खुलने वाली है देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन, दस साल तक उगलेगी सोना

Anjali Dwivedi | Apr 19, 2026, 14:00 IST
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India Private Gold Mine Kurnool
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आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में देश की पहली निजी सोने की खदान शुरू होगी। जियोमाइसोर कंपनी इसे चलाएगी। खदान में 13 टन से ज्यादा सोने का भंडार है। इससे भारत का सोना आयात कम होने की उम्मीद है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में मई में सोने की खदान खुलने वाली है।
  • यह आजादी के बाद पहली बड़ी निजी सोने की खदान होगी।
  • जियोमाइसोर कंपनी इस खदान को चलाएगी, 400 करोड़ लगे हैं।
  • खदान में 13 टन से ज्यादा पक्के सोने के भंडार मौजूद हैं।
  • भारत हर साल 800 टन सोना बाहर से मंगाता है, यह कम होगा।
कुर्नूल की जमीन सदियों से सोना अपने अंदर छुपाए बैठी थी। अब वह वक्त आ गया है जब यह सोना बाहर निकलेगा। आंध्र प्रदेश के इस जिले में देश की पहली बड़ी निजी सोने की खदान मई 2026 में शुरू होने जा रही है।

जियोमाइसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी इस खदान को चला रही है। यह खदान जोन्नागिरी गांव के पास है। आजादी के बाद पहली बार कोई निजी कंपनी इतने बड़े पैमाने पर सोने की खुदाई करने जा रही है।

India Private Gold Mine Kurnool
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मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस खदान को देश को समर्पित करेंगे। राज्य के खान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीणा ने कहा कि यह सिर्फ आंध्र प्रदेश के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए बड़ा पल है। उन्होंने कहा कि यह खदान देश की सोना खनन की बड़ी उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है।

कहां है यह खदान और कितनी बड़ी है

यह खदान कुर्नूल जिले के तीन गांवों, जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागिदिरायी में फैली हुई है। कुल 598 हेक्टेयर जमीन पर यह खदान बनी है। इसमें अब तक 400 करोड़ रुपए से ज्यादा का पैसा लगाया जा चुका है।

BSE (Bombay Stock Exchange) में दर्ज जियोमाइसोर कंपनी को दो बड़ी कंपनियों का साथ मिला है। पहली है थ्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा और दूसरी है डेक्कन गोल्ड।

13 महीने में बन गया प्लांट

सुबह होने से पहले जब अंधेरा होता था, तब भी जोन्नागिरी में मशीनें चलती रहती थीं। ड्रिल मशीनें जमीन खोदती रहती थीं। खुदाई करने वाले यंत्र रात-दिन काम करते रहे। और नतीजा यह रहा कि सोने को साफ करने वाला प्रोसेसिंग प्लांट सिर्फ 13 महीने में बनकर तैयार हो गया।

डेक्कन गोल्ड के निदेशक हनुमा प्रसाद मोडाली ने कहा कि जोन्नागिरी यह साबित करती है कि भारत जिम्मेदारी से और दुनिया के साथ कदम मिलाकर खनन कर सकता है।

कितना सोना है इस खदान में खदान में पक्के तौर पर 13.1 टन सोने का भंडार मौजूद है। अगर संभावित भंडार की बात करें तो यह 42.5 टन तक हो सकता है। जब खदान पूरी रफ्तार से चलेगी तो हर साल एक हजार किलोग्राम शुद्ध सोना निकलेगा। यह सिलसिला अगले 15 साल तक चलता रहेगा। थ्रिवेणी अर्थमूवर्स के संस्थापक बी. प्रभाकरन का कहना है कि इस खदान की कामयाबी देश में और निवेशकों को सोने की खुदाई की तरफ आकर्षित करेगी।

भारत क्यों मंगाता है इतना सोना बाहर से

भारत हर साल 800 टन से ज्यादा सोना दूसरे देशों से खरीदता है। इससे देश का बहुत सारा पैसा बाहर जाता है और विदेशी मुद्रा के भंडार पर दबाव बनता है। देश में अभी जो खदानें हैं वे बहुत कम सोना देती हैं।

हुट्टी गोल्ड माइन्स हर साल सिर्फ डेढ़ टन सोना निकाल पाती है। कोलार की खदान तो साल दो हजार में ही बंद हो गई थी। सरकारी कंपनी NMDC (National Mineral Development Corporation) लिमिटेड ने विदेशों में खदानें खरीदकर काम बढ़ाया है। ऐसे में जोन्नागिरी की यह खदान देश के लिए उम्मीद की एक नई किरण है।

आयात बिल पर असर कब दिखेगा

जानकारों का कहना है कि इस एक खदान से सोने का आयात तुरंत नहीं रुकेगा। लेकिन यह एक बड़ी शुरुआत जरूर है। अगर इसी तरह और खदानें (गोल्ड माइनिंग) खुलती हैं तो आने वाले सालों में देश की जमीन से ज्यादा सोना निकलेगा और बाहर से कम मंगाना पड़ेगा। यह खदान अपनी तरह का पहला कदम है। और हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक कदम से ही होती है।

यह खबर क्यों जरूरी है भारत में सोने का रिश्ता सिर्फ गहनों तक नहीं है। यह हमारी अर्थव्यवस्था, संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है। हर साल 800 टन सोना बाहर से खरीदने पर देश का करोड़ों रुपया बाहर जाता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर सोने की खदान खोलना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम है। यह खदान आंध्र प्रदेश के गांवों में रोजगार देगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी। पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से भी यह परियोजना जरूरी है क्योंकि यह एक कानूनी, पारदर्शी और सरकार समर्थित ढांचे में काम कर रही है। यह खबर हिंदी बेल्ट के उन पाठकों के लिए भी जरूरी है जो समझना चाहते हैं कि देश की जमीन के नीचे छुपी दौलत का इस्तेमाल कैसे हो सकता है।
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