ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 100वें स्थान पर, बच्चों में वेस्टिंग 19 फीसदी, दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा स्कोर
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 23, 2026, 23:57 IST
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026: भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर, बच्चों में वेस्टिंग से बढ़ी चिंता
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर है। भारत का स्कोर 24.1 रहा, जो भुखमरी की गंभीर स्थिति दिखाता है। रिपोर्ट में बच्चों के पोषण को लेकर भी चिंता जताई गई है। भारत में पांच साल से कम उम्र के 19% बच्चे वेस्टिंग से प्रभावित हैं। यानी उनकी लंबाई के मुकाबले वजन काफी कम है।
दक्षिण एशिया में यह दर भारत में सबसे ज्यादा है। हालांकि, बच्चों में बौनेपन की दर में कुछ सुधार हुआ है। यह आंकड़ा घटकर अब 29.3% पर आ गया है। वहीं, केंद्र सरकार पहले भी इस रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई मेथड और आंकड़ों पर सवाल उठा चुकी है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें नंबर पर है। हालांकि, लंबे समय में भारत की स्थिति में सुधार हुआ है। साल 2000 में भारत का स्कोर 38.1 था, जो 2026 में घटकर 24.1 रह गया है। यानी भुखमरी के मामले में भारत ने पहले के मुकाबले प्रगति तो की है, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है।
अब समझिए इस इंडेक्स का गणित। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 100 अंकों के पैमाने पर तैयार होता है। इसमें स्कोर जितना कम होता है, देश की स्थिति उतनी ही बेहतर मानी जाती है। 10 से 19.9 के बीच का स्कोर 'मध्यम' और 20 से 34.9 के बीच का स्कोर 'गंभीर' श्रेणी में आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साल 2012 से लगातार 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। यानी स्कोर में सुधार के बावजूद देश में भुखमरी और कुपोषण की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
भारत में भुखमरी के हालात सुधारने की रफ्तार अब पहले जैसी नहीं रही। आंकड़े देखें तो 2018 में भारत का स्कोर 25.8 था, जो 2026 में घटकर 24.1 पर आ गया। यानी आठ साल में सिर्फ 1.7 अंकों का सुधार हुआ।
वहीं, 2006 से 2012 के बीच महज छह साल में भारत के स्कोर में 8.2 अंकों का सुधार हुआ था। दोनों अवधियों के आंकड़ों की तुलना करें तो साफ दिखता है कि पहले के मुकाबले अब सुधार की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। रिपोर्ट में भी पूरे क्षेत्र में सुधार की धीमी गति का जिक्र किया गया है। इसका असर भारत की स्थिति पर भी पड़ रहा है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में किसी देश की स्थिति सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वहां लोगों को खाना मिल रहा है या नहीं। इसके लिए चार अहम इंडीकेटर्स को देखा जाता है- अंडरन्यूट्रिशन , बच्चों का उम्र के हिसाब से कमजोर होना, लंबाई के मुकाबले कम वजन होना और बाल मृत्यु दर।
भारत की बात करें तो साल 2026 में अंडरन्यूट्रिशन की दर घटकर 9.8% रह गई। आसान भाषा में समझें तो अंडरन्यूट्रिशन का मतलब है कि लोगों को अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पा रही है। यानी खाना मिलने के बावजूद शरीर को जितनी ऊर्जा चाहिए, उतनी नहीं मिल रही।
भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वेस्टिंग की दर 19 फीसदी है। यानी हर 100 में से करीब 19 बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में यह दर भारत में सबसे ज्यादा है। चिंता की बात यह है कि अलग-अलग सालों के आंकड़ों में भी यह दर ऊंची बनी हुई है।
