बोल हरि बोल: खाकी वाले साहब का गजब का नजराना, कांग्रेस में वो इस्तीफा और कौन बनेगा भोपाल का सरताज?
Harish Divekar | Feb 22, 2026, 12:06 IST
bol hari bol 22 february 2026 journalist harish divekar bhopal
मध्यप्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में नजराने और 'नए सरताज' की चर्चा जोरों पर है। पुलिस अफसरों की कार्यशैली से लेकर कांग्रेस के आंतरिक घमासान तक हर खबर एक नया संकेत दे रही है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
BHOPAL. सत्ता के गलियारों में सच फुसफुसाहटों में मिलता है। जहां सलाम में संकेत होते हैं और मुस्कान में संदेश छिपे होते हैं। हम लाते हैं वही किस्से, जो नोटशीट पर नहीं, नोटों की शीट पर लिखे जाते हैं।
सत्ता के गलियारों में सब कुछ दिखता नहीं, पर सब कुछ चलता जरूर है। कहीं रिश्वत नजराना बन जाती है, कहीं पसंद की पोस्टिंग चौंकाने वाला फैसला कहलाती है।
बाकी… फाइलें तो चुप रहती हैं, पर खबरें बोलती हैं। भूमिका बहुत हो गई। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
![55eb18a2-ac1]()
मालवा-निमाड़ में बड़े ओहदे पर रहे खाकी वाले साहब का अंदाज निराला है। छोटा पैसा सामने आ जाए तो साहब के भीतर का धर्म जाग उठता है और बड़ी रकम आते ही वही धर्म दरियादिली में बदल जाता है।
कहानी कुछ ऐसी है कि एक थानेदार ने किसी बड़ी डील में 25 लाख की कमाई कर ली। खबर बड़े साहब तक पहुंची तो तुरंत थानेदार को हाजिर कर लिया। थानेदार समझ गया कि साहब की तरफ से बुलावा यूं ही नहीं आया है।
कमरे में दाखिल होते ही सलाम ठोंका और चुपचाप 5 लाख मेज पर रख दिए। साहब का पारा चढ़ गया, "रिश्वत देते हो? हिम्मत कैसे हुई?" तुरंत आदेश दिया कि "इसे कमरे में बंद करो।" थानेदार भी कम घुटा हुआ नहीं था।
हाथ जोड़कर बोला, "सर, गलत समझ रहे हैं। अभी जल्दी में 5 ही ला पाया हूं। 10 लाख और रास्ते में हैं। ये तो आपका नजराना है।" बस… फिर क्या था माहौल बदल गया। साहब की त्योरियां ढीली पड़ीं और चेहरे पर मुस्कान आ गई। समझाइश का दौर शुरू हुआ।
साहब बोले, "देखो ईमानदारी से ड्यूटी करना चाहिए।" सूत्र बताते हैं कि थानेदार की कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा ऊपर चला गया और अब वो ढिंढोरा पीट रहा है कि साहब को छोटा माल रिश्वत लगता है, बड़ा माल नजराना।
क्या
![6efb26a0-905]()
प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है। बड़े साहब ने भोपाल कलेक्टर के लिए मन ही मन एक नाम तय कर रखा है। अब देखना यह है कि सूबे के मुखिया उसी अंदाज में चौंकाएंगे या नहीं, जैसे भोपाल पुलिस कमिश्नर की पोस्टिंग में किया था।
आपको बता दें कि कमिश्नर पद के लिए पीएचक्यू ने दो नाम आगे बढ़ाए थे, लेकिन सूबे के मुखिया ने उन्हें देखा तक नहीं। सीधे आईपीएस ग्रेडेशन लिस्ट उठाई और ऐसा नाम चुन लिया, जो न किसी गुट का, न किसी विवाद का।
अब सवाल यही है कि क्या कलेक्टरी में भी वही आउट ऑफ द कोर्स तड़का लगेगा या फिर बड़े साहब की पसंद पर मुहर लगेगी? फैसला भोपाल की कुर्सी का होगा और संदेश पूरे सूबे में जाएगा।
![90fba8f0-562]()
