घर संभालने वाले पुरुषों को लेकर मद्रास HC की बड़ी टिप्पणी, हाउस वाइफ हो सकती हैं तो हाउस हसबैंड क्यों नहीं?
Arohi Raj | Sootr Creatives | Sept 25, 2026, 19:34 IST
मद्रास HC की घर संभालने वाले पुरुषों को लेकर बड़ी टिप्पणी।
चेन्नई.मद्रास हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि घर संभालने वाला पुरुष भी हाउस हसबैंड हो सकता है। कोर्ट ने घरेलू जिम्मेदारियों को केवल महिलाओं से जोड़ने पर सवाल उठाया है। पीठ ने कहा कि परिवार संभालना किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं है।
यह मामला पुडुचेरी में रहने वाले डॉक्टर दंपति से जुड़ा था। दोनों की शादी साल 2011 में हुई थी। शादी के बाद पति ने मेडिकल की पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने MD और DM कार्डियोलॉजी की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान पत्नी ने घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली।
पत्नी ने परिवार की जिम्मेदारी के लिए अपना करियर पीछे रखा। दूसरी ओर पति अपनी पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ते रहे। बाद में पति पेशेवर रूप से सफल हो गए। इसके बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। दोनों पांच साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे।
कोर्ट ने
मामले की सुनवाई जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम. डी. सुमति ने की। सुनवाई के दौरान घरेलू जिम्मेदारियों और परिवार में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई।
पीठ ने कहा कि अगर महिला घर संभाल सकती है, तो पुरुष भी कर सकता है। अदालत ने हाउस हसबैंड की अवधारणा को सामान्य मानने की बात कही। कोर्ट ने कहा कि होममेकर शब्द किसी एक जेंडर के लिए नहीं है।
अदालत ने घरेलू काम के आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया है। परिवार संभालने में समय, मेहनत और त्याग लगता है। कोर्ट ने कहा कि इस योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का भी हवाला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। अदालत ने कहा कि परिवार की देखभाल करने वाला कोई भी व्यक्ति होममेकर है।
कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। अदालत के मुताबिक पति पढ़ाई के दौरान व्यवस्था से सहज थे। उस समय पत्नी घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
बाद में पति के करियर में सफलता मिली। इसके बाद वैवाहिक रिश्ते में बदलाव आने लगा। पत्नी की पेशेवर क्षमताएं परिवार की वजह से सीमित हुईं। उन्होंने पति की पढ़ाई के दौरान परिवार को प्राथमिकता दी थी।
अदालत ने माना कि दोनों का रिश्ता पूरी तरह टूट चुका था। कोर्ट के मुताबिक अब शादी को बचाना संभव नहीं था। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का पुराना आदेश रद्द कर दिया।
इसके बाद हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत तलाक मंजूर हुआ। मामला लंबे समय से अदालत में लंबित था। इसलिए छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि भी माफ कर दी गई।
तलाक के साथ पति पर आर्थिक जिम्मेदारी भी तय की गई। उन्हें पत्नी और दोनों बच्चों के लिए कुल 2.5 करोड़ रुपये देने होंगे। पत्नी के खाते में 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे। यह रकम तीन महीने के भीतर जमा करनी होगी। इसके अलावा दोनों बच्चों के नाम 50-50 लाख रुपये जमा होंगे।
बच्चों के नाम यह रकम FD में रखी जाएगी। यह राशि अगले एक साल के भीतर जमा करनी होगी। पत्नी को FD से मिलने वाला ब्याज निकालने का अधिकार होगा। वह हर छह महीने में यह ब्याज निकाल सकेंगी।
इस रकम का इस्तेमाल बच्चों के पालन-पोषण में होगा। बच्चे बालिग होने पर अपनी मूल राशि निकाल सकेंगे। कोर्ट ने आर्थिक शर्तों को तलाक की डिक्री से जोड़ा है। शर्तें पूरी होने के बाद ही डिक्री प्रभावी मानी जाएगी।
पत्नी ने परिवार की जिम्मेदारी के लिए अपना करियर पीछे रखा। दूसरी ओर पति अपनी पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ते रहे। बाद में पति पेशेवर रूप से सफल हो गए। इसके बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। दोनों पांच साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे।
कोर्ट ने हाउस हसबैंड को लेकर क्या कहा?
