भारत के 138 शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित और अमीर शहरों में शामिल, चीन से पिछड़ा भारत
Jitendra Shrivastava | May 18, 2026, 16:46 IST
Photograph: (thesootr)
NEW DELHI. नेचर सिटीज रिपोर्ट में 390 प्रदूषित-समृद्ध शहरों में 138 भारत के हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता सहित कई शहर जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं। चीन स्वच्छ शहरीकरण में भारत से आगे है।
समझें पूरा मामला...
- 390 प्रदूषित शहरों में 138 भारत के हैं।
- नेचर सिटीज ने 5,435 शहरों का किया विश्लेषण।
- भारत जीवाश्म ईंधन पर अभी भी निर्भर है।
- चीन स्वच्छ शहरीकरण में भारत से आगे।
- दिल्ली-मुंबई में स्वच्छ विकास के संकेत मिले।
भारत के प्रदूषित शहरों की रिपोर्ट
शोधकर्ताओं ने उपग्रह आधारित नाइट्रोजन डाइऑक्साइड डेटा (Nitrogen Dioxide Data) और जीडीपी अनुमानों का उपयोग किया। यह अध्ययन वायु प्रदूषण (air pollution) और आर्थिक विकास के बीच के संबंध को उजागर करता है। रिपोर्ट बताती है कि भारत के शहरी केंद्र किस दिशा में जा रहे हैं।
390 शहरों में 138 भारत के
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता पर रिपोर्ट
इन शहरों में परिवहन और बिजली उत्पादन में कोयले और तेल का उपयोग जारी है। उद्योगों में भी स्वच्छ ऊर्जा का रूपांतरण धीमा है। इन महानगरों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए और कदम उठाने की जरूरत है।
polluted rich cities (2)
भारत बनाम चीन: स्वच्छ शहरीकरण
भारत के शहर अभी भी जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन पर निर्भर हैं। यह निर्भरता प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बन रही है। भारत को स्वच्छ ऊर्जा नीतियों में तेजी लानी होगी।
भारत के 5 सबसे अमीर शहर शामिल
कोलकाता पूर्वी भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है। बेंगलुरु (Bengaluru) को 'भारत की सिलिकॉन वैली' (Silicon Valley of India) कहा जाता है। चेन्नई (Chennai) 7.05 लाख करोड़ रुपए की जीडीपी के साथ 'ऑटो कैपिटल ऑफ इंडिया' है।
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता खतरनाक
स्वच्छ भविष्य की जरूरत
FAQ
- नेचर सिटीज रिपोर्ट में भारत के कितने शहरों को प्रदूषित और अमीर बताया गया है?
नेचर सिटीज (Nature Cities) में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर के 390 ऐसे शहरों में जहां आर्थिक विकास के साथ-साथ वायु प्रदूषण (air pollution) भी बढ़ा है, उनमें से 138 शहर अकेले भारत के हैं। यह संख्या कुल का लगभग 35.4% है। इस अध्ययन में 2019 से 2024 के बीच उपग्रह आधारित नाइट्रोजन डाइऑक्साइड डेटा और जीडीपी अनुमानों का उपयोग करते हुए विश्व के 5,435 शहरों का विश्लेषण किया गया। यह आंकड़ा भारत की शहरी विकास नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है और दर्शाता है कि देश के अधिकांश शहर अभी भी जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भर हैं। - दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की स्थिति रिपोर्ट में क्या बताई गई है?
नेचर सिटीज के अध्ययन में दिल्ली (Delhi), मुंबई (Mumbai) और कोलकाता (Kolkata) जैसे महानगरों में स्वच्छ विकास के कुछ रुझान देखे गए हैं। इसका अर्थ यह है कि इन शहरों में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू हुए हैं। हालांकि ये शहर पूरी तरह जीवाश्म ईंधन मुक्त नहीं हुए हैं और यहां परिवहन, उद्योग तथा बिजली उत्पादन में कोयला व तेल का उपयोग अभी भी जारी है। इन महानगरों को और अधिक तेजी से हरित ऊर्जा (green energy) की ओर बढ़ना होगा ताकि वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार आ सके। - भारत स्वच्छ शहरीकरण में चीन से क्यों पिछड़ रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, चीन (China) ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिससे उसके शहरों में आर्थिक विकास के साथ प्रदूषण घटा है। इसके विपरीत, भारत के शहरों में अधिकांश बिजली उत्पादन अभी भी कोयले पर आधारित है और परिवहन क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल वाहनों की भारी संख्या है। उद्योगों में भी स्वच्छ ईंधन का रूपांतरण धीमा है। भारत को अपनी स्वच्छ शहरीकरण (clean urbanization) नीतियों को तेज करना होगा, नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) को बढ़ावा देना होगा और इलेक्ट्रिक परिवहन को प्रोत्साहित करना होगा, तभी वह वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।
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