BJP का साथ देकर मसीह फंसे, सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने का चलेगा केस

चंडीगढ़ में मेयर के चुनाव में गड़बड़ी करने वाले पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ झूठा बयान देने के केस में मुकदमा चलाने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी होगा। धारा 340 के तहत चलेगा केस।

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Marut raj
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भोपाल.  चंडीगढ़ में मेयर के चुनाव को लेकर चल रही कानूरी लड़ाई मंगलवार को खत्म हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने 

आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया है। कोर्ट ने आप नेता और याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार के पक्ष में 12 वोट और 8 वोट को जोड़कर 20 वोट मानते हुए मेयर घोषित किया। सुप्रीम कोर्ट ने 142 के तहत विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया। शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़े वीडियो देखने के बाद अपना फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनिल मसीह ये बता नहीं पाए कि वोट कहां डिफेस किए गए। कोर्ट ने अपने फैसले में अंतिम पैरा में कहा कि जो मेयर निर्वाचित हुए थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। अदालत ने कहा कि मौजूदा सूरत में अब फिर से काउंटिंग कराने की जरूरत नहीं है।

मसीह के खिलाफ झूठे बयान का मुकदमा

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले घोषित किए गए मेयर चुनाव के रिजल्ट को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने चुनाव अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ झूठा बयान देने के केस में मुकदमा चलाने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया। कुलदीप कुमार के वकील गुरमिंदर सिंह के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैलेट पेपर पर निशान जाहिर तौर पर पीठासीन अधिकारी द्वारा लगाए गए हैं, जिसके आधार पर वोट अवैध घोषित किए गए।  कानून के मुताबिक, पीठासीन अधिकारी ने महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन किया है और उन पर धारा 340 के तहत कार्यवाही शुरू की गई है। वकील का कहना है कि गलत बयान देने पर मसीह के खिलाफ कोर्ट ने "अदालत की अवमानना" की कार्रवाई शुरू करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। 

 जानिए सीआरपीसी की धारा 340 क्या है

धारा 340 के अंतर्गत किसी मामले के पक्ष सबूतों को बाधित करने या झूठा बयान देकर अदालत का समय बर्बाद करना और न्याय में देरी करने पर, कार्रवाई होती है। इसके तहत अगर कोई सबूतों के साथ छेड़छाड़ या नुकसान पहुंचाता है या फिर गलत बयान देकर न्याय की स्थिति को मोड़ने का प्रयास करता है। तो उसके तहत आरोपी पर सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई की जाती है।

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 30 जनवरी को चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। इसमें बीजेपी के मनोज सोनकर को 16 वोट और आप-कांग्रेस के साझा उम्मीदवार कुलदीप कुमार को 12 वोट मिले थे। इस दौरान रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह ने 8 वोटों को अवैध करार दिया था। जब ये मामला सामने आया तो कांग्रेस और आप सुप्रीम कोर्ट चली गई। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने 5 फरवरी को सुनवाई की और अनिल मसीह पर सख्त लहजा अपनाया। 

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ऐसे हुई थी चुनाव में गड़बड़ी

चंडीगढ़ नगर निगम में कुल पार्षदों की संख्या 36 है। मेयर पद पर जीतने के लिए 19 वोट चाहिए होते हैं। ऐसे में आप कैंडीडेट को 12 वोट मिले थे और 8 वोटों को अवैध घोषित कर दिया गया था। अगर वोटों को अवैध घोषित नहीं किया जाता तो आप उम्मीदवार को 20 वोट मिलते और उसकी जीत होती। BJP | कोर्ट में झूठ बोलने का केस | Masih | Supreme Court

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