10 मिनट डिलीवरी पर केंद्र सरकार की सख्ती, Blinkit ने हटाया फीचर

केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया की पहल पर ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी कंपनियां 10 मिनट डिलीवरी का दावा हटा रही हैं। सरकार ने यह कदम गिग वर्कर्स की सुरक्षा के लिए लिया है।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • ब्लिंकिट ने 10 मिनट डिलीवरी का दावा हटा लिया है।
  • जोमैटो, स्विगी और जेप्टो भी जल्द यह बदलाव लागू करेंगे।
  • गिग वर्कर्स ने तेज डिलीवरी मॉडल के खिलाफ विरोध किया था।
  • कंपनियां अब डिलीवरी समय का सख्त दावा नहीं करेंगी, लेकिन स्पीड पर असर नहीं होगा।
  • कोरोना महामारी के बाद कंपनियां अब वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं।

News In Detail

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की सख्त पहल के बाद, ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड प्लेटफॉर्म्स से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा पूरी तरह से हटा लिया है।

यह फैसला डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा और बेहतर कामकाजी हालात को ध्यान में रखकर लिया गया है। केंद्र सरकार ने यह कदम एक बड़ी राहत के रूप में देखा है, जो डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में डालने वाले तेज डिलीवरी मॉडल के खिलाफ उठाया गया है।

केंद्र सरकार से मिली चेतावनी

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे डिलीवरी टाइम लिमिट हटा दें। ताकि डिलीवरी पार्टनर्स सुरक्षित काम कर सकें। सभी कंपनियों ने सरकार से इस बदलाव पर सहमति जताई है। ब्लिंकिट ने तुरंत बदलाव किया है और बाकी कंपनियां भी जल्द ही इसे अपनाएंगी।

Minister Mansukh Mandaviya

क्या है बदलाव?

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने फैसला लिया है कि वे अब अपने प्रचार में कोई फिक्स टाइम कमिटमेंट नहीं दिखाएंगे। यानी अब यह दावा नहीं किया जाएगा कि हर हाल में 10 मिनट में डिलीवरी की जाएगी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि डिलीवरी की रफ्तार धीमी होगी। कंपनियां अब फोकस करेंगी कि डिलीवरी वर्कर्स को बिना किसी अनावश्यक दबाव के, सुरक्षित तरीके से अपनी डिलीवरी पूरी करने का समय मिले।

क्यों बढ़ी थी चिंता?

क्विक डिलीवरी मॉडल को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में गिग वर्कर्स यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन और स्ट्राइक्स की थीं। इन यूनियनों का कहना था कि 10-20 मिनट की अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल असुरक्षित है, क्योंकि इस मॉडल में डिलीवरी पार्टनर्स को तेज रफ्तार से गाड़ी चलानी पड़ती है, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। 31 दिसंबर 2025 को, श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए, इन यूनियनों ने डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी।

कोविड में किया था बदलाव

भारत में कोरोना महामारी के दौरान, लोगों की जरूरी सामान की डिलीवरी की जरूरत बढ़ी थी और तब से क्विक डिलीवरी का मॉडल तेजी से बढ़ा। उस समय, आधे घंटे के भीतर डिलीवरी भी एक बड़ी बात मानी जाती थी, लेकिन अब यह समय घटकर 10 मिनट तक पहुंच चुका था। यह मॉडल बढ़ते हुए, दवाओं से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, सभी प्रकार के सामान की 10 मिनट में डिलीवरी का दावा करने लगा था।

अब क्या होगा?

Blinkit और अन्य कंपनियों के इस कदम से डिलीवरी वर्कर्स के लिए एक बड़ा बदलाव आएगा। जहां पहले स्पीड को प्राथमिकता दी जाती थी, अब कंपनियां अपने वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी। यह कदम गिग वर्कर्स के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।

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