ढाई दशक हो गए चक्रेश को पत्रकारिता में। लिखने, पढ़ने के भारी शौकीन। दैनिक भास्कर, पत्रिका समूह में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर सभी डेस्क और फिर एडिटर तक हर तरह की जिम्मेदारियों को संजीदगी से पूरा किया। देश के दिल मध्य प्रदेश से लेकर धान के कटोरे छत्तीसगढ़ और फिर हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान होते हुए फिर अपने घर मध्य प्रदेश लौट आए हैं। thesootr.com का जिम्मा इन्हीं के पास है। खबरों को मांजने में माहिर। डेटा की दुनिया में खुदाई ( data Mining ) का शौक है। इन्हें खबरों के हर एंगल के साथ द सूत्र का एकमेव टेक एक्सपर्ट कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। हरफनमौला चक्रेश कहते हैं कि आधुनिक दौर में फिलहाल डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को सीख रहे हैं।
ढाई दशक हो गए चक्रेश को पत्रकारिता में। लिखने, पढ़ने के भारी शौकीन। दैनिक भास्कर, पत्रिका समूह में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर सभी डेस्क और फिर एडिटर तक हर तरह की जिम्मेदारियों को संजीदगी से पूरा किया। देश के दिल मध्य प्रदेश से लेकर धान के कटोरे छत्तीसगढ़ और फिर हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान होते हुए फिर अपने घर मध्य प्रदेश लौट आए हैं। thesootr.com का जिम्मा इन्हीं के पास है। खबरों को मांजने में माहिर। डेटा की दुनिया में खुदाई ( data Mining ) का शौक है। इन्हें खबरों के हर एंगल के साथ द सूत्र का एकमेव टेक एक्सपर्ट कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। हरफनमौला चक्रेश कहते हैं कि आधुनिक दौर में फिलहाल डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को सीख रहे हैं।
30 Sept 2026
By CHAKRESH
वैसे तो चौमासे में मध्यप्रदेश का मौसम खुशनुमा ही रहता है, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं के दौरों की झड़ी लगी है। करीब-करीब 15 दिन में ही राहुल दूसरी बार एमपी आ रहे हैं तो बीजेपी भी पीछे नहीं है। सितंबर में नितिन नबीन, मोहन भागवत और राहुल गांधी आए। अब बिप्लब देब, राहुल गांधी का बालाघाट दौरा और अमित शाह का गोपालक सम्मेलन है।
वैसे तो चौमासे में मध्यप्रदेश का मौसम खुशनुमा ही रहता है, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं के दौरों की झड़ी लगी है। करीब-करीब 15 दिन में ही राहुल दूसरी बार एमपी आ रहे हैं तो बीजेपी भी पीछे नहीं है। सितंबर में नितिन नबीन, मोहन भागवत और राहुल गांधी आए। अब बिप्लब देब, राहुल गांधी का बालाघाट दौरा और अमित शाह का गोपालक सम्मेलन है।
30 Sept 2026
By CHAKRESH
भोपाल में आईएएस की पत्नी के लिफ्ट में फंसने और भाजयुमो नेता की करंट से मौत के बाद सरकारी अमला मिनटों में हरकत में आ गया। जांच कमेटियां बनीं और लिफ्ट एक्ट की तैयारी शुरू हो गई। लेकिन MPERC की रिपोर्ट बताती है कि 2024-25 में करंट से 1,102 मौतें हुईं। हर 8 घंटे में दम तोड़ते आम आदमी के लिए सिस्टम की यह फुर्ती क्यों गायब रहती है?
भोपाल में आईएएस की पत्नी के लिफ्ट में फंसने और भाजयुमो नेता की करंट से मौत के बाद सरकारी अमला मिनटों में हरकत में आ गया। जांच कमेटियां बनीं और लिफ्ट एक्ट की तैयारी शुरू हो गई। लेकिन MPERC की रिपोर्ट बताती है कि 2024-25 में करंट से 1,102 मौतें हुईं। हर 8 घंटे में दम तोड़ते आम आदमी के लिए सिस्टम की यह फुर्ती क्यों गायब रहती है?
