22 जून का इतिहास: जब 12 साल में अकबर को सौंपी गई मुगल साम्राज्य की कमान
Kaushiki | Jun 22, 2026, 08:00 IST
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साल 1555 में मुगल सम्राट हुमायूं ने अपने बेटे अकबर को अपना आधिकारिक वारिस घोषित किया था। सरहिंद की ऐतिहासिक लड़ाई में सूरी साम्राज्य को हराने के बाद हुमायूं ने यह बड़ा कदम उठाया, जिसने भारत का इतिहास बदल दिया।
Mughal Empire Successor: इतिहास के पन्नों में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का नक्शा बदल दिया। भारत के संदर्भ में साल 1555 एक ऐसा ही ऐतिहासिक समय माना जाता है। इस साल एक पिता ने अपने बेटे के भविष्य को एक नई दिशा दी थी।
यह कहानी मुगल साम्राज्य के दूसरे शासक हुमायूं और उनके बेटे अकबर की है। हुमायूं का जीवन बहुत ही उतार-चढ़ाव से भरा हुआ रहा था। उन्हें अपने जीवन में कई सालों तक दर-दर भटकना पड़ा था।
शेरशाह सूरी से हारने के बाद हुमायूं को भारत छोड़कर भागना पड़ा था। लेकिन हुमायूं ने कभी भी वापस आने की अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। वे लगातार अपनी सेना को मजबूत करने में जुटे रहे। आइए जानें इसके पीछे की कहानी...
![बीरबल से तानसेन तक...कौन-कौन थे अकबर के नवरत्न और ये करते क्या थे? | Mughal story of emperor akbar nine jewels who were in nine jewels and their functions]()
साल 1555 में हुमायूं ने एक बार फिर भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई। इस बार उनके साथ उनका युवा बेटा जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर भी मौजूद था। मुगल सेना का मुकाबला सिकंदर शाह सूरी की सेना से हुआ।
इस जंग को इतिहास में सरहिंद की लड़ाई के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व सेनापति बैरम खान कर रहे थे। बैरम खान एक बहुत ही कुशल और अनुभवी सेनापति थे।
सरहिंद की इस लड़ाई में मुगल सेना ने सूरी सेना को पूरी तरह हरा दिया। इस जीत के साथ ही मुग़ल साम्राज्य की भारत में दोबारा वापसी का रास्ता साफ हो गया। हुमायूं बेहद खुश हुए।
इस बड़ी जीत का श्रेय हुमायूं ने अपने बेटे अकबर को भी दिया। हालांकि अकबर की उम्र उस समय बहुत ही कम थी। लेकिन उन्होंने युद्ध के मैदान में बहुत साहस दिखाया था।
![Mughal Empire Successor]()
दिल्ली की गद्दी पर दोबारा बैठने के बाद हुमायूं ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने साम्राज्य के सुरक्षित भविष्य के लिए अपने उत्तराधिकारी का चुनाव करना जरूरी समझा। इसके लिए उन्होंने एक बड़ा दरबार लगाया।
हुमायूं ने सबके सामने घोषणा की कि उनके बाद अकबर ही मुगल साम्राज्य का अगला राजा होगा। उन्होंने अकबर को आधिकारिक रूप से अपना मुख्य वारिस और उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
इस घोषणा के समय अकबर की उम्र केवल 12 वर्ष के आसपास थी। हुमायूं जानते थे कि अकबर के भीतर एक महान राजा बनने के सभी गुण मौजूद हैं। इसलिए उन्होंने यह साहसी कदम उठाया।
अकबर को पंजाब का गवर्नर भी नियुक्त किया गया था। उनकी मदद के लिए बैरम खान को उनका संरक्षक बनाया गया। बैरम खान को अकबर की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी।
![अकबर की आया और मुग़ल साम्राज्य की सबसे ताक़तवर महिला माहम अंगा का पतन कैसे हुआ - BBC News हिंदी]()
हुमायूं का यह फैसला मुग़ल इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस फैसले के कुछ ही महीनों बाद एक दुखद घटना घटी। साल 1556 के शुरुआती दिनों में हुमायूं की मृत्यु हो गई।
हुमायूं दिल्ली के अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिर गए थे। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनका निधन हो गया। अचानक मुग़ल साम्राज्य के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया।
चूंकि हुमायूं ने पहले ही अकबर को अपना वारिस घोषित कर दिया था। इस वजह से साम्राज्य के भीतर उत्तराधिकार को लेकर कोई बड़ा गृहयुद्ध नहीं छिड़ा। सभी ने अकबर को राजा मान लिया।