अजाक्स संगठन दो फाड़ हो चुका है। एक तरफ संतोष वर्मा विवादों के घेरे में हैं। दूसरी तरफ मुकेश मौर्य पर आईएएस न होने का असर है। इस बीच सियासी शतरंज पर एक सीनियर आईएएस ने चुपचाप चाल चल दी है। वे गुपचुप तरीके से एससी-एसटी अधिकारियों को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटे हैं।
साहब का मानना है कि सरकार में बड़ा पद चाहिए तो अपने समाज की ताकत दिखानी होगी। लंबे समय तक मेनस्ट्रीम से बाहर रहे यह साहब इन दिनों अच्छी पोस्टिंग पर हैं। अब वे नेटवर्किंग की बिसात बिछा रहे हैं। देखना है कि यह सामाजिक एकजुटता सत्ता की सीढ़ी बनती है या नई खेमेबाजी की शुरुआत होगी।
![bee33f68-f33]()
उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा महज संगठनात्मक फेरबदल नहीं है। यह उस खामोश टकराव का नतीजा है, जो महीनों से आकार ले रहा था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का रवैया कई लोगों को अखर रहा था।
विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के लिए विधायकों के नाम तय करने का मामला चिंगारी बन गया। कटारे के सुझाए नामों को सिरे से खारिज कर दिया गया। राजनीति में मतभेद सामान्य हैं, लेकिन जब संवाद की जगह संदेश देने की शैली हावी हो जाए तो पद औपचारिक रह जाता है।
सम्मान नहीं कटारे ने पद छोड़ा है, पर असली सवाल यह है कि क्या वे चुप बैठेंगे? राजनीति में अपमान की याददाश्त लंबी होती है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस में इन दिनों एक अनौपचारिक स्पर्धा भी जारी है। दिल्ली में किसकी सुनवाई ज्यादा है? जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बीच मतभेद अब पर्दे के पीछे नहीं रहे। दोनों खेमे अपने-अपने दावों के साथ सक्रिय हैं।
24 को राहुल गांधी भोपाल आ रहे हैं। अब सवाल यह नहीं कि मंच पर कौन बैठेगा, सवाल यह है कि मंच के पीछे कौन किसके साथ खड़ा होगा। क्योंकि दिल्ली संदेश पढ़ती है और संकेतों की भाषा समझती है।
अगर खेमेबाजी की रेखाएं स्पष्ट रहीं तो आंदोलन की धार कमजोर पड़ सकती है। यदि मंच पर एकता दिखी तो वह भी अस्थायी युद्धविराम हो सकता है। यह दौड़ निकटता की नहीं, नियंत्रण की है।
![cce39b9a-08d]()
कमलनाथ का भोपाल प्रवास अपने आप में एक संदेश बन जाता है। उनके पास औपचारिक रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से अभी भी वे केंद्र में रहते हैं। उनके बंगले पर जुटती भीड़ बताती है कि प्रदेश कांग्रेस में पावर सेंटर एक नहीं है।
पहला औपचारिक, दूसरा आक्रामक, तीसरा अनुभव आधारित। राजनीति में खाली जगह कभी खाली नहीं रहती। जहां असहमति हो, वहां विकल्प खड़े हो जाते हैं। क्या आने वाले समय में यही तीसरा केंद्र संतुलन साधेगा या समीकरण और जटिल होंगे?
प्रदेश कांग्रेस इस समय सरकार से ज्यादा खुद से जूझती दिख रही है। उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा एक संकेत है। निकटता की प्रतिस्पर्धा दूसरा और तीसरा पावर सेंटर स्थिर प्रतीक्षा में है।
24 तारीख को राहुल गांधी का दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, नेतृत्व परीक्षण की तारीख भी है। सत्ता की शतरंज में चालें कभी सार्वजनिक नहीं होतीं, पर मात अक्सर भीतर से मिलती है। संकेत जारी रहेंगे।
चर्च को चंदा दिला रहे कलेक्टर साहब, मंत्रालय वाले साहब मसाज के शौकीन और मंत्रीजी की चाहत अधूरी
साहब की मौज पर आयोग ने लगाया ब्रेक, दो मैडमों में कोल्डवॉर और वो खाकी वाले साहब!
