बोल हरि बोल: मैडम पर किसका वरदहस्त, सैंयां जी कैसे बचे, पंडित जी का डायलॉग और माननीय का गुस्सा!
Harish Divekar | Jul 05, 2026, 12:13 IST
बोल हरि बोल
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम बोल हरि बोल में जानिए मध्य प्रदेश की सियासत और ब्यूरोक्रेसी के बंद कमरों की इनसाइड स्टोरी, जहां आईएएस-एडीजी की बेचैनी और नेताओं के तेवर सुर्खियां बटोर रहे हैं।
BHOPAL. सत्ता और सिस्टम में हर हफ्ते बहुत कुछ ऐसा होता है, जो न प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनाई देता है और न सरकारी विज्ञप्तियों में दिखाई देता है। कुछ चर्चाएं बंद कमरों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचती हैं तो कुछ कानाफूसियां सिस्टम में तैरने लगती हैं। कहीं किसी नेता का बयान सुर्खियां बटोरता है तो कहीं किसी अफसर के तेवर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol में इस हफ्ते भी ऐसे ही कुछ चर्चित किस्से हैं। इनमें सत्ता के अंदर की हलचल है। अफसरशाही की अनकही कहानियां हैं और राजनीति के वे दिलचस्प मोड़ भी हैं, जिनकी चर्चा खुले मंचों से ज्यादा बंद कमरों में होती है। खबरों की भीड़ से अलग हटकर पढ़िए, इस हफ्ते सत्ता और सिस्टम के सबसे चर्चित किस्से...
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विंध्य की राजनीति में इन दिनों एक माननीय का बयान चर्चा बटोर रहा है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर पर ऐसा हमला बोला है कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है। विधायक जी ने सीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनकी तुलना कुत्ते टॉमी से की है।
उन्होंने कहा कि जैसे टॉमी हर प्लेट में मुंह मारता है, वैसे ही सीईओ भी हर काम में दखल दे रहे हैं। माननीय ने सीईओ को छोटी सोच वाला और टपोरी टाइप आदमी तक बता दिया। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे कि जिले में ऐसे अधिकारी की तैनाती क्यों की गई है? अब सत्ता के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि आखिर विधायक और सीईओ के बीच ऐसा क्या हुआ कि मामला इस स्तर तक पहुंच गया।
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सूबे के मुखिया डॉक्टर साहब ने इस हफ्ते खाकी वाले बड़े साहबों का पुराना मुगालता दूर कर दिया है। जी हां, सही पढ़ा आपने। अब पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग दो अलग-अलग सत्ता केंद्र नहीं हैं। पुलिस मुख्यालय को अपनी सीमाएं समझनी होंगी और हर बड़ा फैसला गृह विभाग के दायरे में ही रहेगा। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से दोनों विभागों के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था।
पुलिस मुख्यालय ने कई मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसले कर लिए थे, जिस पर गृह विभाग ने लाल झंडी दिखा दी। बात जब मुख्यमंत्री तक पहुंची तो कुछ अफसरों ने पुलिस मुख्यालय को और ज्यादा अधिकार देने की पैरवी भी कर डाली, पर डॉक्टर साहब ने दो टूक कहा कि सरकार में सुपर पावर जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती। अब खाकी के गलियारों में चर्चा है कि डॉक्टर साहब ने ये संदेश सिर्फ एक बैठक के लिए नहीं, आने वाले दिनों के लिए भी दिया है।
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पुलिस मुख्यालय के सबसे ताकतवर माने जाने वाले एडीजी साहब इन दिनों परेशान चल रहे हैं, इसकी वजह भी दिलचस्प है। दरअसल, इन साहब ने अधिकारों की सीमा लांघते हुए विभाग को करीब डेढ़ करोड़ रुपए के सॉफ्टवेयर की खरीद करा डाली। असली मुश्किल तब शुरू हुई, जब इस खरीदी के अनुमोदन के लिए फाइल गृह विभाग पहुंची। बस फिर क्या था... मंत्रालय के आईएएस अफसरों ने फाइल ऐसी परखी कि लाल पेन से पूरा दस्तावेज रंग दिया।
