कानपुर छेड़छाड़ केस: ‘जीजू ने सपने में छेड़ा था’; बयान के बाद एयरफोर्स कर्मी 7 साल बाद बरी
Pawan Modiya | Mar 10, 2026, 23:45 IST
Photograph: (the sootr)
कानपुर छेड़छाड़ केस में बड़ा मोड़। साली ने कोर्ट में कहा—छेड़छाड़ सच में नहीं, सपने में हुई थी। 7 साल बाद एयरफोर्स कर्मी को बरी कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश के कानपुर छेड़छाड़ केस (Kanpur Molestation Case) में अदालत ने सात साल बाद एक अहम फैसला सुनाते हुए एयरफोर्स के एक कर्मी को बरी कर दिया। इस मामले में नाबालिग साली ने अपने जीजा पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके चलते आरोपी को जेल भी जाना पड़ा था।
हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि उसे सपने में ऐसा महसूस हुआ था कि जीजू ने उसे पकड़ लिया, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ था। इस बयान के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। यह मामला पॉक्सो एक्ट केस (POCSO Act Case) से भी जुड़ा हुआ था, जिसके कारण शुरुआत में आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
यह मामला वर्ष 2019 का है। बिठूर में रहने वाले एयरफोर्स कर्मी की शादी 10 फरवरी 2019 को बिधनू क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद वह अपनी पत्नी को लेने ससुराल गया था। शादी के बाद चौथी की रस्म के दौरान पत्नी की छोटी बहन यानी साली भी उनके साथ आई थी। परिवार के अनुसार सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन 8 मार्च 2019 की रात करीब 9 बजे अचानक स्थिति बदल गई।
एफआईआर के अनुसार, उस रात साली अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर बड़ी बहन यानी आरोपी की पत्नी कमरे में पहुंची। तब साली ने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) की और उसे पकड़ लिया।
इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, रिपोर्ट तुरंत दर्ज नहीं हुई और लगभग पांच महीने बाद 3 अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में मामला दर्ज कराया गया।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसके बाद 29 सितंबर 2019 को आरोपी एयरफोर्स कर्मी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उसे लगभग 19 दिन जेल में रहना पड़ा। बाद में 17 अक्टूबर 2019 को अदालत से जमानत मिल गई। इस दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर चार्जशीट भी दाखिल कर दी।
विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोपी पर चार मुख्य आरोप लगाए गए थे
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता ने अदालत में बयान देते हुए कहा—
पीड़िता ने आगे कहा कि उसने सपने को सच समझ लिया और घबराकर शोर मचा दिया। बाद में परिवार ने उसी आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।
अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता और बड़ी बहन ने भी यह स्वीकार किया कि शिकायत भ्रमवश दर्ज हो गई थी। इस बयान के बाद मामले की पूरी दिशा बदल गई। अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही अपने बयान से पीछे हट गया है, तो आरोप साबित नहीं किए जा सकते।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने एयरफोर्स कर्मी को सात साल बाद बरी (Acquitted) कर दिया।
आरोपी एयरफोर्स कर्मी ने अदालत में दावा किया कि उसके ससुर ने प्रॉपर्टी विवाद (Property Dispute) के कारण उसके खिलाफ यह मामला दर्ज कराया था। उसका कहना था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही ससुर ने उस पर दबाव बनाया कि वह अपनी जमीन और मकान पत्नी तथा उसकी बहन के नाम कर दे। जब उसने ऐसा करने से इनकार किया, तो उस पर झूठा मामला दर्ज करा दिया गया।
यह खबरें भी पढ़िए...
MPPSC ने निकाली ADPO भर्ती लेकिन कैबिनेट के फैसले के बाद भी कम पद, निगेटिव मार्किंग भी लागू
विजयपुर विधानसभा सीट विवाद पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले- कांग्रेस नेताओं को अदालत की समझ कम
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर बाजार में दिखा, बढ़ सकते हैं कचोरी-समोसे और चाय के दाम
निकाय चुनाव में उम्मीदवार के लिए दो संतान की बाध्यता खत्म, विधानसभा ने पारित किया विधेयक
हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि उसे सपने में ऐसा महसूस हुआ था कि जीजू ने उसे पकड़ लिया, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ था। इस बयान के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। यह मामला पॉक्सो एक्ट केस (POCSO Act Case) से भी जुड़ा हुआ था, जिसके कारण शुरुआत में आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
क्या था पूरा मामला?
एफआईआर के अनुसार, उस रात साली अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर बड़ी बहन यानी आरोपी की पत्नी कमरे में पहुंची। तब साली ने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) की और उसे पकड़ लिया।
इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, रिपोर्ट तुरंत दर्ज नहीं हुई और लगभग पांच महीने बाद 3 अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस कार्रवाई और 19 दिन की जेल
कोर्ट में लगे थे चार गंभीर आरोप
- पीड़िता के साथ मारपीट करना
- बदनाम करने का प्रयास करना
- छेड़छाड़ करना
- लैंगिक हमला (Sexual Assault)
कोर्ट में बदला पीड़िता का बयान
मैं उस समय एंटीबायोटिक दवा लेकर सो रही थी। दवा की वजह से आधी नींद में थी। मुझे सपने में ऐसा लगा कि जीजू ने मुझे पकड़ लिया है।
परिवार ने भी माना- भ्रम में दर्ज हुआ केस
लंबी सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने एयरफोर्स कर्मी को सात साल बाद बरी (Acquitted) कर दिया।
आरोपी का दावा- प्रॉपर्टी विवाद की वजह से केस
यह खबरें भी पढ़िए...
MPPSC ने निकाली ADPO भर्ती लेकिन कैबिनेट के फैसले के बाद भी कम पद, निगेटिव मार्किंग भी लागू
विजयपुर विधानसभा सीट विवाद पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले- कांग्रेस नेताओं को अदालत की समझ कम
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर बाजार में दिखा, बढ़ सकते हैं कचोरी-समोसे और चाय के दाम
निकाय चुनाव में उम्मीदवार के लिए दो संतान की बाध्यता खत्म, विधानसभा ने पारित किया विधेयक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman