28 मार्च का इतिहास: औरंगजेब का पतन और मराठों का उत्थान, भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा मोड़
Kaushiki | Mar 28, 2026, 08:00 IST
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छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और पेशवा बाजीराव की दिल्ली विजय की रोमांचक कहानी। जानिए कैसे मुगलों को हराकर मराठों ने अपना परचम लहराया।
आज के दिन की कहानी: तारीख 28 मार्च 1737, दिल्ली की सल्तनत पर खौफ का साया था। मुगल बादशाह मोहम्मद शाह के माथे पर पसीना। वजह थी महल से महज चार कोस दूर तालकटोरा के मैदान में गूंजती मराठा घोड़ों की टापें।
बाजीराव प्रथम अपनी 50 हजार की घुड़सवार सेना के साथ दिल्ली की दहलीज पर खड़े थे। यह पहली बार था जब किसी दक्षिण भारतीय ताकत ने मुगलों की राजधानी को सीधे चुनौती दी थी। बाजीराव का एक संदेश और मुगलों का पूरा गुरूर मिट्टी में मिल सकता था।
भारतीय इतिहास में मराठा साम्राज्य का नाम वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है। इस साम्राज्य की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने बहुत ही कठिन समय में रखी थी।
उनके बाद पेशवाओं ने इस भगवे ध्वज को दिल्ली के लाल किले तक पहुंचाया। आइए इतिहासकारों के मुताबिक, आज हम इसी गौरवशाली सफर की पूरी कहानी विस्तार से यहां समझेंगे।
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साल 1630 में शिवनेर के किले में जीजाबाई ने एक बालक को जन्म दिया। इस बालक का नाम शिवाजी रखा गया, जो आगे चलकर महान छत्रपति बने। शिवाजी के पिता शाहजी राजे निजाम के यहां एक छोटे जागीरदार हुआ करते थे।
माता जीजाबाई और गुरु दादोजी कोंडदेव ने शिवाजी को युद्ध कला सिखाई थी। महज 16 साल की उम्र में शिवाजी ने तोरण का किला जीत लिया था।
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बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी को रोकने के लिए अफजल खान को भेजा था। अफजल खान सात फुट लंबा और बहुत ही क्रूर सेनापति माना जाता था।
10 नवंबर 1659 को प्रतापगढ़ के पास दोनों की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। अफजल ने शिवाजी को धोखे से मारना चाहा, पर शिवाजी तैयार बैठे थे। शिवाजी ने बाघनख से अफजल का पेट फाड़कर उसका वहीं अंत कर दिया।
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मुगलकाल में मुगल शासक औरंगजेब ने शिवाजी को हराने के लिए राजा जय सिंह को भेजा। पुरंदर की संधि के बाद शिवाजी को आगरा के दरबार में जाना पड़ा। वहां अपमानित होने के बाद शिवाजी को नजरबंद कर दिया गया था।
20 अगस्त 1666 को शिवाजी फलों की टोकरी में छिपकर वहां से भाग निकले। इस साहसी कदम ने मुगलों की नाक के नीचे से उन्हें निकाल लिया।
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शिवाजी के बाद पेशवा बाजीराव प्रथम ने मराठा साम्राज्य की कमान संभाली थी। बाजीराव ने अपने जीवन में 41 लड़ाइयां लड़ीं और सभी में जीत हासिल की।
28 मार्च 1737 को बाजीराव अपनी सेना लेकर दिल्ली के करीब पहुंच गए थे। मुगल बादशाह मुहम्मद शाह डर के मारे यमुना के रास्ते भागने की तैयारी में था। बाजीराव ने दिल्ली को लूटा नहीं, बल्कि मराठों की ताकत का अहसास कराया।
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बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल को मुगलों से बचाने के लिए बाजीराव वहां पहुंचे थे। जीत के बाद राजा छत्रसाल ने बाजीराव को अपनी बेटी मस्तानी भेंट की।
बाजीराव और मस्तानी का प्रेम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया। बाजीराव एक ऐसे सेनापति थे जो घोड़े पर ही सोते और जागते थे। उनकी बिजली जैसी फुर्ती ने बड़े-बड़े मुगल गवर्नरों के पसीने छुड़ा दिए थे।
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पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठों को अहमद शाह अब्दाली से हार मिली। इस युद्ध में हजारों मराठा योद्धा मारे गए, जिससे साम्राज्य कमजोर पड़ गया।
बाद में पेशवाओं के आपसी झगड़ों का फायदा उठाकर अंग्रेजों ने दखल देना शुरू किया। 1818 में अंग्रेजों ने अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय को हराकर पेशवाई खत्म कर दी।