इस मामले में गृह और वित्त विभाग दोनों ने पीएचक्यू के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। अब फाइल अटक गई है। उधर, एडीजी साहब की सेवानिवृत्ति भी करीब है। यदि उनके रहते मामला नहीं निपटा तो वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग की विभागीय जांच तक की नौबत आ सकती है। यही वजह है कि खाकी बिरादरी इस फाइल को मुख्यमंत्री से हरी झंडी दिलाने की कोशिश में जुटी है, लेकिन फिलहाल फाइल अपनी जगह अड़ी है और अफसरों की सांसें अटकी हैं।
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मंत्रालय में इन दिनों एक और चर्चा गर्म है। सवाल यह है कि आखिर एक वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी पर इतनी मेहरबानी किसकी है? मुख्यमंत्री ने हाल ही में ए-प्लस नोटशीटों में लापरवाही पर कई अफसरों की जमकर क्लास लगाई, लेकिन सबसे ज्यादा लंबित मामलों वाले विभाग की जिम्मेदार मैडम बैठक से भी बच गईं और सवालों से भी।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वे बैठक में नहीं पहुंचीं, लेकिन उनके विभाग पर अपेक्षित सख्ती भी नहीं दिखी। अब मंत्रालय में यही चर्चा है कि आखिर यह सुरक्षा कवच आया कहां से? हालांकि मैडम अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए पहले से मशहूर हैं, लेकिन इस बार चर्चा उनकी बेबाकी से ज्यादा बैकिंग की हो रही है। अब देखते जाइए, आगे आगे होता है क्या?
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मंत्रालय की एक डिप्टी सेक्रेटरी मैडम इन दिनों भगवान का विशेष धन्यवाद कर रही हैं। वजह यह है कि संकट उनके दरवाजे तक आ गया था, लेकिन अंदर दाखिल नहीं हो पाया। कहानी यह है कि मैडम के पास एक जिला कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार है। चर्चा है कि उनके अतिरिक्त प्रभार वाले कार्यालय में काम करवाने का रास्ता सीधे दफ्तर से नहीं, बल्कि सैंयां जी से होकर गुजरता था और बीच में विभाग का एक रिटायर्ड अधिकारी सेतु का काम करता था। लेन-देन के मामले को लेकर जब एक व्यापारी परेशान हुआ तो उसने जांच एजेंसी से हाथ मिला लिया।
इसके बाद मैडम को ट्रैप करने के लिए जाल बिछ गया। लेकिन किस्मत देखिए, जिस दिन रकम का लेन-देन होना था, उस दिन सैंयां जी किसी और काम से बाहर थे। उन्होंने अपने भरोसेमंद रिटायर्ड अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी। नतीजा यह हुआ कि रिटायर्ड अधिकारी के हाथ में जैसे ही नोटों की गड्डी आई, जांच एजेंसी ने रंगे हाथों उसे पकड़ लिया। अब मैडम ने सैंयां जी को सख्त हिदायत दे दी है कि फिलहाल कार्यालय के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से कोई संपर्क नहीं रखा जाएगा। आखिर संकट टला है तो सावधानी भी जरूरी है। फिर भगवान भी बार-बार मौका नहीं देते।
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मोहन सरकार के एक मंत्रीजी का विभाग इन दिनों उनके गुस्से से ज्यादा चर्चा में है। अफसर बताते हैं कि बैठक में यदि मंत्रीजी का पारा चढ़ गया तो फिर शब्दों की मर्यादा भी साथ छोड़ देती है। अपशब्दों से लेकर मां-बहन की गालियां तक सुनने की नौबत आ जाती है। इतना ही नहीं, विभाग में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि अफसरों को लगता है मंत्रीजी की इच्छा ही अंतिम आदेश है। चाहे तबादले हों या करोड़ों के विवादित टेंडर, मंत्रीजी की मर्जी के आगे किसी की नहीं चली।
कई मामलों में तो उन्होंने यह संदेश भी दे दिया कि उनकी बात न मुख्यमंत्री रोकेंगे और न ही मुख्य सचिव। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के करीबी राजनीतिक सलाहकारों तक विभाग की पूरी कहानी पहुंच गई है। कहा जा रहा है कि जल्द ही मंत्रीजी के आभामंडल की असली चमक मुख्यमंत्री के सामने भी रखी जाएगी। इसके बाद देखना होगा कि विभाग में मंत्रीजी का रौब चलेगा या सरकार के नियम?