मात्र 13 वर्ष की उम्र में अकबर का राजतिलक कर दिया गया। बैरम खान के मार्गदर्शन में अकबर ने धीरे-धीरे सत्ता पर अपनी पकड़ बहुत मजबूत कर ली। उन्होंने साम्राज्य का विस्तार शुरू किया।
![63 दिन से लेकर 50 साल तक... जानिए किन मुगल शासकों ने लम्बे समय तक शासन किया | Story of Mughal Empire Who ruled for the longest duration and whose reign was the shortest]()
अगर हुमायूं ने साल 1555 में अकबर को वारिस न बनाया होता तो शायद कहानी कुछ और होती। मुगल परिवार के अन्य दावेदार गद्दी पर कब्जा करने की कोशिश कर सकते थे। इससे साम्राज्य कमजोर हो जाता।
हुमायूं के इस एक दूरदर्शी फैसले ने भारत को उसका सबसे प्रसिद्ध राजा दिया। आगे चलकरAkbarको अकबर महान के नाम से जाना गया। उन्होंने देश को एक सूत्र में बांधा।
अकबर ने अपने शासनकाल में धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सुधारों पर बहुत काम किया। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की सीख दी। साम्राज्य को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
इस प्रकार साल 1555 की वह घोषणा केवल एक राजशाही आदेश नहीं थी। वह आधुनिक भारत के निर्माण की एक बहुत मजबूत आधारशिला साबित हुई। इतिहास हमेशा इस फैसले को याद रखता है। (मुगल राज)
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 22 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 22 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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यह कहानी मुगल साम्राज्य के दूसरे शासक हुमायूं और उनके बेटे अकबर की है। हुमायूं का जीवन बहुत ही उतार-चढ़ाव से भरा हुआ रहा था। उन्हें अपने जीवन में कई सालों तक दर-दर भटकना पड़ा था।
शेरशाह सूरी से हारने के बाद हुमायूं को भारत छोड़कर भागना पड़ा था। लेकिन हुमायूं ने कभी भी वापस आने की अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। वे लगातार अपनी सेना को मजबूत करने में जुटे रहे। आइए जानें इसके पीछे की कहानी...
बीरबल से तानसेन तक...कौन-कौन थे अकबर के नवरत्न और ये करते क्या थे? | Mughal story of emperor akbar nine jewels who were in nine jewels and their functions
हुमायूं की वापसी और सरहिंद की जंग
इस जंग को इतिहास में सरहिंद की लड़ाई के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व सेनापति बैरम खान कर रहे थे। बैरम खान एक बहुत ही कुशल और अनुभवी सेनापति थे।
सरहिंद की इस लड़ाई में मुगल सेना ने सूरी सेना को पूरी तरह हरा दिया। इस जीत के साथ ही मुग़ल साम्राज्य की भारत में दोबारा वापसी का रास्ता साफ हो गया। हुमायूं बेहद खुश हुए।
इस बड़ी जीत का श्रेय हुमायूं ने अपने बेटे अकबर को भी दिया। हालांकि अकबर की उम्र उस समय बहुत ही कम थी। लेकिन उन्होंने युद्ध के मैदान में बहुत साहस दिखाया था।
Mughal Empire Successor
अकबर बने मुगल सल्तनत के नए वारिस
हुमायूं ने सबके सामने घोषणा की कि उनके बाद अकबर ही मुगल साम्राज्य का अगला राजा होगा। उन्होंने अकबर को आधिकारिक रूप से अपना मुख्य वारिस और उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
इस घोषणा के समय अकबर की उम्र केवल 12 वर्ष के आसपास थी। हुमायूं जानते थे कि अकबर के भीतर एक महान राजा बनने के सभी गुण मौजूद हैं। इसलिए उन्होंने यह साहसी कदम उठाया।
अकबर को पंजाब का गवर्नर भी नियुक्त किया गया था। उनकी मदद के लिए बैरम खान को उनका संरक्षक बनाया गया। बैरम खान को अकबर की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी।
अकबर की आया और मुग़ल साम्राज्य की सबसे ताक़तवर महिला माहम अंगा का पतन कैसे हुआ - BBC News हिंदी
फैसले से बदला पूरे भारत का इतिहास
हुमायूं दिल्ली के अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिर गए थे। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनका निधन हो गया। अचानक मुग़ल साम्राज्य के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया।
चूंकि हुमायूं ने पहले ही अकबर को अपना वारिस घोषित कर दिया था। इस वजह से साम्राज्य के भीतर उत्तराधिकार को लेकर कोई बड़ा गृहयुद्ध नहीं छिड़ा। सभी ने अकबर को राजा मान लिया।
