11 जून का इतिहास: क्या थी नेहरू जी की आखिरी इच्छा, जिसने सबको भावुक कर दिया
Kaushiki | Jun 11, 2026, 08:00 IST
jawaharlal nehru last wish ashes
साल 1964 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ। उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक, उनकी अस्थियों की भस्म को हवाई जहाज से देश के खेतों में बिखेरा गया था। यह लेख उनकी उसी ऐतिहासिक वसीयत और देशप्रेम की कहानी को बयां करता है।
Jawaharlal Nehru Last Wish: ये कहानी साल 1964 की है, जब भारत ने अपने सबसे चहेते नेता और पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को खो दिया था। पूरे देश में शोक की लहर थी। लेकिन इसी बीच उनकी एक वसीयत सामने आई।
इस वसीयतनामा में नेहरू जी ने अपनी मृत्यु के बाद के लिए एक ऐसी इच्छा लिखी थी, जिसने हर हिंदुस्तानी का दिल जीत लिया। वे अपनी अस्थियों को किसी वीआईपी तिजोरी में नहीं रखना चाहते थे। ना ही वे पारंपरिक तरीके से सब कुछ पानी में बहाना चाहते थे। आइए जानते हैं नेहरू जी की उस आखिरी इच्छा की पूरी दास्तान।
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जवाहरलाल नेहरू ने अपनी मौत से करीब 10 साल पहले ही एक वसीयत लिख दी थी। उन्होंने 21 जून 1954 को अपनी इस आखिरी इच्छा को कागज पर उतारा था। नेहरू जी ने साफ लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद किसी भी तरह के धार्मिक कर्मकांड न किए जाएं।
नेहरू जी इन सब चीजों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करते थे। नेहरू जी का मानना था कि ऐसे रीति-रिवाजों में पड़ना केवल एक रस्म निभाना है। वे चाहते थे कि उनके जाने के बाद देश का समय और रिसोर्सेज इन सब चीजों में बर्बाद न हो। उनका ये विचार उस समय के हिसाब से बेहद मॉडर्न और साइंटिफिक सोच वाला माना गया था।
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अपनी वसीयत में नेहरू जी ने इलाहाबाद की गंगा नदी का विशेष रूप से जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि उनकी भस्म का एक छोटा हिस्सा गंगा में विसर्जित कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इसके पीछे उनका कोई धार्मिक कारण नहीं था।
नेहरू जी बचपन से ही इलाहाबाद में रहे थे और गंगा नदी से उनका लगाव बेहद गहरा था। उन्होंने गंगा को भारत की संस्कृति और इतिहास का प्रतीक माना था। उनके लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बदलते हुए भारत की एक जीती-जागती गवाह थी।
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वसीयत का सबसे इमोशनल कर देने वाला हिस्सा उनकी अस्थियों के बचे हुए बड़े हिस्से को लेकर था। नेहरू जी (Pandit Jawaharlal Nehru) चाहते थे कि उनकी भस्म को देश के कोने-कोने में ले जाया जाए। वे चाहते थे कि इसे हवाई जहाज की मदद से बहुत ऊंचाई पर ले जाकर नीचे बिखेरा जाए।
वे चाहते थे कि उनकी भस्म भारत के उन खेतों में जाकर मिल जाए, जहां देश के किसान दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं। नेहरू जी की इच्छा थी कि वे मरने के बाद भी भारत की मिट्टी का एक अटूट हिस्सा बन जाएं। वे भारत से कभी अलग नहीं होना चाहते थे।
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27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के बाद तत्कालीन सरकार ने उनकी वसीयत को पूरी श्रद्धा के साथ लागू करने का फैसला किया। उनकी अस्थियों के भस्म को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया।
भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों की मदद ली गई। इन विमानों के जरिए नेहरू जी की भस्म को देश के विशाल खेतों के ऊपर ले जाकर हवा में उड़ा दिया गया। इस तरह देश के पहले प्रधानमंत्री हमेशा के लिए भारत की फसलों और मिट्टी में समा गए।
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नेहरू जी का अपनी अस्थियों को खेतों में बिखेरने का यह फैसला इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। इसने देश के किसानों के प्रति उनके सम्मान और प्यार को दुनिया के सामने जाहिर किया।
लोग उनके इस कदम से बेहद प्रभावित हुए और उनकी देशभक्ति के कायल हो गए। इस घटना ने यह साबित किया कि नेहरू जी सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि दिल से भारत के हर नागरिक से जुड़े थे।
आज भी जब हम भारतीय इतिहास की बात करते हैं, तो नेहरू जी की यह आखिरी इच्छा उनके विराट व्यक्तित्व का सबसे सुंदर उदाहरण मानी जाती है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 11 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 11 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
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इस वसीयतनामा में नेहरू जी ने अपनी मृत्यु के बाद के लिए एक ऐसी इच्छा लिखी थी, जिसने हर हिंदुस्तानी का दिल जीत लिया। वे अपनी अस्थियों को किसी वीआईपी तिजोरी में नहीं रखना चाहते थे। ना ही वे पारंपरिक तरीके से सब कुछ पानी में बहाना चाहते थे। आइए जानते हैं नेहरू जी की उस आखिरी इच्छा की पूरी दास्तान।
11 जून का इतिहास : आज के दिन जवाहर लाल नेहरू की राख को देश पर बिखेरा गया, जानिए आज की ऐतिहासिक घटनाएं | History Of 11 June Jawahar Lal Nehrus Ashes
नेहरू की वसीयत में क्या लिखा था