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समंदर का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना... मैं लौटकर आऊंगा, ये वादा है। जोश से भर देने वाली ये पंक्तियां पूर्व गृह मंत्री पंडित जी की हैं। दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने ये लाइनें कही थीं। तब इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था, अब ये लाइनें फिर बाजार में आ गई हैं। अब सवाल यही है कि क्या बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव में उतारेगी या किसी और की किस्मत चमकेगी?
दतिया में उपचुनाव के ऐलान से पहले से ही नरोत्तम मिश्रा खासे सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब उन्होंने रूठे हुए स्थानीय नेताओं को मनाने की कवायद भी शुरू कर दी है। एक कार्यक्रम में मिश्रा ने कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे। कार्य, व्यवहार, आचार और विचार में बदलाव लाकर पूरी ईमानदारी से जनता के बीच जाएंगे। इस तरह पंडित जी किला लड़ाने के लिए तैयार हैं, बस बीजेपी की हरी झंडी का इंतजार है। आगे आगे देखिए, होता है क्या?
जब खाकी वाले साहब इंदौरी, मैडम फाइल वूमेन और उपमुख्यमंत्री पोस्टमैन बनें…
साहब और सिंघल की जोड़ी हिट, इधर मैडम को चाहिए चमाट मार असिस्टेंट!
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों में रौब, रोष और रील का रियलिटी शो!
मैडम के तीखे तेवर, डॉक्टर साहब की फटकार और वो दिल्ली वाली मुलाकात!
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol में इस हफ्ते भी ऐसे ही कुछ चर्चित किस्से हैं। इनमें सत्ता के अंदर की हलचल है। अफसरशाही की अनकही कहानियां हैं और राजनीति के वे दिलचस्प मोड़ भी हैं, जिनकी चर्चा खुले मंचों से ज्यादा बंद कमरों में होती है। खबरों की भीड़ से अलग हटकर पढ़िए, इस हफ्ते सत्ता और सिस्टम के सबसे चर्चित किस्से...
सीईओ पर क्यों गुस्सा हो गए माननीय!
