Canva में बड़ी छंटनी की तैयारी: हजारों कर्मचारियों पर संकट के बादल, CEO बोलीं- 13 साल का सबसे कठिन दौर
Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 05, 2026, 12:14 IST
अब AI के दौर में कैनवा के सामने बड़ी चुनौती।
ऑनलाइन डिजाइन प्लेटफॉर्म कैनवा में बड़े स्तर पर बदलाव की खबर है। यह दावा किया गया है कि कंपनी 22% से ज्यादा कर्मचारियों की कटौती करेगी, जिससे कम से कम एक हजार 271 लोगों की नौकरी प्रभावित होगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में कैनवा की कीमत 40 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। 2022 में यह घटकर करीब 26 अरब डॉलर रह गई।
कंपनी में यह बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हो रहा है। कैनवा की सीईओ मेलानी पर्किन्स ने कर्मचारियों को एक नोट भेजा है। इसमें उन्होंने इस फैसले को कंपनी के 13 साल के इतिहास का सबसे कठिन समय बताया है।
कैनवा की सीईओ मेलानी पर्किन्स के मुताबिक, कंपनी की ग्रोथ में सुस्ती आई है। करीब एक दशक में पहली बार ऐसा हुआ है। कंपनी का मुख्यालय ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में है। मेलानी ने कर्मचारियों को बताया कि नई तकनीक तेजी से काम करने का तरीका बदल रही है। अब लोग पहले से अलग तरीके से डिजाइन और दूसरे काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी में छोटे बदलाव करने से काम नहीं चलेगा। इसलिए बड़े स्तर पर बदलाव करने का फैसला लिया गया है। उनके मुताबिक, कंपनी को आगे बढ़ने के लिए काम करने का तरीका बदलना होगा। इसके लिए टीमों और कर्मचारियों की भूमिका में भी बदलाव जरूरी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से कई काम पहले के मुकाबले आसान हो गए हैं। अब लोग बिना ज्यादा तकनीकी जानकारी के भी कई काम कर सकते हैं। एंथ्रोपिक के क्लाउड जैसे नए AI टूल्स इसका उदाहरण हैं। इनकी मदद से लोग बिना किसी खास सॉफ्टवेयर की जानकारी के भी डिजाइन और दूसरे काम कर सकते हैं।
इससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है, जो पहले ऐसे कामों के लिए अपने सॉफ्टवेयर बेचती थीं। अब ग्राहक AI टूल्स की मदद से खुद भी कई काम कर पा रहे हैं। कंपनियां भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। इससे कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करना संभव हो रहा है। यही वजह है कि कई टेक कंपनियां अपने कामकाज में बदलाव कर रही हैं।
खबरों के मुताबिक, मेलानी पर्किन्स ने बताया कि कंपनी अब अपना कामकाज आसान बनाना चाहती है। इसके लिए छोटी टीमों के साथ काम किया जाएगा। कंपनी में खास तरह के काम करने वाले अलग-अलग पदों की संख्या कम की जाएगी।
इसके साथ ही सिडनी को कंपनी की प्रोडक्ट टीमों का मुख्य केंद्र बनाया जाएगा। कंपनी के हाइब्रिड वर्क कल्चर में भी बदलाव होगा। जनवरी से ज्यादातर कर्मचारियों को हफ्ते में दो से तीन दिन ऑफिस आना होगा। अभी कई कर्मचारी घर और ऑफिस दोनों जगह से काम करते हैं। नए नियम के बाद उन्हें ज्यादा दिन ऑफिस में मौजूद रहना होगा।
कैनवा शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। इसे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) कहा जाता है। इसके जरिए कोई कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर खरीदने का मौका देती है। ऐसे समय में कंपनी ने कर्मचारियों की संख्या घटाने और कामकाज बदलने का फैसला किया है। साल 2021 में कैनवा की कीमत 40 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी। यह कंपनी की अब तक की बड़ी वैल्यूएशन में से एक थी।
हालांकि, साल 2022 में टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसका असर कैनवा की कीमत पर भी पड़ा। उस समय कंपनी की वैल्यूएशन घटकर करीब 26 बिलियन डॉलर रह गई थी। बाद में कंपनी की वैल्यू में सुधार हुआ। लेकिन नई तकनीक और बाजार में हो रहे बदलावों का आगे क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है।
खबरों के मुताबिक, कैनवा की शुरुआत के पीछे मेलानी पर्किन्स की एक सोच थी। साल 2008 में वह सिर्फ 19 साल की थीं। उस समय फेसबुक तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। मेलानी ने देखा कि डिजाइन बनाने वाले पुराने सॉफ्टवेयर को सीखना आसान नहीं था। इसमें लोगों को काफी समय लग जाता था।
उन्होंने सोचा कि डिजाइन बनाने का काम आसान होना चाहिए। लोग इंटरनेट के जरिए आसानी से पोस्टर, लोगो और बिजनेस कार्ड बना सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने क्लिफ ओब्रेक्ट के साथ मिलकर पहला प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका नाम फ्यूजन बुक्स था।