मात्र 13 वर्ष की उम्र में अकबर का राजतिलक कर दिया गया। बैरम खान के मार्गदर्शन में अकबर ने धीरे-धीरे सत्ता पर अपनी पकड़ बहुत मजबूत कर ली। उन्होंने साम्राज्य का विस्तार शुरू किया।
63 दिन से लेकर 50 साल तक... जानिए किन मुगल शासकों ने लम्बे समय तक शासन किया | Story of Mughal Empire Who ruled for the longest duration and whose reign was the shortest
शहंशाह अकबर के महान सफर की शुरुआत
हुमायूं के इस एक दूरदर्शी फैसले ने भारत को उसका सबसे प्रसिद्ध राजा दिया। आगे चलकरAkbarको अकबर महान के नाम से जाना गया। उन्होंने देश को एक सूत्र में बांधा।
अकबर ने अपने शासनकाल में धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सुधारों पर बहुत काम किया। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की सीख दी। साम्राज्य को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
इस प्रकार साल 1555 की वह घोषणा केवल एक राजशाही आदेश नहीं थी। वह आधुनिक भारत के निर्माण की एक बहुत मजबूत आधारशिला साबित हुई। इतिहास हमेशा इस फैसले को याद रखता है। (मुगल राज)
22 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 22 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1555: मुग़ल सम्राट हुमायूं (मुगलकाल) ने अपने 12 वर्षीय पुत्र अकबर को आधिकारिक रूप से अपना वारिस घोषित किया था।
- 2002: ईरान में आए एक भीषण और विनाशकारी भूकंप में 500 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
- 2005: संयुक्त राष्ट्र द्वारा पूरे इराक देश को विश्व धरोहर (World Heritage) सूची में शामिल किया गया था।
- 2006: अमेरिका ने अपनी अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (Missile Defense System) का सफल परीक्षण किया था।
- 2007: भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपनी टीम के साथ सकुशल धरती पर वापस लौटी थीं।
- 2008: सैय्यद फ़क़ीर हुसैन को बालश्रम के केंद्रीय सलाहकार बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
- 2008: तेल उत्पादक देशों के संगठन 'ओपेक' (OPEC) ने कच्चे तेल की कीमत बढ़ाकर 137 डॉलर प्रति बैरल की थी।
- 2016: इसरो (ISRO) ने अंतरिक्ष में इतिहास रचते हुए एक साथ रिकॉर्ड 20 उपग्रहों (Satellites) को लॉन्च किया था।
- 1900: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और क्रांतिकारी गणेश घोष का जन्म हुआ था।
- 1932: भारतीय सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध और दिग्गज अभिनेता व खलनायक अमरीश पुरी का जन्म हुआ था।
- 1950: भारतीय सिनेमा और थिएटर के बेहतरीन अभिनेता टॉम अल्टर का जन्म हुआ था।
- 1985: वाई. एस. आर. कांग्रेस पार्टी के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ मद्दीला गुरुमूर्ति का जन्म हुआ था।
- 1985: भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की पूर्व कप्तान और स्टार खिलाड़ी अनीता पौलदुरई का जन्म हुआ था।
- 1932: भारत के प्रसिद्ध और आधुनिक काल के श्रेष्ठ कवियों में गिने जाने वाले जगन्नाथदास 'रत्नाकर' का निधन हुआ था।
- 1988: प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान, समाज सुधारक, लेखक और पालि भाषा के मूर्धन्य विद्वान भदन्त आनन्द कौसल्यायन का निधन हुआ था।
- 1994: भारतीय सिनेमा के सफल फ़िल्मकार, दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता निर्माता-निर्देशक और अभिनेता एल. वी. प्रसाद का निधन हुआ था।
- 2000: हिंदी साहित्य की प्रगतिशील काव्य-धारा के एक प्रमुख और बेहद लोकप्रिय कवि केदारनाथ अग्रवाल का निधन हुआ था।
- 2005: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और कई राज्यों के पूर्व राज्यपाल सुन्दर सिंह भण्डारी का निधन हुआ था।
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आज का इतिहास: Cuban Missile Crisis 1962, जब दुनिया परमाणु युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर थी
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