महिला–ओबीसी आरक्षण और परिसीमन: भारतीय राजनीति की अगली बड़ी करवट
Pawan Modiya | May 06, 2026, 20:16 IST
लेखक रविंद्र दुबे वरिष्ठ पत्रकार हैं
भारतीय राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। महिला–ओबीसी आरक्षण और आगामी परिसीमन (Delimitation) सिर्फ सीटों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह सत्ता के सामाजिक समीकरणों को नई दिशा देने वाले कदम साबित हो सकते हैं।
असम में 19 सीट जीतने वाली कांग्रेस के 18 विधायक मुसलमान हैं... क्यों..? 2026 में हुए 5 राज्यों के चुनाव देश के इतिहास में सबसे भिन्न हैं। यह सिर्फ जीत-हार के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि देश के चुनाव और उसके मुद्दों का संवैधानिक तरीके से फिक्स कर दिया गया है। जो काम आजाद भारत के पहले अंग्रेज करना चाहते थे, वह अब हो गया है। अब मतदाता हिन्दू और मुसलमान हो गया है। पहले उनकी मानसिकता पर कब्जा किया गया और अब क्षेत्र भी बांटे जा चुके हैं।
असम में 22 मुस्लिम चेहरे विधानसभा में पहुंचे हैं। 1 टीएमसी से और 3 अन्य दल से हैं। जिन 18 सीट पर कांग्रेस जीती है, उसका प्रतिद्वंदी भी मुसलमान है, लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी का नहीं है। उसे भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद के कोटे में दी हैं। उसने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और 10 सीट जीतीं, वह भी हिंदू मतदाताओं के सहारे। भाजपा की एक और सहयोगी बोडो लैंड पीपुल्स फ्रंट उसने भी 10 सीट जीती हैं। भाजपा औऱ उसके सहयोगी दल को अगस्त 2023 में हुए परिसीमन का लाभ मिला है। अनुसूचित जाति के लिए 9 और अनुसूचित जनजाति के 19 सीट आरक्षित हैं। जिसमें भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। जीत का अंतर भी 15-20 हजार से ज्यादा है।
कांग्रेस को असम में बड़ी हार का सामना करना पड़ा। उसके मुख्यमंत्री के चेहरे गौरव गगोई भी 23 हजार से ज्यादा वोट से हार गए। असम के परिणाम बता रहे हैं कि अगला परिसीमन जल्द होगा। देशभर में मुस्लिम आबादी को एक स्थान पर करके उनको ही नेतृत्व दिया जाएगा। उनके वोट से जीतने वाले हिंदू नहीं होंगे। जीतने औऱ हारने वाला मुस्लिम ही होगा, जैसा असम में हुआ है।
सर्वविदित है हाल ही में महिला आरक्षण बिल के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र की संख्या बढ़ाने और परिसीमन का प्रयास भी चुनाव के दौरान हुआ था। अब फिर से परिसीमन का प्रस्ताव आएगा यह संभव लग रहा है। वैसे तो अंतिम परिसीमन 2002 में हुआ था। तब भी 2001 की जनगणना का मुद्दा बना था। अब भी 2026 की जनगणना को मुद्दा बनाया जा रहा है। 2011 की जनगणना के आधार परिसीमन होने से जातिगत जनगणना के वास्तविक आंकड़े संदेहास्पद हैं क्योंकि जाति औऱ उपजाति के सरकारी आंकड़ों से 2011 की जनगणना के आंकड़े मेल नहीं खा रहे थे इसलिए उनको दूषित मानकर सार्वजनिक नहीं किया गया था।
महिला और
हाल ही में फिर से जातिगत जनगणना हो रही 2027 तक आंकड़े आने के बाद परिसीमन संभव होगा तो महिला आरक्षण के साथ ओबीसी आरक्षण की मांग तेज होगी। यानी जिस तरह से मुस्लिम सीट होंगी उसी तरह से अगड़ा पिछड़ा औऱ महिला सीट के आधार पर परिसीमन होगा, जो सुनिश्चित भारतीय राजनीति की दिशा औऱ दशा बदलने वाला होगा। एससी व एसटी निर्वाचन सीट का आरक्षण भी अनुमति आंकड़ों पर दिया जा रहा है 2027 के आंकड़ों के आधार पर जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी की मांग तेज होगी।
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भाजपा को अगस्त 2023 के परिसीमन का लाभ मिला
क्या जल्द होगा अगला परिसीमन ?
जातिगत जनगणना के आंकड़े संदेहास्पद
महिला और ओबीसी आरक्षण की मांग तेज होगी
नोट- इस लेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र दुबे हैं। इस लेख में उनके निजी विचार दिए गए हैं।
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