वेस्टिंग क्या है? आसान भाषा में समझें तो जब किसी बच्चे की लंबाई के मुकाबले उसका वजन काफी कम होता है, तो इसे वेस्टिंग कहते हैं। यह शरीर में पोषण की गंभीर कमी का संकेत हो सकता है। ऐसे में बच्चे को सही समय पर पौष्टिक भोजन और जरूरी देखभाल मिलना बेहद जरूरी है।
बच्चों में बौनापन घटा,
भारत में बच्चों की सेहत को लेकर एक अच्छी खबर भी सामने आई है। साल 2026 में बच्चों में बौनेपन की दर घटकर 29.3% रह गई है। बौनापन आमतौर पर लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से जुड़ा होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुधार के साथ भारत पहली बार 'बहुत ऊंचे' स्तर से निकलकर 'ऊंचे' स्तर की श्रेणी में पहुंचा है।
बच्चों की सेहत में सुधार का एक और संकेत उनकी मृत्यु दर में आई गिरावट है। साल 2000 में पांच साल की उम्र पूरी करने से पहले जान गंवाने वाले बच्चों की दर 9.2% थी, जो अब घटकर 2.7% रह गई है। यानी पहले के मुकाबले अब पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतें काफी कम हो रही हैं। ये आंकड़े बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए सुधार की ओर इशारा करते हैं।
भुखमरी के मामले में भारत के कई पड़ोसी देशों ने उससे बेहतर सुधार किया है। नेपाल इसका उदाहरण है। 2018 में नेपाल का स्कोर 18.4 था, जो 2026 में घटकर 14.5 पर आ गया। यानी नेपाल ने 3.9 अंकों का सुधार किया। वहीं, भारत का स्कोर इस दौरान सिर्फ 1.7 अंक ही सुधरा है।
श्रीलंका का स्कोर भी 11.4 से घटकर 10.2 पर आ गया, जबकि बांग्लादेश का स्कोर 20.0 से कम होकर 19.2 रह गया है। दोनों देश भुखमरी के मामले में 'मध्यम' श्रेणी में हैं।
वहीं, पाकिस्तान की स्थिति और खराब हुई है। उसका स्कोर 2018 में 24.0 था, जो 2026 में बढ़कर 25.5 हो गया। पाकिस्तान इस इंडेक्स में 106वें स्थान पर है, यानी रैंकिंग के मामले में वह भारत से भी पीछे है।
बच्चों के पोषण की बात करें तो भारत की स्थिति बांग्लादेश से कमजोर नजर आती है। भारत में हर 100 में से 19 बच्चे वेस्टिंग यानी लंबाई के हिसाब से कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश में यह आंकड़ा 12.9 फीसदी है। बच्चों में बौनेपन की दर और अंडरन्यूट्रिशन के मामले में भी बांग्लादेश की स्थिति बेहतर है। वहां बच्चों में बौनेपन की दर 24 फीसदी और अंडरन्यूट्रिशन की दर 8.2 फीसदी है।
हालांकि, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थिति बेहतर है। भारत में यह दर 2.7 फीसदी है, जबकि बांग्लादेश में 3 फीसदी और पाकिस्तान में 5.6 फीसदी है। यानी बच्चों की सेहत और पोषण के मामले में भारत के सामने अभी बड़ी चुनौती है, लेकिन बाल मृत्यु दर के मामले में उसकी स्थिति इन दोनों देशों से बेहतर है।
केंद्र सरकार ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रैंकिंग और उसे तैयार करने के तरीके पर पहले भी सवाल उठा चुकी है। 5 अगस्त 2026 को महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह इंडेक्स तीन गैर-सरकारी संगठनों की ओर से तैयार किया जाता है।
मंत्री ने इंडेक्स में इस्तेमाल होने वाले चार इंडीकेटर्स पर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, इनमें से तीन इंडीकेटर्स बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े हैं।
ऐसे में सिर्फ इन आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में भुखमरी की स्थिति का सही आकलन करना मुश्किल है। उन्होंने चौथे इंडीकेटर्स यानी अंडरन्यूट्रिशन को मापने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
सरकार ने भुखमरी से निपटने के लिए अपने पक्ष में कई योजनाओं का हवाला दिया है। मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज मिलता है।
