लोन से लेकर रिकवरी तक RBI करने जा रहा 10 बड़े बदलाव, जानें आपकी जेब पर असर
Amresh Kushwaha | Aug 30, 2026, 12:22 IST
RBI New Rules
आरबीआई 1 अप्रैल 2027 से बैंकिंग के नए नियम लागू करेगा। लोन मंजूरी, ब्याज दर, जमा राशि और वसूली से जुड़े बदलाव होंगे। वसूली एजेंट की बदतमीजी पर अब बैंक जिम्मेदार होगा। पूर्व डिप्टी गवर्नर आरएस गांधी ने पूरी जानकारी दी है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- आरबीआई बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है।
- नए नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में लागू होंगे।
- आरबीआई अब तक 9446 पुराने नियम और सर्कुलर वापस ले चुका है।
- लोन मंजूरी, ब्याज दर, जमा राशि और वसूली पर सीधा असर पड़ेगा।
- वसूली एजेंट की बदतमीजी पर अब सीधे बैंक जिम्मेदार होगा।
क्या बदलाव कर रहा आरबीआई
इन्हीं सुझावों के आधार पर काम-काज के तरीकों में बदलाव की सिफारिशें की गई हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि नए नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। इससे आम आदमी की रोजमर्रा की बैंकिंग जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। लोन लेना, ब्याज चुकाना और पैसा जमा रखना, सब कुछ नए तरीके से होगा।
कब से लागू होंगे नियम
उनके मुताबिक आरबीआई ने इस बड़े बदलाव के लिए अपने पुराने 9446 सर्कुलर वापस लेने का फैसला किया है। इनमें कई ऐसे नियम, दिशा-निर्देश और नोटिफिकेशन शामिल हैं जो अब बेकार हो चुके थे। इन्हें या तो पूरी तरह हटाया जा रहा है या फिर आपस में जोड़ा जा रहा है।
एक्सपर्ट के अनुसार नए नियमों को मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर केंद्रित रखा गया है। इनमें कर्ज की मंजूरी, ब्याज दर, बैंक में जमा रकम और कर्ज वसूली शामिल है। नए मसौदों में ब्याज की गणना को पहले से ज्यादा पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही सामान्य तौर पर मासिक आधार पर ब्याज लेने की सिफारिश भी की गई है। इससे ग्राहकों को अपनी ईएमआई (Equated Monthly Installment) समझने में आसानी होगी।
रिस्क देखकर मिलेगा लोन
क्रेडिट स्कोर का असर
आपकी जमा राशि सुरक्षित
वसूली एजेंट पर लगाम
साइबर फ्रॉड में जिम्मेदारी
इसी तरह अब लोन मंजूर करने या रिजेक्ट करने में एआई (Artificial Intelligence) और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। अगर सॉफ्टवेयर की गलती से गलत फैसला होता है, तो इसकी जिम्मेदारी भी बैंक की ही होगी। लोन रिजेक्ट होने पर बैंक को इसकी वजह भी बतानी होगी।
फंसे कर्ज पर सख्ती
ब्याज दर में पारदर्शिता
साथ ही ब्याज दरों में पूरी पारदर्शिता लाने का भी प्रस्ताव है। बैंक को यह साफ बताना होगा कि ब्याज दर किस आधार पर तय या कम की जा रही है। इससे ग्राहक अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सकेंगे।
एक्सपर्ट की राय
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