28 Sept 2026
By CHAKRESH
देश में मानसून की बारिश औसत से 15% कम रही है। खरीफ फसलों का रकबा और पैदावार घटने से महंगाई बढ़ने, ग्रामीण मांग गिरने और अर्थव्यवस्था पर दबाव आने का खतरा है। कम बारिश और अल नीनो के कारण चावल, दाल, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की पैदावार घटने का अनुमान है।
देश में मानसून की बारिश औसत से 15% कम रही है। खरीफ फसलों का रकबा और पैदावार घटने से महंगाई बढ़ने, ग्रामीण मांग गिरने और अर्थव्यवस्था पर दबाव आने का खतरा है। कम बारिश और अल नीनो के कारण चावल, दाल, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की पैदावार घटने का अनुमान है।
19 Sept 2026
By CHAKRESH
मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक पुलिस सिपाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में सिपाही मनोज धाकड़ लोगों से कथित बदसलूकी करते नजर आया। मामला सामने आते ही गुना SP हितिका वासल ने संज्ञान लिया और सिपाही को तुरंत सस्पेंड कर दिया। वीडियो की तारीख और जगह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है।
मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक पुलिस सिपाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में सिपाही मनोज धाकड़ लोगों से कथित बदसलूकी करते नजर आया। मामला सामने आते ही गुना SP हितिका वासल ने संज्ञान लिया और सिपाही को तुरंत सस्पेंड कर दिया। वीडियो की तारीख और जगह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है।
18 Sept 2026
By CHAKRESH
पर्चा लीक और भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों की जांच अब सिर्फ 2021 की राज्य सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं रही है।
पर्चा लीक और भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों की जांच अब सिर्फ 2021 की राज्य सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं रही है।
07 Aug 2026
By CHAKRESH
क्या है FCRA संशोधन बिल 2026? ये बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश हुआ था। ये बिल तय करता है कि लाइसेंस रद्द या एक्सपायर होने पर NGOs की संपत्ति केंद्रीय अथॉरिटी लेगी। उनकी संपत्ति अब सरकार के पास जाएगी। आइए NGO संपत्ति पर नया कानून समझें....
क्या है FCRA संशोधन बिल 2026? ये बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश हुआ था। ये बिल तय करता है कि लाइसेंस रद्द या एक्सपायर होने पर NGOs की संपत्ति केंद्रीय अथॉरिटी लेगी। उनकी संपत्ति अब सरकार के पास जाएगी। आइए NGO संपत्ति पर नया कानून समझें....
08 Aug 2026
By CHAKRESH
सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नई भाषा गाइडलाइंस बनाई हैं। रूढ़िवादी शब्दों पर रोक लगेगी। पीड़िताओं और गवाहों को अदालत में अब ज्यादा सम्मान मिलेगा। बड़ी बात यह है कि यह सारा काम भोपाल में हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नई भाषा गाइडलाइंस बनाई हैं। रूढ़िवादी शब्दों पर रोक लगेगी। पीड़िताओं और गवाहों को अदालत में अब ज्यादा सम्मान मिलेगा। बड़ी बात यह है कि यह सारा काम भोपाल में हुआ है।
07 Aug 2026
By CHAKRESH
नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर जेन-जी (Gen Z) युवाओं के उग्र प्रदर्शन के बाद राजनीति की पूरी दिशा बदलती दिख रही है। इस प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जेन-जी साल 2029 तक भारत का सबसे ताकतवर वोट बैंक बन पाएगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट
नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर जेन-जी (Gen Z) युवाओं के उग्र प्रदर्शन के बाद राजनीति की पूरी दिशा बदलती दिख रही है। इस प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जेन-जी साल 2029 तक भारत का सबसे ताकतवर वोट बैंक बन पाएगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट
29 Jul 2026
By CHAKRESH
पुलिसिंग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। 70% से ज्यादा पुलिसकर्मी बिना सजा के डर के बल प्रयोग चाहते हैं। 69% बिना कोर्ट की इजाजत के गिरफ्तारी के अधिकार के पक्ष में हैं।
पुलिसिंग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। 70% से ज्यादा पुलिसकर्मी बिना सजा के डर के बल प्रयोग चाहते हैं। 69% बिना कोर्ट की इजाजत के गिरफ्तारी के अधिकार के पक्ष में हैं।
02 Aug 2026
By CHAKRESH
भारतीय सेना में सिख, मराठा और महार जैसे नाम अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं। साल 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने मार्शल रेस थ्योरी बनाई थी। आजादी के बाद नई जातिगत रेजिमेंट बनाने पर रोक लगा दी गई, लेकिन पुरानी परंपराएं आज भी जारी हैं।
भारतीय सेना में सिख, मराठा और महार जैसे नाम अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं। साल 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने मार्शल रेस थ्योरी बनाई थी। आजादी के बाद नई जातिगत रेजिमेंट बनाने पर रोक लगा दी गई, लेकिन पुरानी परंपराएं आज भी जारी हैं।
By Jitendra Shrivastava
By The Sootr

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