कप्तान साहब की धुआंधार बल्लेबाजी, मामा का मैजिक शॉट और पंडित जी प्लेइंग इलेवन से बाहर
बैठक में बहके साहब, कलेक्टर साहब का बंगला और कलेक्टर मैडम की वो रेट लिस्ट!
सत्ता के गलियारों में सब कुछ दिखता नहीं, पर सब कुछ चलता जरूर है। कहीं रिश्वत नजराना बन जाती है, कहीं पसंद की पोस्टिंग चौंकाने वाला फैसला कहलाती है।
बाकी… फाइलें तो चुप रहती हैं, पर खबरें बोलती हैं। भूमिका बहुत हो गई। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
रिश्वत या नजराना?
55eb18a2-ac1
मालवा-निमाड़ में बड़े ओहदे पर रहे खाकी वाले साहब का अंदाज निराला है। छोटा पैसा सामने आ जाए तो साहब के भीतर का धर्म जाग उठता है और बड़ी रकम आते ही वही धर्म दरियादिली में बदल जाता है।
कहानी कुछ ऐसी है कि एक थानेदार ने किसी बड़ी डील में 25 लाख की कमाई कर ली। खबर बड़े साहब तक पहुंची तो तुरंत थानेदार को हाजिर कर लिया। थानेदार समझ गया कि साहब की तरफ से बुलावा यूं ही नहीं आया है।
कमरे में दाखिल होते ही सलाम ठोंका और चुपचाप 5 लाख मेज पर रख दिए। साहब का पारा चढ़ गया, "रिश्वत देते हो? हिम्मत कैसे हुई?" तुरंत आदेश दिया कि "इसे कमरे में बंद करो।" थानेदार भी कम घुटा हुआ नहीं था।
हाथ जोड़कर बोला, "सर, गलत समझ रहे हैं। अभी जल्दी में 5 ही ला पाया हूं। 10 लाख और रास्ते में हैं। ये तो आपका नजराना है।" बस… फिर क्या था माहौल बदल गया। साहब की त्योरियां ढीली पड़ीं और चेहरे पर मुस्कान आ गई। समझाइश का दौर शुरू हुआ।
साहब बोले, "देखो ईमानदारी से ड्यूटी करना चाहिए।" सूत्र बताते हैं कि थानेदार की कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा ऊपर चला गया और अब वो ढिंढोरा पीट रहा है कि साहब को छोटा माल रिश्वत लगता है, बड़ा माल नजराना।
क्या भोपाल कलेक्टर पर भी चौंकाएंगे?