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विंध्य की राजनीति में इन दिनों एक माननीय का बयान चर्चा बटोर रहा है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर पर ऐसा हमला बोला है कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है। विधायक जी ने सीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनकी तुलना कुत्ते टॉमी से की है।
उन्होंने कहा कि जैसे टॉमी हर प्लेट में मुंह मारता है, वैसे ही सीईओ भी हर काम में दखल दे रहे हैं। माननीय ने सीईओ को छोटी सोच वाला और टपोरी टाइप आदमी तक बता दिया। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे कि जिले में ऐसे अधिकारी की तैनाती क्यों की गई है? अब सत्ता के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि आखिर विधायक और सीईओ के बीच ऐसा क्या हुआ कि मामला इस स्तर तक पहुंच गया।
उतरा खाकी का ओवर कॉन्फिडेंस
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सूबे के मुखिया डॉक्टर साहब ने इस हफ्ते खाकी वाले बड़े साहबों का पुराना मुगालता दूर कर दिया है। जी हां, सही पढ़ा आपने। अब पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग दो अलग-अलग सत्ता केंद्र नहीं हैं। पुलिस मुख्यालय को अपनी सीमाएं समझनी होंगी और हर बड़ा फैसला गृह विभाग के दायरे में ही रहेगा। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से दोनों विभागों के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था।
पुलिस मुख्यालय ने कई मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसले कर लिए थे, जिस पर गृह विभाग ने लाल झंडी दिखा दी। बात जब मुख्यमंत्री तक पहुंची तो कुछ अफसरों ने पुलिस मुख्यालय को और ज्यादा अधिकार देने की पैरवी भी कर डाली, पर डॉक्टर साहब ने दो टूक कहा कि सरकार में सुपर पावर जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती। अब खाकी के गलियारों में चर्चा है कि डॉक्टर साहब ने ये संदेश सिर्फ एक बैठक के लिए नहीं, आने वाले दिनों के लिए भी दिया है।
एडीजी साहब की बढ़ती बेचैनी
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पुलिस मुख्यालय के सबसे ताकतवर माने जाने वाले एडीजी साहब इन दिनों परेशान चल रहे हैं, इसकी वजह भी दिलचस्प है। दरअसल, इन साहब ने अधिकारों की सीमा लांघते हुए विभाग को करीब डेढ़ करोड़ रुपए के सॉफ्टवेयर की खरीद करा डाली। असली मुश्किल तब शुरू हुई, जब इस खरीदी के अनुमोदन के लिए फाइल गृह विभाग पहुंची। बस फिर क्या था... मंत्रालय के आईएएस अफसरों ने फाइल ऐसी परखी कि लाल पेन से पूरा दस्तावेज रंग दिया।
इस मामले में गृह और वित्त विभाग दोनों ने पीएचक्यू के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। अब फाइल अटक गई है। उधर, एडीजी साहब की सेवानिवृत्ति भी करीब है। यदि उनके रहते मामला नहीं निपटा तो वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग की विभागीय जांच तक की नौबत आ सकती है। यही वजह है कि खाकी बिरादरी इस फाइल को मुख्यमंत्री से हरी झंडी दिलाने की कोशिश में जुटी है, लेकिन फिलहाल फाइल अपनी जगह अड़ी है और अफसरों की सांसें अटकी हैं।
मैडम पर आखिर किसका सुरक्षा कवच?
f009eaac-dcc
मंत्रालय में इन दिनों एक और चर्चा गर्म है। सवाल यह है कि आखिर एक वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी पर इतनी मेहरबानी किसकी है? मुख्यमंत्री ने हाल ही में ए-प्लस नोटशीटों में लापरवाही पर कई अफसरों की जमकर क्लास लगाई, लेकिन सबसे ज्यादा लंबित मामलों वाले विभाग की जिम्मेदार मैडम बैठक से भी बच गईं और सवालों से भी।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वे बैठक में नहीं पहुंचीं, लेकिन उनके विभाग पर अपेक्षित सख्ती भी नहीं दिखी। अब मंत्रालय में यही चर्चा है कि आखिर यह सुरक्षा कवच आया कहां से? हालांकि मैडम अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए पहले से मशहूर हैं, लेकिन इस बार चर्चा उनकी बेबाकी से ज्यादा बैकिंग की हो रही है। अब देखते जाइए, आगे आगे होता है क्या?
