टोल चोरी पर सख्ती: न बिकेगी गाड़ी, न बनेगा फिटनेस सर्टिफिकेट, जानें नए नियम

सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत टोल नियमों को सख्त कर दिया गया है। अब अगर किसी वाहन पर बकाया टोल होगा, तो उसकी NOC, फिटनेस और नेशनल परमिट जैसी सेवाएं रोक दी जाएंगी।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के लागू होने से टोल वसूली अब गाड़ी के फिटनेस और एनओसी से जुड़ गई है।

  • टोल बकाया होने पर गाड़ी का ओनरशिप ट्रांसफर नहीं हो सकेगा और न ही नेशनल परमिट जारी होगा।

  • वाहन पोर्टल और टोल सर्वर के सिंक होने से अब हर गाड़ी का अनपेड टोल रिकॉर्ड में दर्ज होगा।

  • एनओसी के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म 28 में अब टोल बकाया की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • सरकार भविष्य में बिना रुकावट (Barrier-free) टोलिंग की तैयारी कर रही है, जिसमें कैमरे सीधे नंबर प्लेट से वसूली करेंगे।

News In Detail

अगर आप नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं और कभी तकनीकी खामी या फास्टैग में कम बैलेंस होने की वजह से बिना टोल दिए निकल जाते हैं, तो अब सावधान हो जाइए।

ऐसा करना आपको परेशानी में डाल सकता है। सरकार ने अब टोल वसूली के नियमों को सख्त कर दिया है। सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (द्वितीय संशोधन) रूल्स 2026 के तहत अब टोल का बकाया होने पर आपकी गाड़ी से जुड़ी जरूरी सेवाएं रोक दी जाएंगी।

यह कदम इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को मजबूत करने और टोल चोरी को रोकने के लिए उठाया गया है।

गाड़ी की इन सर्विस पर लग जाएगा ब्रेक 

नए नियमों के अनुसार, अगर आपकी गाड़ी पर किसी भी Toll plaza का शुल्क बकाया है, तो आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। अब बिना टोल क्लीयरेंस के ये काम नहीं होंगे।

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC): यदि आप अपनी गाड़ी किसी दूसरे को बेचना चाहते हैं या दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए सबसे पहले आपको टोल फीस चुकानी होगी तभी एनओसी मिलेगी।

  • फिटनेस सर्टिफिकेट: कॉमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्युअल तब तक नहीं होगा जब तक पिछला भुगतान जमा न हो जाए।

  • नेशनल परमिट: ट्रक और बसों जैसे वाहनों को अब नेशनल परमिट तभी मिलेगा जब उनका टोल रिकॉर्ड पूरी तरह क्लीन होगा।

ऐसे काम करेगा नया डिजिटल ट्रैप 

अब सबके मन में यह सवाल उठता है कि विभाग को कैसे पता चलेगा कि आपकी गाड़ी पर टोल बकाया है? इसके लिए सरकार ने वाहन पोर्टल को टोल कलेक्शन सिस्टम के साथ जोड़ दिया है। अब प्रक्रिया कुछ इस तरह काम करेगी –

  • सेंसर और कैमरा: टोल प्लाजा पर लगा आरएफआईडी (RFID) रीडर फास्टैग स्कैन करेगा। अगर बैलेंस कम है, तो कैमरा गाड़ी के नंबर प्लेट की फोटो ले लेगा।

  • डाटा शेयरिंग: यह जानकारी एनपीसीआई (NPCI) के जरिए सीधे सड़क परिवहन मंत्रालय के सर्वर पर पहुंच जाएगी।

  • रिकॉर्ड अपडेट: गाड़ी के इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर उस बकाया राशि को आपके डिजिटल प्रोफाइल से जोड़ दिया जाएगा।

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अनपेड टोल यूजर क्या है

सरकार ने पहली बार अवैतनिक यूजर (Unpaid Toll User) शब्द को परिभाषित किया है। इसके तहत, अगर किसी वाहन की आवाजाही इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में तो दर्ज हो जाती है, लेकिन नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 के मुताबिक उसका भुगतान नहीं हुआ है, तो उसे बकाया माना जाएगा। यानी अब सिर्फ फास्टैग में पैसे की कमी नहीं, बल्कि किसी भी तकनीकी वजह से पेमेंट न हो पाना भी आपकी जिम्मेदारी होगी।

बिना बैरियर वाले टोल की तैयारी 

यह सारी सख्ती दरअसल भविष्य के मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के लिए की जा रही है। इस सिस्टम में हाईवे पर कोई बैरियर या गेट नहीं होगा। गाड़ियां 100 की रफ्तार में निकलेंगी और ऊपर लगे कैमरे अपने आप पैसे काट लेंगे। क्योंकि वहां गाड़ी को रोकने वाला कोई नहीं होगा, इसलिए केंद्र सरकार ने इसे गाड़ी के कागजों (NOC और फिटनेस) से जोड़ दिया है ताकि लोग खुद ही ईमानदारी से भुगतान करें।

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फॉर्म 28 में हुआ बड़ा बदलाव 

गाड़ी बेचने या ट्रांसफर करने के लिए जरूरी फॉर्म 28 अब अपडेट कर दिया गया है। अब वाहन मालिक को खुद यह लिखकर देना होगा कि उसकी गाड़ी पर कोई टोल बकाया नहीं है।

साथ ही, उसे संबंधित टोल का विवरण भी देना होगा। अच्छी बात यह है कि अब फॉर्म 28 के कुछ हिस्से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डिजिटल रूप में भी जारी किए जा सकेंगे।

फॉर्म 28 क्या है

गाड़ी बेचने या ट्रांसफर करने के लिए फॉर्म 28 और NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जरूरी होते हैं। यह प्रमाण पत्र दिखाता है कि गाड़ी पर कोई टैक्स, चालान या कानूनी मामला बाकी नहीं है।

खासकर जब आप गाड़ी को दूसरे राज्य या जिले में ट्रांसफर कर रहे होते हैं, तब यह जरूरी होता है। इस फॉर्म को भरकर और बाकी जरूरी दस्तावेज RTO में जमा करने पर NOC मिल जाती है, जिससे गाड़ी का स्वामित्व ट्रांसफर करना आसान हो जाता है।

भारत का विशाल हाईवे नेटवर्क 

भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेशनल हाईवे नेटवर्क (1.47 लाख किमी) रखता है। देश में कुल 599 National Highway हैं जिन पर 1087 टोल प्लाजा मौजूद हैं। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने रिकॉर्ड 61 हजार 400 करोड़ रुपए का टोल वसूला था। दिल्ली-मुंबई वाला NH-48 सबसे व्यस्त हाईवे है, जहां पीक आवर्स में हर घंटे 5 हजार से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं।

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