पीएम मोदी को नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान: 32वां वैश्विक सम्मान बना भारत-नॉर्वे रिश्तों का नया अध्याय
Pawan Modiya | May 18, 2026, 21:44 IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया। यह उनका 32वां वैश्विक सम्मान है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi को नॉर्वे की राजधानी Oslo में नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पीएम मोदी को भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों, वैश्विक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह प्रधानमंत्री मोदी का 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान (वैश्विक सम्मान) है। इससे पहले उन्हें स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ भी प्रदान किया गया था।
‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है, जिसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने नॉर्वे के हितों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में विशेष योगदान दिया हो।
इस सम्मान को स्वयं नॉर्वे के राजा King Harald V ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया। समारोह के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
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43 साल बाद किसी
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। करीब 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे का दौरा किया है। इससे पहले वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने नॉर्वे की यात्रा की थी।
इस दौरे के दौरान भारत और नॉर्वे ने ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
भारत और नॉर्वे के बीच समुद्री व्यापार, एलएनजी आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा और आर्कटिक रिसर्च जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों का प्रतीक है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति और वैश्विक प्रभाव लगातार मजबूत हुआ है। जी-20 की अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन पर भारत की भूमिका, ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने और रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत किया है।
नॉर्वे द्वारा दिया गया यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की बढ़ती वैश्विक साख और कूटनीतिक प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत पिछले कुछ वर्षों से नॉर्डिक देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है। स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क और फिनलैंड जैसे देशों के साथ टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा का उद्देश्य भी यूरोप और नॉर्डिक देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना माना जा रहा है।
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यह प्रधानमंत्री मोदी का 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान (वैश्विक सम्मान) है। इससे पहले उन्हें स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ भी प्रदान किया गया था।
Honoured to receive the Grand Cross of the Royal Norwegian Order of Merit. This honour is dedicated to the people of India and is a tribute to the enduring friendship between India and Norway. It reflects our shared commitment to global progress. pic.twitter.com/bh7ucPamK4
— Narendra Modi (@narendramodi) May 18, 2026
नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान का क्या महत्व है?
इस सम्मान को स्वयं नॉर्वे के राजा King Harald V ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया। समारोह के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
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43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा
इस दौरे के दौरान भारत और नॉर्वे ने ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत-नॉर्वे संबंधों को मिलेगा नया आयाम
भारत और नॉर्वे के बीच समुद्री व्यापार, एलएनजी आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा और आर्कटिक रिसर्च जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों का प्रतीक है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
नॉर्वे द्वारा दिया गया यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की बढ़ती वैश्विक साख और कूटनीतिक प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
नॉर्डिक देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा का उद्देश्य भी यूरोप और नॉर्डिक देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना माना जा रहा है।
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