लोकसभा सीट परिसीमन 2026: 1947 से अब तक कब और कैसे हुआ बदलाव, जानिए सीटों का इतिहास
Jitendra Shrivastava | Apr 17, 2026, 17:27 IST
Photograph: (thesootr)
NEW DELHI. लोकसभा सीटें (Lok Sabha Seats) पहले भी बदली हैं। 1952 में 489 से शुरू हुआ सफर 1980 में 543 पर थमा। अब परिसीमन (Delimitation) से 850 सीटें होने की संभावना है।
News In Short
- 1952 में पहले चुनाव में 489 सीटें थीं।
- 1980 में 543 सीटें स्थायी रूप से तय हुईं।
- 1976 में सीटें 'फ्रीज' की गईं, 2026 तक जारी।
- परिसीमन से सीटें 850 तक हो सकती हैं।
- यह छठी बार होगा जब लोकसभा सीटें बदलेंगी।
News In Detail
पहला चुनाव: 489 सीटों का दौर
1957 और 1962: धीरे-धीरे बढ़ता प्रतिनिधित्व
1967: एक बड़ा उछाल, 520 सीटें
1971 और 1977: घटत-बढ़त का राजनीतिक दौर
1980: 543 सीटों का स्थायी आंकड़ा
1976 का 'फ्रीज': एक ऐतिहासिक निर्णय
परिसीमन हुआ, सीटें नहीं बढ़ीं
pm modi delimitation
2026 और आगे: क्या बदलेगा?
सरकार का तर्क है कि सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 हो जाएंगी। यह सिर्फ संख्या का मामला नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र की गुणवत्ता (Quality of Democracy), राज्यों के बीच शक्ति संतुलन और देश के संसदीय भविष्य से जुड़ा है।
FAQ
- लोकसभा सीटों (Lok Sabha Seats) की संख्या कितनी बार बदली है?
आजादी के बाद से अब तक लोकसभा सीटों की संख्या पांच बार बदली है। पहले आम चुनाव (1952) में 489 सीटें थीं। इसके बाद 1957 में 494, 1967 में 520, 1971 में 518, 1977 में 542 और 1980 में 543 सीटें हो गईं। 1976 में 'फ्रीज' (Freeze) के बाद से अब तक यही संख्या बरकरार है। अब परिसीमन (Delimitation) के बाद यह संख्या छठी बार बदल सकती है। - परिसीमन (Delimitation) क्या है और यह महिला आरक्षण बिल (Women's Reservation Bill) से कैसे जुड़ा है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाती हैं। महिला आरक्षण बिल के अनुसार लोकसभा में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, लेकिन यह व्यवस्था तभी लागू होगी जब नया परिसीमन हो जाए। इसीलिए दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हैं। सरकार के अनुसार परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 हो जाएंगी। - 1976 का 'फ्रीज' (Freeze) क्यों लागू किया गया और इसका दक्षिण भारत (South India) पर क्या असर पड़ा?
1976 में तत्कालीन सरकार ने परिवार नियोजन (Family Planning) को प्रोत्साहन देने और राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया। इसका अर्थ यह था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण किया, जैसे कि दक्षिण भारत के राज्य — उन्हें इसका फायदा मिला। लेकिन अब अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो उत्तर भारत के घनी आबादी वाले राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं, जिससे दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व (South India Representation) में कमी आने की आशंका है। यही इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद है।
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