पाकिस्तान का अफगानिस्तान से खुली जंग का ऐलान, क्यों आए दोनों देश आमने-सामने?

Anjali Dwivedi | Feb 27, 2026, 15:57 IST
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अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर बड़ा हमला कर 55 सैनिकों को मारने का दावा किया है। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक शुरू किया, जिसमें काबुल और कंधार पर मिसाइलें बरसाई गई हैं।

News In Short

  • अफगानिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।
  • पाकिस्तान ने इसके जवाब में ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत एयरस्ट्राइक की।
  • पाकिस्तान का दावा है कि हमलों में 133 तालिबानी लड़ाके मारे गए हैं।
  • रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान के खिलाफ खुले युद्ध का ऐलान किया।
  • 1893 की डूरंड लाइन आज भी दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ है।

News In Detail

अफगानिस्तान ने 26 फरवरी गुरुवार की देर रात पाकिस्तान की सीमा पर भीषण हमला कर दिया। अफगानिस्तानी मीडिया संस्थानटोलो न्यूज के मुताबिक तालिबान ने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है। यह कार्रवाई 22 फरवरी को हुई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का सीधा जवाब मानी जा रही है।

तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस सैन्य हमले की पुष्टि सार्वजनिक रूप से की है। अफगान सरकार का दावा है कि 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव उनके कब्जे में हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना की 19 चौकियों और एक हेडक्वॉर्टर पर कब्जा कर लिया है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान युद्ध क्यों हुआ?

इस सैन्य टकराव की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान ने 21 फरवरी को अफगानिस्तान के भीतर संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का दावा था कि उसके पास सबूत हैं कि, प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलोच विद्रोही अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमले के लिए कर रहे हैं।

जवाब में, गुरुवार 26 फरवरी को अफगान तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की है। इसमें अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की दर्जनों सीमा चौकियों पर कब्जा करने और 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है।

बदले की आग में पाकिस्तान ने शुक्रवार को काबुल और कंधार पर मिसाइलें बरसाईं। इसमें 133 लड़ाकों के मारे जाने का दावा है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 13 आम नागरिकों की भी जान गई है।

पाकिस्तान का पलटवार

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक सेना ने जवाबी कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी है। पाकिस्तान ने इस मिशन को ऑपरेशन गजब लिल हक का नाम दिया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार जैसे शहरों में भीषण बमबारी (पाकिस्तान एयरस्ट्राइक) की है।

पाकिस्तान का दावा है कि उनके हमलों में 133 तालिबानी लड़ाके मारे गए। साथ ही 200 से अधिक लड़ाके इस हवाई हमले में घायल हुए हैं। उन्होंने 27 तालिबान चौकियों को पूरी तरह तबाह करने का दावा भी किया।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की चेतावनी

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अब सब्र की सीमा टूट गई है। उन्होंने साफ किया कि अब दोनों देशों के बीच खुला युद्ध शुरू है। आसिफ ने तालिबान पर आतंकवाद का निर्यात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि काबुल सरकार दुनिया भर के आतंकियों को पनाह दे रही है।

पाकिस्तानी मंत्री ने तालिबान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वहां महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया।

काबुल और कंधार में धमाकों से गूंजी आधी रात

देर रात करीब 1:50 बजे काबुल शहर धमाकों की आवाज से दहल उठा। विमानों की गड़गड़ाहट के बीच सुबह 2:30 बजे तक गोलियां चलने की आवाजें आईं। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि तालिबान के रक्षा ठिकाने निशाने पर हैं।

पाकिस्तान ने दो हथियार डिपो और तीन बटालियन मुख्यालय नष्ट करने का दावा किया। उनके अनुसार 80 से अधिक टैंक भी इस कार्रवाई में पूरी तरह जल गए। हालांकि तालिबान ने दावा किया कि इन हमलों में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

सीजफायर के बाद फिर भड़की आग

अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से सीमा पर फिर से झड़पें शुरू हो गई हैं। पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने एयरस्ट्राइक की थी जिसमें 18 लोग मारे गए थे।

तालिबान का कहना है कि उस हमले में मासूम बच्चे और महिलाएं मारी गई थीं। इसी के जवाब में गुरुवार रात 8 बजे तालिबान ने बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। दोनों देश अब एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगा रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने हमलों की निंदा की

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने इन हमलों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि अफगान लोग अपनी धरती की रक्षा पूरी एकता से करेंगे। करजई ने पाकिस्तानी सेना की आक्रामकता का साहस से जवाब देने की बात कही। पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह ताजा संघर्ष पिछले साल ही शुरू हुआ था। टीटीपी (TTP) के खिलाफ कार्रवाई न होने से पाकिस्तान लगातार नाराज चल रहा है। दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता के प्रयास पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।

डूरंड लाइन विवाद की असली जड़ क्या है

तनाव की मुख्य वजह 133 साल पुरानी डूरंड लाइन मानी जाती है। सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में यह काल्पनिक सीमा रेखा खींची थी। अफगानिस्तान इस रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देता है। वह इसे पश्तून जनजातियों का एक कृत्रिम विभाजन मानता है। पाकिस्तान इस रेखा को वैध मानता है ताकि पश्तून राष्ट्रवाद को रोका जाए। इस विवाद के कारण ही दोनों देशों के बीच कभी रिश्ते सामान्य नहीं रहे।

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