इस तरह भारत के एक महान साम्राज्य का अंत अंग्रेजों के हाथों हुआ। मराठा साम्राज्य का इतिहास शून्य से शिखर तक पहुंचने और फिर बिखरने की एक ऐसी गाथा है, जो आज भी हमें अपनी मिट्टी के प्रति मर-मिटने की प्रेरणा देती है।
शिवाजी महाराज की कूटनीति और पेशवाओं के पराक्रम ने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़कर पूरे भारत में भगवा परचम लहराया था। भले ही अपनों की गद्दारी और अंग्रेजों की चालों ने इस साम्राज्य का अंत कर दिया। लेकिन मराठा योद्धाओं का शौर्य भारतीय इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगा।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 28 मार्च का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 28 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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बाजीराव प्रथम अपनी 50 हजार की घुड़सवार सेना के साथ दिल्ली की दहलीज पर खड़े थे। यह पहली बार था जब किसी दक्षिण भारतीय ताकत ने मुगलों की राजधानी को सीधे चुनौती दी थी। बाजीराव का एक संदेश और मुगलों का पूरा गुरूर मिट्टी में मिल सकता था।
भारतीय इतिहास में मराठा साम्राज्य का नाम वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है। इस साम्राज्य की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने बहुत ही कठिन समय में रखी थी।
उनके बाद पेशवाओं ने इस भगवे ध्वज को दिल्ली के लाल किले तक पहुंचाया। आइए इतिहासकारों के मुताबिक, आज हम इसी गौरवशाली सफर की पूरी कहानी विस्तार से यहां समझेंगे।
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शिवाजी महाराज का जन्म और स्वराज का सपना
माता जीजाबाई और गुरु दादोजी कोंडदेव ने शिवाजी को युद्ध कला सिखाई थी। महज 16 साल की उम्र में शिवाजी ने तोरण का किला जीत लिया था।
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अफजल खान का अंत
10 नवंबर 1659 को प्रतापगढ़ के पास दोनों की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। अफजल ने शिवाजी को धोखे से मारना चाहा, पर शिवाजी तैयार बैठे थे। शिवाजी ने बाघनख से अफजल का पेट फाड़कर उसका वहीं अंत कर दिया।
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औरंगजेब की कैद से शिवाजी की साहसी फरारी
20 अगस्त 1666 को शिवाजी फलों की टोकरी में छिपकर वहां से भाग निकले। इस साहसी कदम ने मुगलों की नाक के नीचे से उन्हें निकाल लिया।
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वो अजेय योद्धा जिसने दिल्ली को हिलाया
28 मार्च 1737 को बाजीराव अपनी सेना लेकर दिल्ली के करीब पहुंच गए थे। मुगल बादशाह मुहम्मद शाह डर के मारे यमुना के रास्ते भागने की तैयारी में था। बाजीराव ने दिल्ली को लूटा नहीं, बल्कि मराठों की ताकत का अहसास कराया।
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बाजीराव-मस्तानी की प्रेम कहानी
बाजीराव और मस्तानी का प्रेम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया। बाजीराव एक ऐसे सेनापति थे जो घोड़े पर ही सोते और जागते थे। उनकी बिजली जैसी फुर्ती ने बड़े-बड़े मुगल गवर्नरों के पसीने छुड़ा दिए थे।
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अंग्रेजों का भारत पर कब्जा
बाद में पेशवाओं के आपसी झगड़ों का फायदा उठाकर अंग्रेजों ने दखल देना शुरू किया। 1818 में अंग्रेजों ने अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय को हराकर पेशवाई खत्म कर दी।
इस तरह भारत के एक महान साम्राज्य का अंत अंग्रेजों के हाथों हुआ। मराठा साम्राज्य का इतिहास शून्य से शिखर तक पहुंचने और फिर बिखरने की एक ऐसी गाथा है, जो आज भी हमें अपनी मिट्टी के प्रति मर-मिटने की प्रेरणा देती है।
शिवाजी महाराज की कूटनीति और पेशवाओं के पराक्रम ने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़कर पूरे भारत में भगवा परचम लहराया था। भले ही अपनों की गद्दारी और अंग्रेजों की चालों ने इस साम्राज्य का अंत कर दिया। लेकिन मराठा योद्धाओं का शौर्य भारतीय इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगा।
Reference Links
- Encyclopedia Britannica - Shivaji
- National Archives of India - Maratha Records
- UNESCO World Heritage - Chhatrapati Shivaji Terminus (History Context)
- Official Maharashtra Tourism - Forts of Maharashtra
