रानी अहिल्याबाई होलकर : एक आदर्श शासिका और भारतीय संस्कृति की संरक्षिका
Dolly patil | Sept 01, 2024, 14:05 IST
विचार-मंथन
रानी अहिल्याबाई होलकर का नाम भारतीय इतिहास के उन महानतम युगों में आता है, जब एक नारी अपने अद्वितीय साहस, त्याग, और पराक्रम के बल पर न केवल अपने राज्य को सुदृढ़ कर रही थी।
लेखक- डॉ. मोहन यादव
लोकमाता देवी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिए आदर्श हैं। वह एक तपोनिष्ठ, धर्मनिष्ठ तथा कर्मनिष्ठ शासिका और प्रशासिका रही हैं। उनके कार्यकाल में न केवल मालवा के साम्राज्य को सुरक्षित और समृद्ध किया गया, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए जो अपार योगदान दिया गया, वह अद्वितीय है। उनके शासनकाल में अनेक मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ और धार्मिक स्थलों की मरम्मत की गई, जो आज भी उनके श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक के रूप में खड़े हैं।
देवी अहिल्याबाई का जीवन हमें सिखाता है कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है। उन्होंने धर्म के साथ शासन व्यवस्था चलाने का एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका मुख्य ध्येय था कि उनकी प्रजा कभी भी अभावग्रस्त और भूखी नहीं रहे। उनके सुशासन की यशोगाथा पूरे देश में प्रसिद्ध है। उनके द्वारा शिव पूजा के क्षेत्र में किए गए कार्य आज भी पूरे देश में एक बेहतर उदाहरण के रूप में माने जाते हैं।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई के पुण्य प्रताप से मालवा सहित पूरा प्रदेश खुशहाल रहा। वे एक बेहतर प्रशासिका और शासिका थीं, जिनमें कार्ययोजना बनाकर उसे अमल में लाने की अद्भुत क्षमता थी। ईमानदार, धर्मनिष्ठ और राजयोगी होने के नाते उन्होंने हर संकट का साहसपूर्वक सामना किया और उसे जनसेवा में बाधा नहीं बनने दिया। उनका पूरा जीवन और कार्य प्रजा को सुखी रखने के लिए समर्पित थे। वे अपने आप को प्रजा के प्रति उत्तरदायी मानती थीं और हर काम ईश्वर से प्रेरित होकर करती थीं। उनकी न्यायप्रियता के किस्से आज भी जगजाहिर हैं।
आज जब हम रानी अहिल्याबाई होलकर की महानता का स्मरण करते हैं, तो हमारा हृदय गर्व और श्रद्धा से भर जाता है। उनकी जीवन यात्रा न केवल हमें प्रेरित करती है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि सच्चा नेतृत्व कैसा होता है। उनके बलिदान, उनके पराक्रम और उनके पुरुषार्थ को मैं शत-शत नमन करता हूँ।
रानी अहिल्याबाई का जीवन और उनकी गाथा सदैव हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनकी पुण्य स्मृति में, हम सभी को उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए और समाज के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।
जय अहिल्या माँ!
डॉ. मोहन यादव
( लेखक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं )
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