वेश्या, रखैल जैसे शब्दों पर अब लगी पूरी रोक, 125 केसों को पढ़कर भोपाल में तैयार हुई गाइडलाइन
CHAKRESH | Aug 05, 2026, 13:00 IST
सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नई भाषा गाइडलाइंस बनाई
सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नई भाषा गाइडलाइंस बनाई हैं। रूढ़िवादी शब्दों पर रोक लगेगी। पीड़िताओं और गवाहों को अदालत में अब ज्यादा सम्मान मिलेगा। बड़ी बात यह है कि यह सारा काम भोपाल में हुआ है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट ने जजों के लिए नई भाषा गाइडलाइंस बनाई हैं।
- अब अदालती फैसलों में रूढ़िवादी और अपमानजनक शब्द नहीं चलेंगे।
- जस्टिस अनिरुद्ध बोस की कमेटी ने खास ग्लॉसरी तैयार की है।
- इसमें पुराने शब्दों की जगह सम्मानजनक विकल्प दिए गए हैं।
- मकसद है पीड़ितों को अदालत में गरिमा और भरोसा देना।
भाषा से जुड़ी बड़ी पहल
एक हाईकोर्ट के फैसले में संवेदनहीन भाषा इस्तेमाल हुई थी। इससे सुप्रीम कोर्ट नाराज हुआ। कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया। नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
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जजों के लिए बनी खास कमेटी
कमेटी ने देशभर की 125 ट्रायल कोर्ट के फैसले पढ़े। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई। इसमें पुराने और आपत्तिजनक शब्दों की एक बड़ी सूची शामिल है।
किन शब्दों पर लगी रोक
पीड़िता के लिए शब्द
चरित्र और शुद्धता से जुड़े शब्द
रिश्तों और पेशे से जुड़े शब्द
हवस, शील और शर्म से जुड़े शब्द
शब्दों के बदलाव की सूची | |
| पुराना और आपत्तिजनक शब्द | नया और सम्मानजनक विकल्प |
| Prosecutrix (प्रॉसिक्यूट्रिक्स) | Survivor / Complainant (सर्वाइवर) |
| Chastity (शुद्धता / सतीत्व) | Autonomy (स्वायत्तता) |
| Outraged Modesty (शील भंग) | शारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन |
| Keep / Mistress (रखैल) | Partner (पार्टनर) |
| Prostitute (वेश्या) | Sex Worker (सेक्स वर्कर) |
| Lust (हवस) | Sexual Violence (यौन हिंसा) |
| Helpless woman (बेचारी महिला) | Survivor (सर्वाइवर) |
आम गलतियां जो पत्रकार करते हैं
पुराने फैसलों ने दिखाई राह
उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि पीड़िता का यौन इतिहास बलात्कार के मामलों में पूरी तरह अप्रासंगिक है। अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA- Bharatiya Sakshya Adhiniyam) 2023 की धारा 48 भी यही सिद्धांत दोहराती है।
मील का पत्थर: वो फैसले जिन्होंने समाज को बदला
विशाखा केस (1997): काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए नियम बने। इससे दफ्तरों में यौन उत्पीड़न रोकने में मदद मिली।
जोसेफ शाइन (2019): एडल्ट्री (व्यभिचार) से जुड़े पुराने भेदभाव वाले कानून को हटाया। कोर्ट ने कहा कि महिला पति की संपत्ति नहीं है।
अपर्णा भट्ट (2021): जजों को रूढ़िवादी टिप्पणियों से बचने की सलाह दी। रेप केस में समझौते का सुझाव देना गलत बताया।
नाल्सा केस (2014): ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बराबरी का कानूनी हक दिया। इससे समाज में समावेशी सोच और सम्मान बढ़ा।
शैलेन्द्र कुमार राय (2022): टू-फिंगर टेस्ट को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। अब यह टेस्ट करने वाला डॉक्टर दोषी माना जाएगा।
निपुण सक्सेना (2019): सर्वाइवर की पहचान गुप्त रखने के सख्त आदेश दिए। इससे उनकी निजता और गरिमा सुरक्षित हुई है।
इन फैसलों ने महिलाओं और बच्चों को जमीनी सुरक्षा दी है। यह समाज में समानता लाने का एक बड़ा जरिया बने।
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विक्टिम-ब्लेमिंग पर कानूनी लगाम
अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 लागू हो चुका है। इसकी धारा 48 बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह पुराने कानून की धारा 53A की जगह आई है। यह कहती है कि सर्वाइवर का यौन इतिहास मायने नहीं रखता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सख्त फैसला सुनाया। यह Bechan Prasad v. State of U.P. (2026) का मामला था। कोर्ट ने आसान चरित्र जैसे शब्दों पर कड़ी नाराजगी जताई। अब कोई भी वकील सर्वाइवर के चरित्र पर सवाल नहीं उठाएगा।
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मुआवजा और सहयोग की व्यवस्था
यह पूरी प्रक्रिया राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संभालते हैं। आवेदन एफआईआर की कॉपी के साथ जमा करना होता है।
गवाह अब मेहमान की तरह
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आगे क्या बदलेगा
एक्सपर्ट की राय
जस्टिस अनिरुद्ध बोस, कमेटी अध्यक्ष: उन्होंने रिपोर्ट में लिखा कि अदालती भाषा में संवेदनशीलता के लिए वकीलों और जजों को मिलकर एक साझा भाषा-व्यवस्था बनानी होगी, ताकि आपत्तिजनक शब्द धीरे-धीरे हट सकें। सुप्रीम कोर्ट, शैलेन्द्र कुमार राय केस (2022): कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के यौन इतिहास को आधार बनाना गलत और पुरानी सोच है, इसलिए यह बलात्कार के मामलों में अप्रासंगिक है।
रिपोर्ट का सीधा संबंध मध्यप्रदेश से
FAQ
- जजों के लिए नई गाइडलाइंस क्यों बनाई गईं?
अदालती फैसलों में रूढ़िवादी और अपमानजनक भाषा हटाने के लिए ये गाइडलाइंस बनाई गई हैं। इससे पीड़िताओं का सम्मान और भरोसा बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी ने इसे तैयार किया है। - अदालत में अब किन शब्दों पर रोक है?
वेश्या, रखैल, शील भंग जैसे शब्दों की जगह अब नए शब्द इस्तेमाल होंगे। इनकी जगह सेक्स वर्कर, पार्टनर और यौन हिंसा जैसे शब्द चलेंगे। ये निर्देश जजों के लिए अनिवार्य हैं। - गवाहों को अदालत में क्या नई सुविधाएं मिलेंगी?
गवाहों को अब मेहमान जैसा सम्मान और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पीड़िताओं को इन-कैमरा ट्रायल और काउंसलिंग की सुविधा भी मिलेगी।
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