28 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 28 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1736: महान ब्रिटिश आविष्कारक जेम्स वाट का जन्म उत्तरी इंग्लैंड के ग्रीनीक नगर में हुआ।
- 1737: मराठा साम्राज्य और मुगल साम्राज्य के बीच दिल्ली का पहला युद्ध हुआ।
- 1738: स्पेन से निपटने की मांग को लेकर ब्रिटिश संसद ने 'जेनकिन के एअर' युद्ध का अनुरोध किया।
- 1802: जर्मन खगोलशास्त्री हेनरिक ओल्बर्स ने दूसरे ज्ञात क्षुद्रग्रह '2 पल्लास' की खोज की।
- 1806: पेंसिल्वेनिया में वाशिंगटन कॉलेज (अब वाशिंगटन और जेफरसन कॉलेज) की स्थापना हुई।
- 1809: मेडलिन के भीषण युद्ध में फ्रांसीसी सेना के हाथों स्पेन की करारी हार हुई।
- 1862: अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान 'ग्लोरीटा पास' की लड़ाई में कॉन्फेडरेट सेना को रोका गया।
- 1866: दुनिया की पहली एम्बुलेंस को आधिकारिक तौर पर सेवा के लिए तैयार किया गया।
- 1891: दुनिया की पहली भारोत्तोलन (Weightlifting) चैम्पियनशिप का सफल आयोजन हुआ।
- 1910: हेनरी फाबरे ने फ्रांस में पहला समुद्री जहाज (Seaplane) उड़ाया जो पानी से उड़ान भर सका।
- 1920: अमेरिका के मिडवेस्टर्न और दक्षिणी इलाकों में 37 बवंडर आने से 380 से ज्यादा मौतें हुईं।
- 1922: अमेरिकी आविष्कारक ब्रेडली ए. फिस्के ने माइक्रोफिल्म पठन यंत्र का पेटेंट हासिल किया।
- 193: प्रेटोरियन गार्ड्स ने रोमन सम्राट पर्टिनैक्स की हत्या कर सिंहासन नीलामी में बेच दिया।
- 1930: तुर्की ने अपनी राजधानी अंगोरा का नाम अंकारा और कॉन्स्टेंटिनोपल का नाम इस्तांबुल रखा।
- 1933: 'सिटी ऑफ लिवरपूल' विमान में यात्री द्वारा आग लगाने से वह हवा में ही दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
- 1942: द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश नौसेना ने फ्रांस के सेंट-नाज़ायर बंदरगाह को निष्क्रिय करने की कोशिश की।
- 1949: संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा सचिव जेम्स फोरेस्टल ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दिया।
- 1959: चीन ने तिब्बत की सरकार को भंग कर पांचेन लामा को सत्ता पर बैठा दिया।
- 1962: सीरिया में सैन्य विद्रोह होने के बाद राष्ट्रपति नाजिम अल-कुद्सी देश छोड़कर भाग निकले।
- 1965: मार्टिन लूथर किंग ने अश्वेतों के अधिकारों के लिए 25 हजार लोगों के साथ मार्च निकाला।
- 1979: हैरिसबर्ग के 'थ्री माइल आइलैंड' परमाणु स्टेशन में भीषण रेडियोधर्मी रिसाव की घटना हुई।
- 1979: ब्रिटिश पीएम जेम्स कैलाघन ने हाउस ऑफ कॉमन्स में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हार का सामना किया।
- 1981: इंडोनेशियाई आतंकवादियों ने बैंकॉक (थाईलैंड) में एक यात्री विमान का अपहरण कर लिया।
- 1996: न्यूयॉर्क के वाल्टर केर थिएटर में प्रसिद्ध नाटक 'सेवन गिटार' का मंचन शुरू हुआ।
- 1996: ओक्लाहोमा की 17 वर्षीय केटी बीम को 35वीं मिस टीनएज अमेरिका चुना गया।
- 1999: विनस विलियम्स ने अपनी बहन सेरेना को हराकर लिप्टन कप जीतकर इतिहास रचा।
- 1999: सर्बियाई पुलिस ने कोसोवो के इज़बिका गाँव में 89 कोसोवो अल्बानियाई लोगों की हत्या कर दी।
- 2003: इराक आक्रमण के दौरान अमेरिकी विमानों ने गलती से ब्रिटिश सैनिकों पर हमला कर दिया।
- 2005: इंडोनेशिया के सुमात्रा में 8.7 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जो इतिहास के सबसे बड़े भूकंपों में से एक था।
- 2010: कांगो में लॉर्ड रेसिस्टेंस आर्मी द्वारा किए गए नरसंहार में बच्चों सहित 321 लोग मारे गए।
- 2011: फुकुशिमा परमाणु रिसाव के बाद परमाणु सुरक्षा पर चर्चा के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन हुआ।
- 2012: अमेरिका के 'मेगा मिलियन जैकपॉट' की राशि 500 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची।
- 2013: दुनिया भर में इंटरनेट पर सबसे बड़ा हमला हुआ, जिससे इंटरनेट की रफ्तार बेहद धीमी हो गई।
- 2013: संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने पारंपरिक हथियारों के व्यापार को नियंत्रित करने वाली संधि पर चर्चा की।
- 2013: रूस ने नाटो को सूचना दिए बिना काला सागर (Black Sea) में अचानक सैन्य अभ्यास शुरू किया।
- 2014: दक्षिण कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स क्षेत्र में 5.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया।
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