एमपी में बांग्लादेशी नागरिकों को मिले 70 फर्जी पासपोर्ट, STF जांच में डाबरा मठ का कनेक्शन सामने आया
Arohi Raj | Sept 22, 2026, 19:17 IST
मध्यप्रदेश STF ने बांग्लादेशी नागरिकों को जारी 70 फर्जी पासपोर्ट का रैकेट पकड़ा है।
मध्यप्रदेश एसटीएफ ने बांग्लादेशी नागरिकों को जारी 70 फर्जी पासपोर्ट का रैकेट पकड़ा है। ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर से 2021 से 2023 के बीच ये पासपोर्ट बनवाए गए थे। मुख्य आरोपी रियाल चौधरी और नसीम अख्तर समेत पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। डबरा गांव के एक बौद्ध मठ के पते पर 17 फर्जी पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है। एसटीएफ अब सबकी पहचान और यात्रा इतिहास खंगाल रही है।
मध्यप्रदेश (MP) में बांग्लादेशी नागरिकों को 70 फर्जी भारतीय पासपोर्ट जारी हुए थे। इस पूरे रैकेट की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अब परत दर परत जांच कर रही है। आरोपियों ने पूछताछ में चौंकाने वाला दावा किया। उनके मुताबिक भारतीय पासपोर्ट बनवाना बांग्लादेश से आसान है। साथ ही विदेश में इसका वजन भी ज्यादा माना जाता है। आप सोच रहे होंगे, आखिर यह दावा कितना सच है?
एसटीएफ (STF यानी स्पेशल टास्क फोर्स) ने दिल्ली और उल्हासनगर से दो पासपोर्ट हैंडलर पकड़े थे। ये दोनों बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेज दिलाते थे। STF अब इसी ज्यादा वजन वाले दावे को खंगाल रही है। यही दावा अब जांच की सबसे बड़ी कड़ी बन गया है।
मध्यप्रदेश STF 70 फर्जी पासपोर्ट के मामले की जांच कर रही है। ये पासपोर्ट 2021 से 2023 के बीच बांग्लादेशी नागरिकों को जारी हुए थी। पासपोर्ट ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर से बनवाए गए थे। अब तक पांच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। डाबरा के एक बौद्ध मठ के पते पर 17 पासपोर्ट बने मिले थे।
गिरफ्तार पांचों में दो नाम अहम हैं, रियाल चौधरी और नसीम अख्तर। दोनों को दलाल यानी पासपोर्ट हैंडलर बताया गया है। बाकी तीन गिरफ्तार लोग खुद पासपोर्ट धारक हैं। ये तीनों उन्हीं फर्जी पासपोर्ट पर सालों से भारत में रह रहे थे। असली पहचान छिपाकर आम जिंदगी जीना, यही इनका तरीका था।
सितंबर के पहले हफ्ते में खुफिया इनपुट पर यह गैंग पकड़ी गई थी। भोपाल के पासपोर्ट सेवा केंद्र का कर्मचारी भी शक के घेरे में है। वह ठेके पर काम करता था। STF अब उसकी भूमिका बारीकी से जांच रही है। अगर उसकी संलिप्तता साबित हुई, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
मुख्य आरोपी रियाल चौधरी 2017 से फर्जी पासपोर्ट पर भारत में रह रहा था। जांच में पता चला कि उसने 69 अन्य लोगों के पासपोर्ट बनवाए थे। नसीम अख्तर के लैपटॉप से भी अहम सुराग मिले हैं। उससे डबरा से जुड़े पांच और बैतूल से जुड़े पांच पासपोर्ट का पता चला था। यानी दोनों मिलकर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच अब ग्वालियर जिले के डाबरा तहसील तक पहुंच गई है। यहां धाई गांव में एक बौद्ध मठ है। गांव वालों को याद है, कुछ साल पहले कुछ अजनबी यहां रुके थे। वे एक अनजानी भाषा बोलते थे। गांव वालों से उनका संपर्क बहुत कम था। इसी मठ के पते पर 17 भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए थे। हैरानी की बात है कि कोई भी धारक असल में डबरा का निवासी नहीं है। STF के मुताबिक, अब तक जितने लोगों का पता चला है। वे सभी बांग्लादेशी नागरिक निकले। आखिर एक ही पता, इतने पासपोर्ट का आधार कैसे बना? यही अब जांच के केंद्र में है।