पीठ ने कहा कि अगर महिला घर संभाल सकती है, तो पुरुष भी कर सकता है। अदालत ने हाउस हसबैंड की अवधारणा को सामान्य मानने की बात कही। कोर्ट ने कहा कि होममेकर शब्द किसी एक जेंडर के लिए नहीं है।
अदालत ने घरेलू काम के आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया है। परिवार संभालने में समय, मेहनत और त्याग लगता है। कोर्ट ने कहा कि इस योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का भी हवाला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। अदालत ने कहा कि परिवार की देखभाल करने वाला कोई भी व्यक्ति होममेकर है।
पति के करियर में आगे बढ़ने पर बदले हालात
बाद में पति के करियर में सफलता मिली। इसके बाद वैवाहिक रिश्ते में बदलाव आने लगा। पत्नी की पेशेवर क्षमताएं परिवार की वजह से सीमित हुईं। उन्होंने पति की पढ़ाई के दौरान परिवार को प्राथमिकता दी थी।
हाई कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दी
इसके बाद हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत तलाक मंजूर हुआ। मामला लंबे समय से अदालत में लंबित था। इसलिए छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि भी माफ कर दी गई।
पति को देने होंगे 2.5 करोड़ रुपये
बच्चों के नाम यह रकम FD में रखी जाएगी। यह राशि अगले एक साल के भीतर जमा करनी होगी। पत्नी को FD से मिलने वाला ब्याज निकालने का अधिकार होगा। वह हर छह महीने में यह ब्याज निकाल सकेंगी।
इस रकम का इस्तेमाल बच्चों के पालन-पोषण में होगा। बच्चे बालिग होने पर अपनी मूल राशि निकाल सकेंगे। कोर्ट ने आर्थिक शर्तों को तलाक की डिक्री से जोड़ा है। शर्तें पूरी होने के बाद ही डिक्री प्रभावी मानी जाएगी।
- यह मामला किस डॉक्टर दंपति से जुड़ा है?
यह मामला पुडुचेरी में रहने वाले एक डॉक्टर दंपति से जुड़ा है, जिनकी शादी साल 2011 में हुई थी। - कोर्ट ने हाउस हसबैंड के संबंध में क्या कहा?
कोर्ट ने हाउस हसबैंड की अवधारणा को सामान्य मानकर कहा कि यदि एक महिला घर संभाल सकती है, तो पुरुष भी ऐसा कर सकता है। अदालत ने घरेलू काम के आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया। - तलाक के साथ पति को किस प्रकार की आर्थिक जिम्मेदारी दी गई है?
तलाक के साथ पति को पत्नी और दोनों बच्चों के लिए कुल 2.5 करोड़ रुपये देने होंगे, जिसमें पत्नी के खाते में 1.5 करोड़ रुपये और दोनों बच्चों के नाम 50-50 लाख रुपये जमा करने की शर्त है।
जयपुर में एयर इंडिया की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, क्या है Squawk 7500 कोड और कैसे भेजा जाता है अलर्ट?
By Saurabh Mishra
छत्तीसगढ़ के आईएएस अफसर एस जयवर्धन को मिली केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, गृह मंत्रालय में बने उप सचिव
By VINAY VERMA
स्कीम 171 के 6 हजार प्लाटधारक IDA से होंगे मुक्त, सीएम से हो गई चर्चा, आंदोलन टला
By Sanjay Gupta
महीने में दूसरी बार साय कैबिनेट, धान खरीदी की तारीख और समर्थन मूल्य पर हो सकता है बड़ा ऐलान, कर्मचारियों को DA की उम्मीद
By VINAY VERMA
सनातन हिंदू एकता रथयात्रा में धीरेंद्र शास्त्री ने उठाए कई मुद्दे, गरबा और बुर्के पर बयान
By Anshika Singh Chauhan
सूर्यकांत ने उधारी के 5 करोड़ से किया 500 करोड़ का स्कैम, अनिल टुटेजा ने वाट्सएप पर कहा इस बारे में अवेयर हैं सीएम
By Arun Tiwari
सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी की आपत्ति मंजूर, अब 29 अक्टूबर को देना होगा सबूत
By Ratan Kumar Mishra