जरूर शामिल करें।
  • फिजिकल सिक्योरिटीज का डिटेल्स:
    अगर आपके पास फिजिकल शेयर, बॉन्ड या दूसरी सिक्योरिटीज हैं, तो वसीयत में उनके जरूरी सूचनाओं और नंबर का अलग से जिक्र करना चाहिए। इससे मृत्यु के बाद ट्रांसफर एकदम स्मूद रहता है।
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तो अब आप क्या करें?

यह सब जानकारी पढ़ने के बाद, अब आपके लिए सबसे जरूरी काम है, एक्शन लेना। आप

  • अपनी सभी संपत्तियों की एक पूरी लिस्ट बनाएं।
  • तय करें कि आपकी संपत्ति किसे और कितनी मिलेगी।
  • किसी लीगल सर्विस की मदद से एक सरल वसीयत बनवाएं।
  • आप अपनी वसीयत खुद भी लिख सकती हैं।
  • इसे हैंड रिटेन विल कहते हैं। लेकिन इसे रजिस्टर करवाना सबसे सुरक्षित है।
अपनी वसीयत (Property Rights) बनाकर, आप सिर्फ अपने पैसों को नहीं बल्कि अपनी मेहनत और अपने हकों को भी सुरक्षित करती हैं।

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