नेहरू जी इन सब चीजों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करते थे। नेहरू जी का मानना था कि ऐसे रीति-रिवाजों में पड़ना केवल एक रस्म निभाना है। वे चाहते थे कि उनके जाने के बाद देश का समय और रिसोर्सेज इन सब चीजों में बर्बाद न हो। उनका ये विचार उस समय के हिसाब से बेहद मॉडर्न और साइंटिफिक सोच वाला माना गया था।
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गंगा नदी से नेहरू जी का रिश्ता
नेहरू जी बचपन से ही इलाहाबाद में रहे थे और गंगा नदी से उनका लगाव बेहद गहरा था। उन्होंने गंगा को भारत की संस्कृति और इतिहास का प्रतीक माना था। उनके लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बदलते हुए भारत की एक जीती-जागती गवाह थी।
जन्मदिन विशेष: संस्थाओं को आधुनिक भारत का मंदिर मानते थे नेहरू
नेहरू की अस्थियों को खेतों में बिखेरने की वजह
वे चाहते थे कि उनकी भस्म भारत के उन खेतों में जाकर मिल जाए, जहां देश के किसान दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं। नेहरू जी की इच्छा थी कि वे मरने के बाद भी भारत की मिट्टी का एक अटूट हिस्सा बन जाएं। वे भारत से कभी अलग नहीं होना चाहते थे।
Jawaharlal Nehru Know How did Jawaharlal Nehru became the First Prime Minister of India | प्रधानमंत्री सीरीज 1: जानें देश के पहले प्रधानमंत्री कैसे बने थे जवाहरलाल नेहरू
कैसे पूरी की गई नेहरू जी की अंतिम इच्छा
भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों की मदद ली गई। इन विमानों के जरिए नेहरू जी की भस्म को देश के विशाल खेतों के ऊपर ले जाकर हवा में उड़ा दिया गया। इस तरह देश के पहले प्रधानमंत्री हमेशा के लिए भारत की फसलों और मिट्टी में समा गए।
जयंती विशेष: देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का लोकतंत्र में था यकीन, इसलिए वे थे इनते उदारवादी
नेहरू जी के फैसले का समाज पर प्रभाव
लोग उनके इस कदम से बेहद प्रभावित हुए और उनकी देशभक्ति के कायल हो गए। इस घटना ने यह साबित किया कि नेहरू जी सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि दिल से भारत के हर नागरिक से जुड़े थे।
आज भी जब हम भारतीय इतिहास की बात करते हैं, तो नेहरू जी की यह आखिरी इच्छा उनके विराट व्यक्तित्व का सबसे सुंदर उदाहरण मानी जाती है।
Reference Links:
- जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड (JNMF) - नेहरू की आधिकारिक वसीयत का रिकॉर्ड: [https://www.jnmf.in](https://www.jnmf.in)
- भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का इतिहास खंड: [https://www.pmindia.gov.in](https://www.pmindia.gov.in)
- भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) - 1964 के ऐतिहासिक दस्तावेज: [http://www.nationalarchives.nic.in]
- प्रसार भारती (Prasar Bharati) - नेहरू जी के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन की आर्काइव वीडियो रिपोर्ट: [https://www.prasarbharati.gov.in]
11 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 11 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1866: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना हुई (इसे पहले आगरा उच्च न्यायालय के नाम से जाना जाता था)।
- 1964: प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की इच्छानुसार उनकी अस्थियों की भस्म पूरे देश में बिखेरी गई।
- 2003: अन्ना कोर्निकोवा को महिला टेनिस की सबसे सुन्दर खिलाड़ी घोषित किया गया।
- 2006: नेपाली संसद ने सर्वसम्मति से वहां के राजा (नरेश) के वीटो अधिकार को समाप्त कर दिया।
- 2007: फिजी के अपदस्थ प्रधानमंत्री लाडसेनिया करासे को राजधानी सुवा में प्रवेश की इजाजत मिली।
- 2008: ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
- 2008: उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने जमुना निषाद की जगह धर्मराज निषाद को मंत्रिमंडल में शामिल किया।
- 2008: भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद को रिहा किया गया।
- 1897: महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म हुआ।
- 1909: भारतीय विधिवेत्ता, राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष के. एस. हेगड़े का जन्म हुआ।
- 1927: मिज़ो राष्ट्रवादी और मिज़ोरम के पूर्व मुख्यमंत्री लालडेंगा का जन्म हुआ।
- 1937: प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नर्तक, कोरियोग्राफर और शिक्षाविद कनक रेले का जन्म हुआ।
- 1942: तमिलनाडु के प्रसिद्ध भारतीय उत्प्रेरक वैज्ञानिक (Catalytic Scientist) पॉल रत्नस्वामी का जन्म हुआ।
- 1947: भारत के 17वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) शाहबुद्दीन याक़ूब क़ुरैशी का जन्म हुआ।
- 1948: भारतीय राजनीतिज्ञ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का जन्म हुआ।
- 1989: भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी का जन्म हुआ।
- 1924: मराठी भाषा के सुप्रसिद्ध इतिहासकार, कवि, नाटककार और जीवनी लेखक वासुदेव वामन शास्त्री खरे का निधन हुआ।
- 1970: प्रसिद्ध बंगाली पत्रकार और महिला क्रांतिकारी लीला नाग का निधन हुआ।
- 1983: भारत के दिग्गज उद्योगपति और स्वतंत्रता सेनानी घनश्यामदास बिड़ला का निधन हुआ।
- 1997: भारत के प्रसिद्ध लंबी दूरी के तैराक (पहले भारतीय जिन्होंने इंग्लिश चैनल पार किया) मिहिर सेन का निधन हुआ।
- 2021: कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध कवि, नाटककार और दलित कार्यकर्ता सिद्धलिंगैया का निधन हुआ।
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