6efb26a0-905
प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है। बड़े साहब ने भोपाल कलेक्टर के लिए मन ही मन एक नाम तय कर रखा है। अब देखना यह है कि सूबे के मुखिया उसी अंदाज में चौंकाएंगे या नहीं, जैसे भोपाल पुलिस कमिश्नर की पोस्टिंग में किया था।
आपको बता दें कि कमिश्नर पद के लिए पीएचक्यू ने दो नाम आगे बढ़ाए थे, लेकिन सूबे के मुखिया ने उन्हें देखा तक नहीं। सीधे आईपीएस ग्रेडेशन लिस्ट उठाई और ऐसा नाम चुन लिया, जो न किसी गुट का, न किसी विवाद का।
अब सवाल यही है कि क्या कलेक्टरी में भी वही आउट ऑफ द कोर्स तड़का लगेगा या फिर बड़े साहब की पसंद पर मुहर लगेगी? फैसला भोपाल की कुर्सी का होगा और संदेश पूरे सूबे में जाएगा।
एससी-एसटी के नए नेता की एंट्री
90fba8f0-562
अजाक्स संगठन दो फाड़ हो चुका है। एक तरफ संतोष वर्मा विवादों के घेरे में हैं। दूसरी तरफ मुकेश मौर्य पर आईएएस न होने का असर है। इस बीच सियासी शतरंज पर एक सीनियर आईएएस ने चुपचाप चाल चल दी है। वे गुपचुप तरीके से एससी-एसटी अधिकारियों को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटे हैं।
साहब का मानना है कि सरकार में बड़ा पद चाहिए तो अपने समाज की ताकत दिखानी होगी। लंबे समय तक मेनस्ट्रीम से बाहर रहे यह साहब इन दिनों अच्छी पोस्टिंग पर हैं। अब वे नेटवर्किंग की बिसात बिछा रहे हैं। देखना है कि यह सामाजिक एकजुटता सत्ता की सीढ़ी बनती है या नई खेमेबाजी की शुरुआत होगी।
नेताजी चले गए, संदेश रह गया
bee33f68-f33
उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा महज संगठनात्मक फेरबदल नहीं है। यह उस खामोश टकराव का नतीजा है, जो महीनों से आकार ले रहा था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का रवैया कई लोगों को अखर रहा था।
विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के लिए विधायकों के नाम तय करने का मामला चिंगारी बन गया। कटारे के सुझाए नामों को सिरे से खारिज कर दिया गया। राजनीति में मतभेद सामान्य हैं, लेकिन जब संवाद की जगह संदेश देने की शैली हावी हो जाए तो पद औपचारिक रह जाता है।
सम्मान नहीं कटारे ने पद छोड़ा है, पर असली सवाल यह है कि क्या वे चुप बैठेंगे? राजनीति में अपमान की याददाश्त लंबी होती है।
राहुल के सबसे करीब की प्रतियोगिता
24 को राहुल गांधी भोपाल आ रहे हैं। अब सवाल यह नहीं कि मंच पर कौन बैठेगा, सवाल यह है कि मंच के पीछे कौन किसके साथ खड़ा होगा। क्योंकि दिल्ली संदेश पढ़ती है और संकेतों की भाषा समझती है।
अगर खेमेबाजी की रेखाएं स्पष्ट रहीं तो आंदोलन की धार कमजोर पड़ सकती है। यदि मंच पर एकता दिखी तो वह भी अस्थायी युद्धविराम हो सकता है। यह दौड़ निकटता की नहीं, नियंत्रण की है।
बिना पद का प्रभाव
cce39b9a-08d
कमलनाथ का भोपाल प्रवास अपने आप में एक संदेश बन जाता है। उनके पास औपचारिक रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से अभी भी वे केंद्र में रहते हैं। उनके बंगले पर जुटती भीड़ बताती है कि प्रदेश कांग्रेस में पावर सेंटर एक नहीं है।
पहला औपचारिक, दूसरा आक्रामक, तीसरा अनुभव आधारित। राजनीति में खाली जगह कभी खाली नहीं रहती। जहां असहमति हो, वहां विकल्प खड़े हो जाते हैं। क्या आने वाले समय में यही तीसरा केंद्र संतुलन साधेगा या समीकरण और जटिल होंगे?
विपक्ष बनाम विपक्ष
24 तारीख को राहुल गांधी का दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, नेतृत्व परीक्षण की तारीख भी है। सत्ता की शतरंज में चालें कभी सार्वजनिक नहीं होतीं, पर मात अक्सर भीतर से मिलती है। संकेत जारी रहेंगे।
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
साहब की मौज पर आयोग ने लगाया ब्रेक, दो मैडमों में कोल्डवॉर और वो खाकी वाले साहब!
कप्तान साहब की धुआंधार बल्लेबाजी, मामा का मैजिक शॉट और पंडित जी प्लेइंग इलेवन से बाहर
बैठक में बहके साहब, कलेक्टर साहब का बंगला और कलेक्टर मैडम की वो रेट लिस्ट!
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari