Bolivia में मिली बिल्ली परिवार की नई प्रजाति Tilcayo Cat, 100 साल बाद वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
Manya Jain | Sootr Creatives | Sept 22, 2026, 18:52 IST
100 साल बाद हुई नई बिल्ली प्रजाति की खोज
Boliviaमें बिल्ली की नई प्रजाति मिली है। 100 साल बाद यह अनोखी खोज हुई है। इसे पहले आम जंगली बिल्ली समझा गया था। जेनेटिक टेस्ट से यह बिल्कुल अलग निकली। वैज्ञानिकों ने इसका नाम Tilcayo Cat रखा है। यह नाम स्थानीय लोगों में पहले से मशहूर है। इसकी पूरी कहानी साल 2017 में शुरू हुई। एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी में एक स्थानीय को यह अजीब बिल्ली जंगल के पास मिली थी।
बोलीविया में वैज्ञानिकों को बिल्ली परिवार की एक बिल्कुल नई प्रजाति मिली है। यह खोज 100 साल बाद हुई है। इस बिल्ली को पहले एक सामान्य जंगली प्रजाति समझा गया था, लेकिन जेनेटिक टेस्ट से यह अलग निकली। वैज्ञानिकों ने इसका नाम तिलकायो रखा है, जो स्थानीय लोगों में पहले से प्रचलित है। यह खोज जर्नल करंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुई है।
यह पूरी कहानी 2017 में शुरू हुई, जब बोलीविया के एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी को एक अजीब बिल्ली मिली थी। एक स्थानीय व्यक्ति को यह बिल्ली का बच्चा जंगल के पास सड़क किनारे मिला था, जिसे उसने पालतू बिल्ली समझ कर घर ले लिया।
कैसे हुई इस
नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर और जीव वैज्ञानिक पाओला नोगालेस-अस्कारुंज को जब इस बिल्ली के बारे में पता चला, तो वे इसे देखने सेंचुरी पहुंचीं। बिल्ली का चेहरा छोटा और सिकुड़ा हुआ था, कान गोल और छोटे थे, और शरीर पर तेंदुए जैसे धब्बे थे। यह आम पालतू बिल्ली से कहीं ज्यादा छोटी थी।
शुरुआत में नोगालेस-अस्कारुंज ने मान लिया था कि यह लेपर्डस टिग्रिनस प्रजाति की बिल्ली है, जिसे टिग्रिना या तिग्रिल्लो भी कहा जाता है। इस प्रजाति की पहचान 1775 में फ्रेंच गयाना में देखी गई एक तस्वीर के आधार पर हुई थी।
2019 में जब नोगालेस-अस्कारुंज बोलीविया की बिल्ली प्रजातियों पर एक गाइडबुक तैयार कर रही थीं, तब उन्हें अंतर नजर आया। उनकी खींची तस्वीर वाली बिल्ली के धब्बे पड़ोसी देश ब्राजील की गाइडबुक में दिखाई तस्वीर से काफी बड़े थे। इसी से उन्हें शक हुआ कि यह बिल्ली कोई अलग प्रजाति हो सकती है।
इसके बाद कुछ सालों में उन्होंने जेनेटिक एनालिसिस की तकनीक सीखी, ताकि इस रहस्यमयी बिल्ली के जीनोम की सही जांच की जा सके।
नोगालेस-अस्कारुंज ने ब्राजील की पॉन्टिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी के जेनेटिसिस्ट एडुआर्डो एइज़िरिक और एंटवर्प यूनिवर्सिटी के जोनास लेस्क्रोआर्ट के साथ मिलकर इस पर रिसर्च की। टीम ने पाया कि यह बिल्ली कैट फैमिली ट्री में बिल्कुल अलग जगह रखती है।
शोधकर्ताओं ने इस बिल्ली का वैज्ञानिक नाम लेपर्डस तिलकायो रखने का प्रस्ताव दिया है। यह नाम स्थानीय लोगों द्वारा पहले से इस्तेमाल किए जा रहे शब्द तिलकायो से लिया गया है, हालांकि इसका स्पेनिश या क्वेचुआ भाषा में कोई खास अर्थ नहीं मिलता।
अभी तक वैज्ञानिकों को इतना ही पता है कि तिलकायो बिल्ली बोलीविया के यूंगास वन क्षेत्र में पाई जाती है, जो एंडीज पर्वत के पूर्वी ढलान पर स्थित है। इसका भोजन, प्रजनन और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी ज्यादातर जानकारी अभी भी अज्ञात है।
यह खोज इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले बिल्ली परिवार में आखिरी नई खोज 1923 में पम्पास कैट की हुई थी। यानी करीब एक सदी के बाद यह पहली बड़ी खोज है।
इस खोज से सिर्फ एक नई प्रजाति ही सामने नहीं आई, बल्कि पूरे कैट फैमिली ट्री की संरचना बदल गई है। 2013 में वैज्ञानिकों ने बताया था कि लेपर्डस टिग्रिनस असल में दो अलग प्रजातियों से मिलकर बनी है। फिर 2024 में एक और अलग प्रजाति सामने आई। अब इस नई स्टडी के बाद टाइगर कैट प्रजातियों की कुल संख्या पांच हो गई है।