इस योजना में करीब 79.09 करोड़ लोग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे लोगों की खाद्य जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, पीएम पोषण योजना भी चलाई जा रही है। इसके तहत करीब 11.20 करोड़ बच्चों को फायदा मिलता है। इस योजना में 10.36 लाख स्कूल शामिल हैं।
सरकार ने मिशन पोषण 2.0 का भी जिक्र किया है। इसमें 18 से ज्यादा मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करते हैं।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में चार इंडीकेटर्स से भुखमरी की स्थिति समझी जाती है। हर इंडीकेटर पोषण की कमी का अलग पहलू दिखाता है।
इसीलिए रिपोर्ट में चारों इंडीकेटर्स को एक साथ देखा जाता है। इससे भुखमरी और कुपोषण की स्थिति की बेहतर तस्वीर सामने आती है।
भारत में भुखमरी की समस्या सिर्फ अनाज की कमी से नहीं जुड़ी है। इसके पीछे कई दूसरी वजहें भी हैं। जैसे, लोगों को संतुलित खाना नहीं मिलना। बार-बार होने वाले संक्रमण भी बच्चों की सेहत बिगाड़ते हैं। कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। साफ पानी और स्वच्छता की कमी भी बड़ी समस्या है।
यानी, सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं है। बच्चों को पौष्टिक खाना मिलना भी जरूरी है। समय पर इलाज और साफ-सफाई की सुविधाएं भी उतनी ही अहम हैं। यही सभी चीजें भारत की हंगर इंडेक्स रैंकिंग को प्रभावित करती हैं।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंक क्या है ?
अब समझिए इस इंडेक्स का गणित। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 100 अंकों के पैमाने पर तैयार होता है। इसमें स्कोर जितना कम होता है, देश की स्थिति उतनी ही बेहतर मानी जाती है। 10 से 19.9 के बीच का स्कोर 'मध्यम' और 20 से 34.9 के बीच का स्कोर 'गंभीर' श्रेणी में आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साल 2012 से लगातार 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। यानी स्कोर में सुधार के बावजूद देश में भुखमरी और कुपोषण की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
सुधार की रफ्तार आखिर धीमी क्यों पड़ गई?
वहीं, 2006 से 2012 के बीच महज छह साल में भारत के स्कोर में 8.2 अंकों का सुधार हुआ था। दोनों अवधियों के आंकड़ों की तुलना करें तो साफ दिखता है कि पहले के मुकाबले अब सुधार की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। रिपोर्ट में भी पूरे क्षेत्र में सुधार की धीमी गति का जिक्र किया गया है। इसका असर भारत की स्थिति पर भी पड़ रहा है।
भुखमरी इंडेक्स के चार पैमाने क्या बताते हैं?
भारत की बात करें तो साल 2026 में अंडरन्यूट्रिशन की दर घटकर 9.8% रह गई। आसान भाषा में समझें तो अंडरन्यूट्रिशन का मतलब है कि लोगों को अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पा रही है। यानी खाना मिलने के बावजूद शरीर को जितनी ऊर्जा चाहिए, उतनी नहीं मिल रही।
बच्चों में वेस्टिंग में दक्षिण एशिया में भारत सबसे आगे
वेस्टिंग क्या है? आसान भाषा में समझें तो जब किसी बच्चे की लंबाई के मुकाबले उसका वजन काफी कम होता है, तो इसे वेस्टिंग कहते हैं। यह शरीर में पोषण की गंभीर कमी का संकेत हो सकता है। ऐसे में बच्चे को सही समय पर पौष्टिक भोजन और जरूरी देखभाल मिलना बेहद जरूरी है।
बच्चों में बौनापन घटा, बाल मृत्यु दर में भी आई कमी
बच्चों की सेहत में सुधार का एक और संकेत उनकी मृत्यु दर में आई गिरावट है। साल 2000 में पांच साल की उम्र पूरी करने से पहले जान गंवाने वाले बच्चों की दर 9.2% थी, जो अब घटकर 2.7% रह गई है। यानी पहले के मुकाबले अब पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतें काफी कम हो रही हैं। ये आंकड़े बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए सुधार की ओर इशारा करते हैं।
पड़ोसी देशों के मुकाबले कहां खड़ा है भारत?
