तलाक के बदले भारतीय महिला को 85 करोड़ का हर्जाना मिला

Jitendra Shrivastava | Jun 05, 2026, 19:18 IST
Share
divorce case 85 crore
Photograph: (thesootr)

INTERNATIONAL DESK. वर्षा गोहिल को 23 साल की कानूनी लड़ाई के बाद ब्रिटेन में 66 लाख पाउंड यानी 85 करोड़ रुपए का हर्जाना मिला। पति की मनी लॉन्ड्रिंग ने पलटा पूरा केस।

ऐसे समझें पूरा मामला...

  • 2002 में तलाक, 270,000 पाउंड में हुआ समझौता।
  • भद्रेश को 2011 में 10 साल की जेल की सजा।
  • 28 मिलियन पाउंड की छुपाई गई संपत्ति उजागर।
  • 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केस दोबारा खोला।
  • हाई कोर्ट ने 66 लाख पाउंड वर्षा को दिलाए।
ब्रिटेन में भारतीय मूल की वर्षा गोहिल ने 23 साल की अथक कानूनी लड़ाई के बाद 85 करोड़ रुपए का हर्जाना जीता। यह मामला तलाक (Divorce), मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और न्याय की बड़ी मिसाल है। जो रकम 2002 में सिर्फ 3.5 करोड़ थी, वह 2026 में 85 करोड़ बन गई।

ये था तलाक का पूरा मामला

वर्षा गोहिल ने साल 2002 में तलाक (Divorce) की अर्जी दी थी। उन्होंने अपने पति भद्रेश गोहिल पर गलत व्यवहार का आरोप लगाया। उस समय उनके तीन बच्चे थे।

दोनों के बीच एक वित्तीय समझौता (Financial Settlement) हुआ। भद्रेश ने वर्षा को 270,000 पाउंड और एक कार दी। भारतीय रुपयों में यह रकम लगभग 3.5 करोड़ थी। तब वर्षा को लगा कि पति ने सभी संपत्ति का खुलासा नहीं किया। उनके मन में संदेह था, लेकिन सबूत नहीं थे।

मनी लॉन्ड्रिंग से पलटा मामला

वर्षा का शक तब और पक्का हो गया जब एक बड़ा मामला सामने आया। नाइजीरिया के पूर्व गवर्नर जेम्स इबोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) केस में भद्रेश का नाम आया।

अधिकारियों ने आरोप लगाया कि भद्रेश ने ऑफशोर खातों के जरिए लाखों पाउंड ट्रांसफर किए। लंबी जांच के बाद उन पर जालसाजी और धोखाधड़ी साबित हुई। साल 2011 में ब्रिटिश अदालत ने उन्हें 10 साल जेल की सजा सुनाई।

छुपाई गई संपत्ति का खुलासा

आपराधिक जांच के दौरान भद्रेश की करोड़ों की संपत्ति सामने आई। यह संपत्ति तलाक के समय वर्षा से छुपाई गई थी। वकीलों ने लगभग 28 मिलियन पाउंड की संपत्ति को फ्रीज किया।

आरोप था कि इसे कई देशों की कंपनियों के नेटवर्क से छिपाया गया था। इन खुलासों ने वर्षा की कानूनी लड़ाई को नई ताकत दी। अब उनके पास सबूत थे और इरादा भी मजबूत था।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

यह विवाद ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। जजों ने वर्षा को मूल वित्तीय समझौते (Original Settlement) को फिर से खोलने की अनुमति दी।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जो पति-पत्नी संपत्ति का खुलासा नहीं करते उन्हें उसका लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह निर्णय भारतीय मूल की महिलाओं के लिए प्रेरणा बना।

हाई कोर्ट में अंतिम लड़ाई

इसके बाद भी लड़ाई खत्म नहीं हुई थी। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस का तर्क था कि संपत्ति अपराध से बनाई गई है। इसलिए उसे जब्त किया जाए। लेकिन वर्षा ने तर्क दिया कि कुछ संपत्ति शादी के दौरान वैध तरीके से अर्जित की गई थी।

हाई कोर्ट (High Court) में जस्टिस विलियम्स ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि एक हिस्सा वैध वैवाहिक संपत्ति (Marital Assets) था।

85 करोड़ की जीत और न्याय

जस्टिस विलियम्स ने 66 लाख पाउंड की बेदाग संपत्ति की पहचान की। यह रकम वर्षा गोहिल को दिलाई गई। भारतीय मुद्रा में यह लगभग 85 करोड़ रुपए है।

जज ने भद्रेश को "बड़े स्तर का बेईमान" करार दिया। उन्होंने कहा कि पति का आचरण बेईमानी की चरम सीमा पर था। यूके की अपील अदालत ने भी यह फैसला बरकरार रखा। अब कोई अपील नहीं होगी और यह केस हमेशा के लिए बंद हो गया।

FAQ

  1. वर्षा गोहिल को इतनी बड़ी रकम कैसे मिली?
    वर्षा गोहिल को यह रकम 23 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली। उनके पति भद्रेश गोहिल ने तलाक के दौरान अपनी संपत्ति का पूरा खुलासा नहीं किया था। बाद में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले में भद्रेश की छुपाई गई संपत्ति सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में मूल समझौते को फिर से खोलने की अनुमति दी। हाई कोर्ट ने 66 लाख पाउंड यानी 85 करोड़ रुपये वर्षा को दिलाए।
  2. भद्रेश गोहिल को जेल क्यों हुई और इसका तलाक केस से क्या संबंध है?
    भद्रेश गोहिल को 2011 में नाइजीरियाई गवर्नर के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी पाया गया। उन्हें जालसाजी और धोखाधड़ी की साजिश के लिए 10 साल की जेल हुई। इस आपराधिक मामले में उनकी करोड़ों की संपत्ति सामने आई जो तलाक (Divorce) के समय छुपाई गई थी। इससे वर्षा गोहिल के दावे को मजबूत आधार मिला। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने वर्षा को पुराना समझौता चुनौती देने का अधिकार दिया।
  3. क्या यह केस भारत में भी कानूनी मिसाल बन सकता है?
    वर्षा गोहिल का तलाक केस (Divorce Case) ब्रिटेन में कानूनी इतिहास में दर्ज हो गया है। इस फैसले का मूल सिद्धांत है कि अगर कोई पति या पत्नी संपत्ति छुपाए तो उसे उसका लाभ नहीं मिलना चाहिए। भारत में भी वैवाहिक संपत्ति (Marital Assets) के मामलों में पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। यह केस दुनिया भर में उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। यह साबित करता है कि न्याय देर से आए लेकिन आता जरूर है।
ये खबरें भी पढ़ें...

अदालतों में AI के उपयोग पर ड्राफ्ट नियम जारी, 20 जून तक दे सकेंगे सुझाव

Apple WWDC 2026: सैमसंग को टक्कर देने ऐपल ला रहा खास AI टेक, 8 जून को होगा मेगा इवेंट

किस पंगे में फंस गए खान सर, जा सकते हैं 10 साल के लिए जेल!

Google Debug Project: गूगल ला रहा मच्छर से मच्छर को मारने की नई रोबोटिक ट्रिक

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • ब्रिटेन
  • मनी लॉन्ड्रिंग
  • तलाक
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा