NCERT का नया सिलेबस: कक्षा 9वीं में मनुस्मृति, ECI और SIR पढ़ेंगे बच्चे

Manya Jain | Jun 26, 2026, 18:23 IST
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ncert class 9 ec sir manusmriti syllabus
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NCERT ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई किताब Understanding Society India and Beyond में बड़े बदलाव किए हैं। इसमें चुनाव आयोग, SIR और मनुस्मृति का श्लोक शामिल है। भारत की चुनाव प्रक्रिया को बेमिसाल बताया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • NCERT ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की है।
  • इसमें चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न पर पूरा चैप्टर है।
  • किताब में भारत की चुनाव प्रक्रिया को बेमिसाल बताया गया है।
  • इसी किताब में मनुस्मृति का प्रसिद्ध श्लोक (3.56) भी शामिल किया गया है।
  • श्लोक के जरिए वैदिक काल में महिलाओं के सम्मान का संदर्भ दिया गया है।
एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब बदल दी है। नई किताब का नाम "Understanding Society India and Beyond" है। इसी सत्र से यह किताब छात्रों को पढ़ाई जाएगी। इसमें चुनाव आयोग, SIR और मनुस्मृति जैसे विषय शामिल हैं। किताब को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा छिड़ गई है।

कौन सी किताब में हुआ बदलाव

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT – National Council of Educational Research and Training) ने यह किताब तैयार की है। यह कक्षा 9 की सोशल साइंस का पहला भाग है। चालू सत्र से यह छात्रों के सिलेबस का हिस्सा बनेगी।

यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020– National Education Policy) के तहत हुआ है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF – National Curriculum Framework) के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। कक्षा 9 की कई पुस्तकों का स्वरूप और सामग्री बदली गई है।

ECI और SIR पर क्या लिखा है

किताब में भारत के चुनाव आयोग (ECI – Election Commission of India) पर विस्तार से जानकारी है। एक हिस्से में एसआईआर (SIR – Special Intensive Revision) भी समझाया गया है। नई किताब भारत की चुनाव प्रक्रिया को दुनिया में बेमिसाल बताती है।

किताब के मुताबिक भारत में 96.8 करोड़ से अधिक पात्र मतदाता हैं। ये मतदाता विविध इलाकों और भौगोलिक स्थितियों में फैले हुए हैं। चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से इस पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करता है। यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करता है।

किताब बताती है कि SIR का काम मतदाता सूचियों का अपडेशन है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई पात्र मतदाता सूची से न छूटे। उम्मीदवारों के नामांकन और प्रचार के नियम भी आयोग ही तय करता है।

अध्याय में दिव्यांगों, सर्विस वोटर्स और बुजुर्गों के लिए मतदान सुविधाओं पर सवाल हैं। 60 और 80 साल से ऊपर के मतदाताओं पर अलग प्रश्न दिए गए हैं। कैदियों और एहतियातन हिरासत वालों से जुड़े सवाल भी इसमें शामिल हैं।

मनुस्मृति का कौन सा श्लोक जुड़ा

किताब में State and Society up to 1000 CE नाम का एक अध्याय है। इसी में मनुस्मृति का श्लोक 3.56 शामिल किया गया है। यह श्लोक वैदिक काल में महिलाओं के सम्मान के संदर्भ में रखा गया है।

श्लोक है: यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥

इसका अर्थ है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। जहां ऐसा सम्मान नहीं होता, वहां सभी धार्मिक क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं।

वैदिक काल की महिलाएं

पुस्तक वैदिक काल को महिलाओं के सम्मान का दौर बताती है। उस समय महिलाओं को समाज में ऊंचा स्थान प्राप्त था। वे विद्वानों की तरह शिक्षा ग्रहण करती थीं।

धार्मिक अनुष्ठानों में महिलाएं पुरुषों के साथ शामिल होती थीं। सार्वजनिक सभाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी थी। ऋग्वेद के कई सूक्तों की रचना महिला ऋषिकाओं ने की मानी जाती है।

इन विदुषी महिलाओं में अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा का नाम है। किताब इन्हें वैदिक समाज के आदर्श उदाहरण के रूप में पेश करती है।

पुस्तक केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं है। इसमें साफ कहा गया है कि महिलाओं की स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रही। समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं। महिलाओं की भूमिकाओं में भी बदलाव और कई बार गिरावट आई।

वर्ण व्यवस्था पर भी चर्चा

अध्याय वर्ण व्यवस्था और जाति के विकास पर भी बात करता है। किताब के अनुसार प्रारंभिक वैदिक समाज में सख्त सामाजिक स्थिति नहीं थी। उस समय जन्म के आधार पर कठोर भेद नहीं माना जाता था।

समाज में कर्म, व्यवसाय और सांस्कृतिक सम्बन्धों पर जोर था। बाद के काल में यह व्यवस्था धीरे-धीरे जन्म आधारित बनती गई।

मनुस्मृति पर पहले भी विवाद

NCERT की किताब में मनुस्मृति का जिक्र ऐसे समय आया है, जब यह विषय पहले भी विवादों में रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU – Delhi University) के विधि संकाय (faculty of Law) में हाल ही में एक प्रस्ताव सामने आया था। इस प्रस्ताव में मनुस्मृति को वैकल्पिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात थी।

प्रस्ताव का व्यापक विरोध हुआ था। विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे लागू नहीं किया था। अब स्कूल स्तर की NCERT पुस्तक में इसका हवाला आने से नई बहस की संभावना है।

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