अल फलाह यूनिवर्सिटी पर ED की नजर, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कसेगा शिकंजा

Sandeep Kumar | Jan 11, 2026, 22:30 IST
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al falah university
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अल फलाह यूनिवर्सिटी पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत ईडी की जांच तेज हो गई है। यूनिवर्सिटी की संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।

NEW DELHI. लाल किला विस्फोट के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी सुर्खियों में आई। यह यूनिवर्सिटी हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित है। ईडी ने यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसना शुरू किया है। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जब्ती की जांच कर रही है। एजेंसी धन के स्रोत की पड़ताल कर रही है।

News in Short

  1. हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की है।
  2. ईडी ने नवंबर में अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था।
  3. सिद्दीकी पर आरोप है कि विश्वविद्यालय और ट्रस्ट ने फर्जी मान्यता से छात्रों से 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की।
  4. अल फलाह यूनिवर्सिटी की भूमिका व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल की जांच में सामने आई है।
  5. सिद्दीकी के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और दिल्ली पुलिस की एफआईआर झूठी हैं।

News in Detail

अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को नवंबर में ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। ईडी का कहना है कि शिक्षण संस्थानों को वैध मान्यता नहीं मिली थी। जांच में पाया गया कि अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा फरीदाबाद में इमारतों के निर्माण में लगा था। ईडी अल फलाह ट्रस्ट की संपत्तियों की पहचान कर रही है। जांच के बाद संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश दिया जाएगा।

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अल फलाह यूनिवर्सिटी का परिसर सौंपा जा सकता

यह माना जाता है कि छात्रों की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसलिए कुर्की के बाद भी उन्हें अध्ययन जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। अंतरिम कुर्की के बाद रिसीवर को अल फलाह यूनिवर्सिटी का परिसर सौंपा जा सकता है। रिसीवर परिसर की बहाली का जिम्मा ले सकता है। सूत्रों के अनुसार, आपराधिक कार्रवाई और अभियोजन के बावजूद छात्रों की शिक्षा पर असर नहीं पड़ेगा।

नवंबर में कोर्ट से सिद्दीकी की रिमांड मांगते हुए ईडी ने बताया कि सिद्दीकी के निर्देश पर विश्वविद्यालय और ट्रस्ट ने फर्जी मान्यता और प्रमाणन के आधार पर छात्रों से 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की।

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10 से अधिक लोगों को गिरफ्तारी

सूत्रों के अनुसार, एजेंसी पांच मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में दिल्ली में कुछ जमीनों के अधिग्रहण से जुड़े जीपीए दस्तावेजों को जाली बनाया गया था। यह काम सिद्दीकी से जुड़े ट्रस्ट के इशारे पर हुआ था। इस यूनिवर्सिटी की भूमिका व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल की जांच में सामने आई। एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन डॉक्टर भी शामिल हैं। अल फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उमर-उन-नबी ने पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के बाहर आत्मघाती हमला किया था। इसमें 15 लोग मारे गए थे।

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क्या है पूरा मामला

ईडी ने दिल्ली पुलिस की दो एफआईआर का संज्ञान लिया। 14 नवंबर को पीएमएलए के तहत सिद्दीकी और अल फलाह समूह के खिलाफ मामला दर्ज किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि विश्वविद्यालय और ट्रस्ट ने सिद्दीकी के निर्देश पर झूठे मान्यता और प्रमाणन के दावों से 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की।

सिद्दीकी के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। दिल्ली पुलिस की दोनों एफआईआर झूठी और मनगढ़ंत हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने झूठा दावा किया कि वह यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त है। उसने अपनी एनएएसी (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।

एनएएसी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा वित्त पोषित स्वायत्त निकाय है। यह उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन और प्रत्यायन करता है। ईडी ने कहा कि 1990 के दशक से अल फलाह ग्रुप ने तेजी से विकास किया और एक विशाल शैक्षणिक निकाय में बदल गया।

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