श्रीलंका का स्कोर भी 11.4 से घटकर 10.2 पर आ गया, जबकि बांग्लादेश का स्कोर 20.0 से कम होकर 19.2 रह गया है। दोनों देश भुखमरी के मामले में 'मध्यम' श्रेणी में हैं।
वहीं, पाकिस्तान की स्थिति और खराब हुई है। उसका स्कोर 2018 में 24.0 था, जो 2026 में बढ़कर 25.5 हो गया। पाकिस्तान इस इंडेक्स में 106वें स्थान पर है, यानी रैंकिंग के मामले में वह भारत से भी पीछे है।
बांग्लादेश से तुलना करें तो कहां पीछे है भारत?
हालांकि, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थिति बेहतर है। भारत में यह दर 2.7 फीसदी है, जबकि बांग्लादेश में 3 फीसदी और पाकिस्तान में 5.6 फीसदी है। यानी बच्चों की सेहत और पोषण के मामले में भारत के सामने अभी बड़ी चुनौती है, लेकिन बाल मृत्यु दर के मामले में उसकी स्थिति इन दोनों देशों से बेहतर है।
सरकार ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर क्या कहा?
यह तीन गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रकाशित एक निजी रचना है।
By: सावित्री ठाकुर, राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास
ऐसे में सिर्फ इन आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में भुखमरी की स्थिति का सही आकलन करना मुश्किल है। उन्होंने चौथे इंडीकेटर्स यानी अंडरन्यूट्रिशन को मापने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
पोषण के लिए इन योजनाओं के भरोसे सरकार
इस योजना में करीब 79.09 करोड़ लोग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे लोगों की खाद्य जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, पीएम पोषण योजना भी चलाई जा रही है। इसके तहत करीब 11.20 करोड़ बच्चों को फायदा मिलता है। इस योजना में 10.36 लाख स्कूल शामिल हैं।
सरकार ने मिशन पोषण 2.0 का भी जिक्र किया है। इसमें 18 से ज्यादा मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करते हैं।
रिपोर्ट में इन इंडीकेटर्स को क्यों शामिल किया गया?
- अंडरन्यूट्रिशन: इससे पता चलता है कि कितने लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा।
- बच्चों में वेस्टिंग: इससे बच्चों का वजन उनकी लंबाई के मुकाबले कम होने का पता चलता है।
- बच्चों में स्टंटिंग: इससे बच्चों की उम्र के हिसाब से कम लंबाई का पता चलता है।
- बाल मृत्यु दर: इससे पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों का आकलन होता है।
इसीलिए रिपोर्ट में चारों इंडीकेटर्स को एक साथ देखा जाता है। इससे भुखमरी और कुपोषण की स्थिति की बेहतर तस्वीर सामने आती है।
भारत की रैंकिंग के पीछे कौन-से दूसरे कारण हैं?
यानी, सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं है। बच्चों को पौष्टिक खाना मिलना भी जरूरी है। समय पर इलाज और साफ-सफाई की सुविधाएं भी उतनी ही अहम हैं। यही सभी चीजें भारत की हंगर इंडेक्स रैंकिंग को प्रभावित करती हैं।
FAQ
- ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर है, और उसका स्कोर 24.1 है जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। - भारत में बच्चों में वेस्टिंग और बौनेपन की दर कितनी है?
भारत में बच्चों में वेस्टिंग की दर 19 फीसदी है, जो दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है। बच्चों में बौनेपन की दर 29.3 फीसदी है। - भारत सरकार ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
भारत सरकार ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रैंकिंग और इसे तैयार करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं, यह कहते हुए कि यह तीन गैर-सरकारी संगठनों द्वारा तैयार की गई एक निजी रचना है।
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