इसके बाद साल 2013 में कैमरन एडम्स भी इस टीम से जुड़ गए। इसके बाद तीनों ने मिलकर कैनवा की शुरुआत की। इस प्लेटफॉर्म का मकसद आम लोगों के लिए डिजाइन बनाना आसान करना था। इसमें लोग अपनी फोटो अपलोड कर सकते थे। इसके बाद पहले से मौजूद डिजाइन, फॉन्ट और फिल्टर की मदद से बदलाव कर सकते थे। धीरे-धीरे कैनवा दुनिया के लोकप्रिय ऑनलाइन डिजाइन प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है। वे जानना चाहते हैं कि कंपनियां AI पर जितना पैसा खर्च कर रही हैं, उससे उन्हें कितना फायदा मिलेगा। इस बीच सॉफ्टवेयर कंपनियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो रही है। ग्राहक अब कई काम सीधे AI टूल्स से कर सकते हैं।
इसे टेक्नोलॉजी की भाषा में सॉफ्टवेयर कैनिबलाइजेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि नई तकनीक किसी पुराने सॉफ्टवेयर के काम को खुद करने लगे। इससे उस पुराने सॉफ्टवेयर की मांग घट सकती है।
उदाहरण के लिए, पहले डिजाइन बनाने के लिए लोगों को अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती थी। अब AI टूल्स की मदद से कई डिजाइन सीधे तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे में कैनवा जैसी कंपनियों को अपने काम करने का तरीका बदलना पड़ रहा है।
FAQs
13 साल में पहली बार कंपनी की ग्रोथ हुई धीमी
उन्होंने कहा कि कंपनी में छोटे बदलाव करने से काम नहीं चलेगा। इसलिए बड़े स्तर पर बदलाव करने का फैसला लिया गया है। उनके मुताबिक, कंपनी को आगे बढ़ने के लिए काम करने का तरीका बदलना होगा। इसके लिए टीमों और कर्मचारियों की भूमिका में भी बदलाव जरूरी है।
AI टूल्स के कारण कंपनियों में बदल रही नौकरियां
इससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है, जो पहले ऐसे कामों के लिए अपने सॉफ्टवेयर बेचती थीं। अब ग्राहक AI टूल्स की मदद से खुद भी कई काम कर पा रहे हैं। कंपनियां भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। इससे कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करना संभव हो रहा है। यही वजह है कि कई टेक कंपनियां अपने कामकाज में बदलाव कर रही हैं।
छोटी टीमों के साथ काम करेगी कैनवा
इसके साथ ही सिडनी को कंपनी की प्रोडक्ट टीमों का मुख्य केंद्र बनाया जाएगा। कंपनी के हाइब्रिड वर्क कल्चर में भी बदलाव होगा। जनवरी से ज्यादातर कर्मचारियों को हफ्ते में दो से तीन दिन ऑफिस आना होगा। अभी कई कर्मचारी घर और ऑफिस दोनों जगह से काम करते हैं। नए नियम के बाद उन्हें ज्यादा दिन ऑफिस में मौजूद रहना होगा।
IPO की तैयारी के बीच कंपनी का बड़ा फैसला
हालांकि, साल 2022 में टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसका असर कैनवा की कीमत पर भी पड़ा। उस समय कंपनी की वैल्यूएशन घटकर करीब 26 बिलियन डॉलर रह गई थी। बाद में कंपनी की वैल्यू में सुधार हुआ। लेकिन नई तकनीक और बाजार में हो रहे बदलावों का आगे क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है।
फ्यूजन बुक्स से शुरू हुआ कैनवा का सफर
उन्होंने सोचा कि डिजाइन बनाने का काम आसान होना चाहिए। लोग इंटरनेट के जरिए आसानी से पोस्टर, लोगो और बिजनेस कार्ड बना सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने क्लिफ ओब्रेक्ट के साथ मिलकर पहला प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका नाम फ्यूजन बुक्स था।
इसके बाद साल 2013 में कैमरन एडम्स भी इस टीम से जुड़ गए। इसके बाद तीनों ने मिलकर कैनवा की शुरुआत की। इस प्लेटफॉर्म का मकसद आम लोगों के लिए डिजाइन बनाना आसान करना था। इसमें लोग अपनी फोटो अपलोड कर सकते थे। इसके बाद पहले से मौजूद डिजाइन, फॉन्ट और फिल्टर की मदद से बदलाव कर सकते थे। धीरे-धीरे कैनवा दुनिया के लोकप्रिय ऑनलाइन डिजाइन प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया।
पुराने सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए AI खतरा बन रहा?
इसे टेक्नोलॉजी की भाषा में सॉफ्टवेयर कैनिबलाइजेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि नई तकनीक किसी पुराने सॉफ्टवेयर के काम को खुद करने लगे। इससे उस पुराने सॉफ्टवेयर की मांग घट सकती है।
उदाहरण के लिए, पहले डिजाइन बनाने के लिए लोगों को अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती थी। अब AI टूल्स की मदद से कई डिजाइन सीधे तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे में कैनवा जैसी कंपनियों को अपने काम करने का तरीका बदलना पड़ रहा है।
FAQs
- कैनवा में छंटनी और बदलाव की मुख्य वजह क्या है?
कैनवा में छंटनी और बदलाव की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की धीमी ग्रोथ है। - कैनवा की CEO कौन हैं?
कैनवा की CEO मेलानी पर्किन्स हैं। उन्होंने 19 साल की उम्र में डिजाइन प्लेटफॉर्म बनाने का विचार शुरू किया था। - कैनवा की शुरुआत कब हुई थी?
कैनवा की शुरुआत साल 2013 में हुई थी, जिसे मेलानी पर्किन्स, क्लिफ ओब्रेक्ट और कैमरन एडम्स ने मिलकर स्थापित किया।
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