भारत में प्लास्टिक नोट छापने के लिए RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर, जानें फायदे,
Manya Jain | Jun 06, 2026, 18:19 IST
Plastic Notes in India
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में फटे और नकली नोटों की समस्या को खत्म करने के लिए प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट लॉन्च करने पर विचार कर रहा है। आइए जानते हैं कैसे प्लास्टिक नोट बनते हैं और क्या इसके फायदे हैं।
समझें पूरा मामला...
- आरबीआई (RBI) भारत में प्लास्टिक या पॉलीमर के नोट जारी करने पर विचार कर रहा है।
- यह योजना अभी शुरुआती दौर में है और इसके फायदे-नुकसान देखे जा रहे हैं।
- भारतीय बाजार में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बाद भी नकदी का चलन लगातार बढ़ा है।
- कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं, जबकि प्लास्टिक के नोट कई गुना ज्यादा चलते हैं।
- पॉलीमर नोटों की मदद से देश में नकली नोटों के कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
कागजी नोटों की समस्या से मिलेगी राहत
इसके अलावा देश में नकली नोटों का धंधा भी एक बड़ी चुनौती है। अब इस दोहरी समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में नेक्स्ट जनरेशन यानी प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी में है।
आपके वॉलेट में मौजूद 10, 20, 100 या 500 रुपए के कागजी नोट जल्द ही एक नए और मॉडर्न अवतार में नजर आ सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भारत में प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी काफी तेजी से कर रहा है।
कब से जेब में आएंगे नए नोट
रिपोर्ट के मुताबिक, नोट छापने वाली शाखा ने इन नोटों को बनाने के लिए जरूरी ओपेसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीटों के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया है। कंपनियों को बोली (EOI) जमा करने के लिए 18 अगस्त तक की लास्ट डेट दी गई है।
कब से शुरू होगा नया दौर
पॉलीमर शीट से बदल जाएगा नोटों का रूप
क्या होंगे प्लास्टिक नोटों के फायदे
- लॉन्ग लाइफ और मजबूती: ये प्लास्टिक नोट नॉर्मल कागजी नोटों के मुकाबले कहीं ज्यादा टिकाऊ होंगे।
- कटने-फटने का नो टेंशन: अक्सर बाजार में कटे-फटे नोटों की समस्या होती है, लेकिन प्लास्टिक करेंसी के जल्दी खराब होने या फटने का चांस बहुत कम रहेगा।
- पूरी तरह वॉटरप्रूफ: बारिश के मौसम में या पानी में गिर जाने पर अक्सर नोट गल जाते हैं, लेकिन इन पर पानी और नमी (Moisture) का कोई असर नहीं पड़ेगा।
डिजिटल दौर में भी क्यों बढ़ रही है कैश की मांग
आरबीआई की ताजा सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में नकदी का इस्तेमाल हर साल बढ़ रहा है। बाजार में मौजूद कुल कैश का 90 प्रतिशत हिस्सा करेंसी नोटों के रूप में है।
क्या होते हैं प्लास्टिक नोट
प्लास्टिक नोट में कौन सा Material होता है?
इन नोटों की पतली, लचीली प्लास्टिक फिल्म बनाने के लिए Biaxial Orientation नामक प्रक्रिया अपनाई जाती है — यानी polymer film को दोनों दिशाओं में खींचा जाता है, जिससे वह और भी मज़बूत व टिकाऊ बन जाती है।
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कितने साल ज्यादा टिकते हैं पॉलीमर प्लास्टिक नोट
बैंक ऑफ इंग्लैंड की एक रिसर्च के मुताबिक, प्लास्टिक के नोट कागजी नोटों के मुकाबले दोगुना से लेकर पांच गुना ज्यादा चलते हैं। ये नोट पानी में भी नहीं गलते और आसानी से फटते भी नहीं हैं।
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आज Bank of England विशेष रूप से polymer नोट ही जारी करता है।Bank of England अब तक लगभग 6 अरब polymer नोट छाप चुका है। £5, £10, £20 और £50 — चारों denomination के नोट polymer पर ही छपते हैं और इनमें raised print व tactile features जैसी सुलभता की सुविधाएं भी शामिल हैं।
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कनाडा के polymer नोटों में holographic strips, transparent windows और UV-reactive ink का उन्नत संयोजन होता है जो इन्हें दुनिया के सबसे सुरक्षित नोटों में रखता है।
नकली नोटों से काले कारोबार पर लगेगी लगाम?
ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 1990 के दशक में पूरी तरह से पॉलीमर नोट अपनाए थे। वहां साल 2024-25 में पूरे देश में सिर्फ 118 नकली नोट ही पकड़े गए। इससे पता चलता है कि यह तकनीक कितनी सुरक्षित है।
पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर हैं पॉलीमर नोट
कम छपाई होने के कारण पेड़ों की कटाई कम होती है और पानी की भी बचत होती है। जब ये नोट पूरी तरह पुराने हो जाते हैं, तो इन्हें रीसायकल करके नई प्लास्टिक की वस्तुएं बनाई जा सकती हैं।
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