बच गए मैडम के सैंयां
73d00448-3a1
मंत्रालय की एक डिप्टी सेक्रेटरी मैडम इन दिनों भगवान का विशेष धन्यवाद कर रही हैं। वजह यह है कि संकट उनके दरवाजे तक आ गया था, लेकिन अंदर दाखिल नहीं हो पाया। कहानी यह है कि मैडम के पास एक जिला कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार है। चर्चा है कि उनके अतिरिक्त प्रभार वाले कार्यालय में काम करवाने का रास्ता सीधे दफ्तर से नहीं, बल्कि सैंयां जी से होकर गुजरता था और बीच में विभाग का एक रिटायर्ड अधिकारी सेतु का काम करता था। लेन-देन के मामले को लेकर जब एक व्यापारी परेशान हुआ तो उसने जांच एजेंसी से हाथ मिला लिया।
इसके बाद मैडम को ट्रैप करने के लिए जाल बिछ गया। लेकिन किस्मत देखिए, जिस दिन रकम का लेन-देन होना था, उस दिन सैंयां जी किसी और काम से बाहर थे। उन्होंने अपने भरोसेमंद रिटायर्ड अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी। नतीजा यह हुआ कि रिटायर्ड अधिकारी के हाथ में जैसे ही नोटों की गड्डी आई, जांच एजेंसी ने रंगे हाथों उसे पकड़ लिया। अब मैडम ने सैंयां जी को सख्त हिदायत दे दी है कि फिलहाल कार्यालय के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से कोई संपर्क नहीं रखा जाएगा। आखिर संकट टला है तो सावधानी भी जरूरी है। फिर भगवान भी बार-बार मौका नहीं देते।
मंत्रीजी का ऐसा रौब?
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मोहन सरकार के एक मंत्रीजी का विभाग इन दिनों उनके गुस्से से ज्यादा चर्चा में है। अफसर बताते हैं कि बैठक में यदि मंत्रीजी का पारा चढ़ गया तो फिर शब्दों की मर्यादा भी साथ छोड़ देती है। अपशब्दों से लेकर मां-बहन की गालियां तक सुनने की नौबत आ जाती है। इतना ही नहीं, विभाग में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि अफसरों को लगता है मंत्रीजी की इच्छा ही अंतिम आदेश है। चाहे तबादले हों या करोड़ों के विवादित टेंडर, मंत्रीजी की मर्जी के आगे किसी की नहीं चली।
कई मामलों में तो उन्होंने यह संदेश भी दे दिया कि उनकी बात न मुख्यमंत्री रोकेंगे और न ही मुख्य सचिव। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के करीबी राजनीतिक सलाहकारों तक विभाग की पूरी कहानी पहुंच गई है। कहा जा रहा है कि जल्द ही मंत्रीजी के आभामंडल की असली चमक मुख्यमंत्री के सामने भी रखी जाएगी। इसके बाद देखना होगा कि विभाग में मंत्रीजी का रौब चलेगा या सरकार के नियम?
क्या आएंगे लौटकर पंडित जी?
091f359e-4f8
समंदर का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना... मैं लौटकर आऊंगा, ये वादा है। जोश से भर देने वाली ये पंक्तियां पूर्व गृह मंत्री पंडित जी की हैं। दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने ये लाइनें कही थीं। तब इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था, अब ये लाइनें फिर बाजार में आ गई हैं। अब सवाल यही है कि क्या बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव में उतारेगी या किसी और की किस्मत चमकेगी?
दतिया में उपचुनाव के ऐलान से पहले से ही नरोत्तम मिश्रा खासे सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब उन्होंने रूठे हुए स्थानीय नेताओं को मनाने की कवायद भी शुरू कर दी है। एक कार्यक्रम में मिश्रा ने कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे। कार्य, व्यवहार, आचार और विचार में बदलाव लाकर पूरी ईमानदारी से जनता के बीच जाएंगे। इस तरह पंडित जी किला लड़ाने के लिए तैयार हैं, बस बीजेपी की हरी झंडी का इंतजार है। आगे आगे देखिए, होता है क्या?
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
साहब और सिंघल की जोड़ी हिट, इधर मैडम को चाहिए चमाट मार असिस्टेंट!
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों में रौब, रोष और रील का रियलिटी शो!
मैडम के तीखे तेवर, डॉक्टर साहब की फटकार और वो दिल्ली वाली मुलाकात!
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