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टाइम्स मैगजीन ने मुझे 2025 के AI आर्किटेक्ट्स में शामिल किया है। मुझे गर्व है कि भारतीय मूल के एक नेता के तौर पर मैं उपभोक्ता AI को आकार देने में भूमिका निभा रहा हूं।
जब मैं दिल्ली की AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) समिट में बोल रहा था, तो मैंने यह महसूस किया कि AI न केवल एक तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह हमारी दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में यह हमारे स्क्रीन पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा, न कि बढ़ाएगा।
माता-पिता के तौर पर AI का उपयोग
हाल ही में मैंने एक साक्षात्कार में कहा था कि मेरी छह साल की बेटी भी Character.AI का उपयोग करती है। यह देखकर बहुत अजीब लगता है कि इतनी छोटी उम्र में कोई AI का इतना स्वाभाविक रूप से उपयोग करता है।
हालांकि, मैं हमेशा उसके AI उपयोग पर ध्यान रखता हूं और सुनिश्चित करता हूं कि वह इसका सही उपयोग कर रही है। जब वह इसका इस्तेमाल करती है, तो मैं उसकी देखरेख करता हूं। यह समय की मांग है, और हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमारी अगली पीढ़ी AI के साथ बढ़ रही है।
किशोरों की सुरक्षा और AI का जिम्मेदार उपयोग
जब मैंने Character.AI की लीडरशिप संभाली, तो हमें बच्चों और किशोरों के सुरक्षा संबंधी सवालों का सामना करना पड़ा। कुछ चैटबॉट्स के नाम जैसे ‘Bestie Epstein’ का मुद्दा भी सामने आया था, जिसे बाद में हमने प्रतिबंधित किया।
इस अनुभव ने हमें यह सिखाया कि हमें AI का जिम्मेदारी से निर्माण करना चाहिए। इसलिए हमने आयु पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपयोगकर्ता अपनी सही उम्र बताएं।
यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष से कम है, तो वह खुले तौर पर चैट नहीं कर सकता, बल्कि वह अपनी पसंदीदा कहानियां देख सकता है। साथ ही, हम सुनिश्चित करते हैं कि विवादास्पद या प्रतिबंधित कंटेंट ऑटोमेटिक तरीके से पता चल जाए।
हमारा मानना है कि AI की सुरक्षा के लिए जो मानक हमने सेट किए हैं, वही पूरे उद्योग के लिए एक उदाहरण बन सकते हैं। मेटा, रोबॉक्स, और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म भी इस दिशा में कदम उठा रहे हैं, और मुझे गर्व है कि हम AI सुरक्षा के इस मानक को स्थापित करने में अग्रणी रहे हैं।
AI और सोशल मीडिया: क्या समानता होनी चाहिए?
कई देशों में, भारत समेत, सोशल मीडिया पर आयु-आधारित प्रतिबंधों पर चर्चा हो रही है। AI का उपयोग केवल सोशल मीडिया बनाने के लिए नहीं, बल्कि गणित ट्यूटर, भाषा ट्यूटर, रोलप्ले ऐप्स, और अन्य कई तरीकों से किया जा सकता है।
ऐसे में केवल रेगुलेटर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं हो सकती। प्रौद्योगिकी कंपनियों को इस दिशा में काम करना होगा, और हमें यह समझाना होगा कि कैसे AI गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए हमें रेगुलेटर्स, टेक कंपनियों और माता-पिता के बीच साझेदारी की जरूरत है। माता-पिता को भी यह समझना चाहिए कि वे अपने बच्चों के लिए AI का उपयोग कैसे नियंत्रित करें।
भारत में AI का उपयोग
हमारे पास लगभग 20 मिलियन मंथली यूजर हैं, और इनमें से अधिकतर भारतीय हैं। यह दिखाता है कि AI-संचालित मनोरंजन, रोलप्ले, और अन्य उपयोगों की आवश्यकता भारत में बहुत ज्यादा है।
हालांकि शुरुआत में यह सिर्फ एक नवाचार या मनोरंजन का रूप लग सकता है, लेकिन यह धीरे-धीरे गहरे उपयोग में बदल रहा है, जैसे गेमिंग, दोस्ती, और अन्य गतिविधियां…
AI का अत्यधिक उपयोग: सुरक्षा उपाय
जैसा कि हमने देखा है, AI का अत्यधिक उपयोग भी वयस्कों के लिए एक समस्या बन सकता है। विशेषकर जब यह हिंसा, आत्म-नुकसान, या यौन विषयों से जुड़ा होता है, तो कड़ी मॉडरेशन की जरूरत होती है।
हमारे प्लेटफॉर्म पर, हम रोमांटिक बातचीत की अनुमति देते हैं, लेकिन सेक्सुअल बातचीत को नहीं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हिंसा या नकारात्मक सामग्री का कोई प्रसार न हो। बिना कड़े मॉडरेशन के, AI की इस शक्ति को बढ़ाना सही नहीं होगा।
AI में नवाचार और प्रगति
एक समय था जब चैटबॉट्स के लिए लंबी टेक्स्ट टाइप करनी पड़ती थी, लेकिन अब आवाज, प्राकृतिक भाषा और बहुभाषी बॉट्स ने AI को बेहद सुलभ बना दिया है। अब मेरी मां पंजाबी में AI से बात कर सकती हैं।
इस तकनीक के विकास के साथ, भारत को इसमें अग्रणी बनने का अवसर प्राप्त है। हमें अब AI का उपयोग केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि हमें इसे आवाज और बैकग्राउंड उपकरणों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की दिशा में भी सोचना चाहिए।
भारत और AI की महत्वाकांक्षाएं
भारत में पहला बड़ा AI सम्मेलन खत्म होने के बाद, मैं यह महसूस करता हूं कि AI की दौड़ में भारत की जगह अहम होनी चाहिए। AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन जैसी बड़ी ताकतें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
अब समय आ गया है कि भारत अपने कदम तेजी से बढ़ाए। बेशक, हम थोड़े देरी से शुरुआत कर रहे हैं क्योंकि हमें इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी स्टैक को ठीक से स्थापित करना है।
हाल ही में हुए AI सम्मेलन में मिली प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय समाज इस बदलाव के लिए तैयार है। यह उत्साह हमें दिखाता है कि AI को लेकर भारतीयों में गहरी रुचि है।
निष्कर्ष
भारत को AI के क्षेत्र में दुनिया के सामने एक मजबूत खड़ा होना है। यह न केवल हमारे देश के लिए एक विकास अवसर है, बल्कि पूरी दुनिया को दिखाने का समय है कि भारत इस क्षेत्र में भी नेतृत्व कर सकता है। AI का भविष्य केवल एक नई तकनीकी नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली का हिस्सा बनने जा रहा है, और हमें इसे जिम्मेदारी से स्वीकार करना होगा।
Character.AI एक AI चैटबॉट प्लेटफॉर्म है जो यूजर्स को कस्टमाइज्ड वर्चुअल कैरेक्टर्स के साथ बातचीत करने की सुविधा देता है। यह प्लेटफॉर्म काल्पनिक या रियल व्यक्तियों पर आधारित AI पर्सनालिटी बनाता है। जहां यूजर्स चैट, टेक्स्ट एडवेंचर गेम्स खेल सकते हैं या कई लोगों के साथ ग्रुप चैट कर सकते हैं। यह 2021 में Noam Shazeer और Daniel De Freitas द्वारा स्थापित किया गया था, जो पूर्व Google LaMDA डेवलपर्स हैं।
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