इंटर्नशिप फीस पर NMC का बड़ा फैसला: मेडिकल छात्रों से MBBS इंटर्नशिप फीस पर अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे कॉलेज
Pawan Modiya | Apr 09, 2026, 21:29 IST
Photograph: (the sootr)
नेशनल मेडिकल कमीशन NMC ने साफ किया कि MBBS इंटर्नशिप फीस (MBBS Internship Fee) नहीं ली जा सकती। फीस केवल 4.5 साल की पढ़ाई के लिए ही लागू होगी।
देशभर के मेडिकल छात्रों के लिए राहत भरी खबर आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission – NMC) ने सभी मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि MBBS इंटर्नशिप फीस (MBBS Internship Fee) के नाम पर छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आयोग ने कहा है कि एमबीबीएस कोर्स (MBBS Course) की फीस केवल पढ़ाई की निर्धारित अवधि के लिए ही ली जा सकती है। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों से फीस लेना नियमों के खिलाफ है। यह फैसला हजारों मेडिकल छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, क्योंकि कई कॉलेज अब तक पूरे 5 या 5.5 साल के कोर्स (Medical Course Duration) के नाम पर फीस वसूल रहे थे।
पिछले कुछ समय से नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission – NMC) को कई शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ मेडिकल कॉलेज इंटर्नशिप फीस (Internship Fee) के नाम पर छात्रों से अतिरिक्त पैसे ले रहे हैं।
कई संस्थान एमबीबीएस कोर्स की कुल अवधि में एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (Compulsory Rotating Medical Internship – CRMI) को जोड़कर फीस वसूल रहे थे। NMC ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सभी मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए।
भारत में एमबीबीएस कोर्स (MBBS Course) की संरचना इस प्रकार होती है:
इसका मतलब है कि मेडिकल छात्रों की कक्षा आधारित पढ़ाई (Academic Study) केवल 4.5 साल तक होती है। इसके बाद छात्र अस्पताल में प्रशिक्षण (Medical Training) के रूप में इंटर्नशिप करते हैं, जहां वे मरीजों के साथ काम करना सीखते हैं। NMC के अनुसार क्योंकि इस अवधि में कक्षा आधारित पढ़ाई नहीं होती, इसलिए इंटर्नशिप फीस लेना उचित नहीं है।
नेशनल मेडिकल कमीशन के अनुसार:
NMC ने अपने नोटिस में साफ कहा है कि सभी मेडिकल कॉलेजों को तुरंत अपनी फीस संरचना (Fee Structure) में बदलाव करना होगा।कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फीस केवल शिक्षण अवधि के लिए ली जाए। फीस का विवरण स्पष्ट और पारदर्शी हो। छात्रों से केवल पढ़ाई, लैब और कक्षा सुविधाओं के लिए ही शुल्क लिया जाए। आयोग ने यह भी कहा कि जहां पढ़ाई नहीं हो रही है, वहां फीस लेना गलत है।
मेडिकल शिक्षा भारत में पहले से ही काफी महंगी मानी जाती है। कई परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी बचत खर्च करते हैं। शिक्षा ऋण लेते हैं या कई बारकर्ज तक लेना पड़ता है। ऐसे में एक साल की अतिरिक्त इंटर्नशिप फीस (Internship Fee) परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक परेशानी बन जाती थी। NMC के इस फैसले से छात्रों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो सकता है।
✔ इंटर्नशिप के दौरान कोई अकादमिक फीस नहीं
✔ फीस केवल 4.5 साल की पढ़ाई तक सीमित
✔ कॉलेज को पारदर्शी फीस स्ट्रक्चर देना होगा
✔ नियम तोड़ने पर कॉलेज पर कार्रवाई हो सकती है
NMC ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई मेडिकल कॉलेज इस निर्देश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संभावित कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता (Transparency in Medical Education) बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे फीस संरचना स्पष्ट होगी। छात्रों का आर्थिक शोषण कम होगा। मेडिकल शिक्षा प्रणाली अधिक भरोसेमंद बनेगी। NMC का यह आदेश मेडिकल शिक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
नहीं। NMC के नए नियम के अनुसार MBBS इंटर्नशिप के दौरान छात्रों से कोई शैक्षणिक फीस नहीं ली जा सकती। फीस केवल 4.5 साल की पढ़ाई के लिए ही लागू होगी।
भारत में MBBS कोर्स की कुल अवधि लगभग 5.5 साल होती है। इसमें 4.5 साल पढ़ाई और 1 साल अनिवार्य मेडिकल इंटर्नशिप (Medical Internship) शामिल होती है।
अगर कोई मेडिकल कॉलेज इंटर्नशिप फीस मांगता है तो छात्र इसकी शिकायत नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या संबंधित शिक्षा प्राधिकरण से कर सकते हैं। नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है।
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आयोग ने कहा है कि एमबीबीएस कोर्स (MBBS Course) की फीस केवल पढ़ाई की निर्धारित अवधि के लिए ही ली जा सकती है। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों से फीस लेना नियमों के खिलाफ है। यह फैसला हजारों मेडिकल छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, क्योंकि कई कॉलेज अब तक पूरे 5 या 5.5 साल के कोर्स (Medical Course Duration) के नाम पर फीस वसूल रहे थे।
NMC का आदेश क्यों आया?
छात्रों की शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई
कई संस्थान एमबीबीएस कोर्स की कुल अवधि में एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (Compulsory Rotating Medical Internship – CRMI) को जोड़कर फीस वसूल रहे थे। NMC ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सभी मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए।
MBBS कोर्स की अवधि क्या है?
पढ़ाई और इंटर्नशिप में क्या अंतर है?
| चरण | अवधि |
|---|---|
| शैक्षणिक पढ़ाई | 4.5 साल (54 महीने) |
| अनिवार्य इंटर्नशिप | 1 साल |
NMC का स्पष्ट नियम
- MBBS की पढ़ाई की अवधि: 4.5 साल
- अनिवार्य इंटर्नशिप: 1 साल
- इंटर्नशिप के दौरान शैक्षणिक फीस नहीं ली जाएगी
- मेडिकल कॉलेज को फीस संरचना पारदर्शी बनानी होगी
कॉलेजों को फीस संरचना सुधारने का आदेश
छात्रों और अभिभावकों को कैसे मिलेगा फायदा?
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बातें
✔ फीस केवल 4.5 साल की पढ़ाई तक सीमित
✔ कॉलेज को पारदर्शी फीस स्ट्रक्चर देना होगा
✔ नियम तोड़ने पर कॉलेज पर कार्रवाई हो सकती है
नियम का पालन न करने पर होगी कार्रवाई
संभावित कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं:
- प्रशासनिक कार्रवाई
- कानूनी कार्रवाई
- मान्यता से संबंधित कदम
मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
FAQs
1. क्या MBBS इंटर्नशिप फीस (MBBS Internship Fee) देना जरूरी है?
2. MBBS कोर्स (MBBS Course) की कुल अवधि कितनी होती है?
3. अगर कोई कॉलेज इंटर्नशिप फीस (Internship Fee) लेता है तो क्या करें?
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