जांच के दायरे में आए कई पासपोर्ट पर विदेश यात्रा की भी बात सामने आई है। थाईलैंड, चीन और भूटान समेत कई देशों की यात्रा दर्ज होना पाया गया। असली पहचान परखने के लिए अब डिप्लोमैटिक चैनल भी खंगाले जा रहे हैं। हर देश से जवाब आने पर ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
कुछ आवेदनों में मोबाइल नंबर आवेदक के नाम पर नहीं थे। STF अब आधार, नगर निगम और पंचायत रिकॉर्ड भी जांच रही है। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे फर्जी पहचान बनाई गई थी।
STF के एसपी (SP यानी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) राजेश भदौरिया ने बताया कि पांच टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें पूरे देश में नेटवर्क से जुड़े लोगों को तलाश रही हैं। उन्होंने आगे की जानकारी साझा करने से इनकार किया।
STF अब यह भी जांच रही है कि क्या रैकेट सिर्फ पासपोर्ट तक सीमित था? जांच में अवैध घुसपैठ और ठिकाने की कड़ियां भी जोड़ी जा रही हैं। साथ ही पहचान बनाने और विदेश यात्रा के एंगल भी देखे जा रहे हैं। हर कड़ी जुड़ने पर ही पूरा सच सामने आएगा। यहीं से इस मामले की असली गहराई सामने आ सकती है।
यह मामला सिर्फ 70 पासपोर्ट का नहीं, बल्कि देश की पहचान-व्यवस्था की सुरक्षा का सवाल है। आधार, पंचायत और पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसे सरकारी सिस्टम कितनी आसानी से चकमा खा सकते हैं, यह मामला यही दिखाता है। यह हर नागरिक की चिंता का विषय है, क्योंकि फर्जी पहचान पर बना कोई भी दस्तावेज देश की सुरक्षा और संवैधानिक नागरिकता व्यवस्था दोनों को कमजोर करता है। पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र ही ऐसे रैकेट रोक सकता है।
क्यों मिला पासपोर्ट रैकेट?
समझें क्या है पूरा मामला
कौन हैं दो मुख्य आरोपी?
ग्वालियर भोपाल जबलपुर से बने 70 पासपोर्ट
रियाल ने अकेले बनवाए 69 पासपोर्ट
मठ का कनेक्शन क्या है?
"पूरे रैकेट की हर एंगल से बारीकी से जांच हो रही है।"
By: -डी श्रीनिवास वर्मा, चीफ, एसटीएफ
थाईलैंड चीन भूटान तक हुआ सफर
कुछ आवेदनों में मोबाइल नंबर आवेदक के नाम पर नहीं थे। STF अब आधार, नगर निगम और पंचायत रिकॉर्ड भी जांच रही है। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे फर्जी पहचान बनाई गई थी।
अब जांच में आगे क्या?
क्या यह सिर्फ पासपोर्ट का खेल था? या इससे कहीं बड़ा जाल फैला है?
यह खबर क्यों जरूरी है
- यह पासपोर्ट रैकेट कितना बड़ा है?
मध्यप्रदेश में 70 फर्जी पासपोर्ट के मामले की जांच चल रही है। ये पासपोर्ट 2021 से 2023 के बीच बनवाए गए। अब तक पांच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। - डबरा के बौद्ध मठ का इससे क्या संबंध है?
मठ के पते पर 17 फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। कोई भी धारक असल में वहां का निवासी नहीं था। STF अब यह पता कैसे इस्तेमाल हुआ, इसकी जांच कर रही है। - मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी रियाल चौधरी है। वह 2017 से फर्जी पासपोर्ट पर भारत में रह रहा था। उसने 69 और लोगों के पासपोर्ट बनवाए।
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