रिसर्चर्स ने 38 बिल्लियों के पूरे जीनोम की तुलना की, जिसमें पता चला कि तिलकायो बिल्ली बाकी टाइगर कैट प्रजातियों से करीब 14 लाख साल पहले अलग हो चुकी थी। यह फासला आधुनिक शेर और विलुप्त हो चुके गुफा शेर के बीच के फासले जितना बड़ा है।
छोटी वाइल्ड कैट स्पीशीज पर कम रिसर्च होने की वजह से इनकी पहचान में अक्सर भ्रम होता रहा है। अध्ययन में शामिल एक म्यूजियम नमूने को पहले मार्गे बिल्ली समझा गया था, बाद में जांच में वह टाइगर कैट निकली।
वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर किसी प्रजाति को एक ही मानकर पूरे इलाके में फैला हुआ माना जाए, तो वह संकटग्रस्त नहीं लगेगी। लेकिन अगर वह असल में पांच अलग प्रजातियों में बंटी हो, तो हर एक की अलग से समीक्षा जरूरी हो जाती है। इससे संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और तेजी मिल सकती है।
यह पूरी कहानी 2017 में शुरू हुई, जब बोलीविया के एक वाइल्डलाइफ सेंचुरी को एक अजीब बिल्ली मिली थी। एक स्थानीय व्यक्ति को यह बिल्ली का बच्चा जंगल के पास सड़क किनारे मिला था, जिसे उसने पालतू बिल्ली समझ कर घर ले लिया।
कैसे हुई इस अनोखी बिल्ली की खोज
शुरुआत में नोगालेस-अस्कारुंज ने मान लिया था कि यह लेपर्डस टिग्रिनस प्रजाति की बिल्ली है, जिसे टिग्रिना या तिग्रिल्लो भी कहा जाता है। इस प्रजाति की पहचान 1775 में फ्रेंच गयाना में देखी गई एक तस्वीर के आधार पर हुई थी।
जब लगा कुछ गड़बड़ है
इसके बाद कुछ सालों में उन्होंने जेनेटिक एनालिसिस की तकनीक सीखी, ताकि इस रहस्यमयी बिल्ली के जीनोम की सही जांच की जा सके।
जेनेटिक स्टडी ने खोला राज
शोधकर्ताओं ने इस बिल्ली का वैज्ञानिक नाम लेपर्डस तिलकायो रखने का प्रस्ताव दिया है। यह नाम स्थानीय लोगों द्वारा पहले से इस्तेमाल किए जा रहे शब्द तिलकायो से लिया गया है, हालांकि इसका स्पेनिश या क्वेचुआ भाषा में कोई खास अर्थ नहीं मिलता।
कहां पाई जाती है यह बिल्ली
यह खोज इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले बिल्ली परिवार में आखिरी नई खोज 1923 में पम्पास कैट की हुई थी। यानी करीब एक सदी के बाद यह पहली बड़ी खोज है।
कैट फैमिली ट्री में आएगा बड़ा बदलाव
रिसर्चर्स ने 38 बिल्लियों के पूरे जीनोम की तुलना की, जिसमें पता चला कि तिलकायो बिल्ली बाकी टाइगर कैट प्रजातियों से करीब 14 लाख साल पहले अलग हो चुकी थी। यह फासला आधुनिक शेर और विलुप्त हो चुके गुफा शेर के बीच के फासले जितना बड़ा है।
संरक्षण के लिए क्यों अहम है यह खोज
वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर किसी प्रजाति को एक ही मानकर पूरे इलाके में फैला हुआ माना जाए, तो वह संकटग्रस्त नहीं लगेगी। लेकिन अगर वह असल में पांच अलग प्रजातियों में बंटी हो, तो हर एक की अलग से समीक्षा जरूरी हो जाती है। इससे संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और तेजी मिल सकती है।
एक्सपर्ट कोट्स
- पाओला नोगालेस-अस्कारुंज (जीव वैज्ञानिक, नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर) ने कहा कि हमारी दुनिया बेहद जटिल है और अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है।
- एडुआर्डो एइज़िरिक (जेनेटिसिस्ट, पॉन्टिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ रियो ग्रांडे दो सुल) ने कहा कि अगर किसी प्रजाति को एक इकाई मानने के बजाय पांच अलग प्रजातियां माना जाए, तो हर एक का अलग आकलन जरूरी हो जाता है।
- जेम्स सैंडरसन (संस्थापक, स्मॉल वाइल्ड कैट कंजर्वेशन फाउंडेशन) ने कहा कि इस स्टडी में इस्तेमाल हुई तकनीक से अफ्रीका और एशिया में भी नई छोटी जंगली बिल्ली प्रजातियां मिलने की संभावना है।
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